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Saturday, December 24, 2022

?.........।






1.

मरने से पहले मैं- मरना चाहती हूं।

तेरी होने से पहले मैं - तेरी, होना चाहती हूं।
मेरे सपनों में आकर तुम क्या देखोगे।
मैं सपनों में सपनों का जनाजा देखती हूं।
तू मुझे पाकर बहुत खुश होगा।
मैं मायूश चेहरे को खिलखिलाना जानती हूं।

2.

उन्हें आदत नहीं है हमें यूं मायूस देखने की।
हमें भी आदत नहीं है वक्त की चादर में खुद को लपेटने की।
वो अपना सबकुछ लूटा बैठेगें हमें खुश देखने की खातिर।
हमनें भी मुखौटा बनवा लिया उनकी जागीर बचाने की खातिर।

3
कायनात की खुशियां एक तरफ।

तेरे दिल में बसेरा एक तरफ।

हीरे मोती एक तरफ,

तेरा मेरा होना एक तरफ। 

4.

मैंने तेरे सज़दे में इतनी दुआएं पढ़ी 

कीमेरी अपनी बद्दुआ भी अब बेअसर पड़ी है।

क्या तुम हो ?.......

कोई भी रिश्ता खामोशी पर खत्म हुआ है क्या।

इंतजार सिर्फ एक तरफ से हो ज़रुरी है क्या।

तुम हो बस यह अहसास ही काफी था।

अगर डगमगाऐं कदम तू संभाल लेगा, ऐसा विश्वास था।

कभी कोई मुश्किल आई नहीं, की मुझे तू याद आता था।

दूर होने पर भी तू दूर कहां था ।

तू कभी ना छूटने वाली आदत बन गया।

तुम जा चुके हो मेरी राहों से रोम- रोम गवाही देता ।

फिर भी दिल को तुम्हें खोने का डर हर पल सताता ।

मैं तेरा इंतज़ार हर पल करती हूं।

क्या पता कब पलट कर देखले तू,

मैं तो तेरे पीछे- पीछे चलती हूं।

मेरे बुलाने पर तुम कभी ना आना।

हम बुरे हैं , अब इस यकीन पर जिंदा रहना।




Wednesday, June 8, 2022

कामयाबी


जिंदगी कोल्हू के बैल जैसी बीत रही है।

सफर जहां से शुरू किया वहीं आके खत्म हो रहा है।

बीतता समय कुछ कहना चाहता है।

कद की उंचाई कामयाबी से मापता है

कामयाबी के मायने भी कहां एक जगह टिके हैं।

प्यासे के लिए पानी को पाना कामयाबी है।

भूखे के लिए रोटी को पाना कामयाबी है।

जिनको ये सब मिले वो सीर पर छत चाहता है।

सुबह उठते है तो साथ में उठती है, इच्छाएं।

कुछ अपनी तो कुछ अपनों की।

उन इच्छाओं को पीठ पर लिए ,

बाजार में अपने सपनों का सौदा करते हैं।

और थक-हार कर सो जाते हैं।

अगली सुबह फिर उठते हैं , बेहतर कोशिश करने के लिए।

जिंदगी में कामयाबी के खालीपन को भरने में लगे रहते हैं।

जबकि कामयाबी वो छेद किया हुआ मटका है।

चाहे कितना भी भरो वो खाली ही रहता है।

कामयाबी के सफर का कोई अंत ही नहीं है।

हर पल हर शख्स के लिए यह अलग मायने बनाती है। 

हां, इसके पीछे इंसान अपने सांसों की गिनती पूरी करता है।

लेकिन इंसान जिंदगी को जीना भूल जाता है।


Thursday, May 26, 2022

ये कैसा पागलपन करते हैं

वो कहते है ना जब ईश्वर है तो हमें चिंता करने की  जरूरत क्या।

और यदि ईश्वर नहीं है, तो हमारे चिंता करने से होगा क्या।


"बस मुझे ये मिल जाए मेरे मौला।

बदले में चाहे और कुछ भी ले-लेना।"

हे ! मेरे मौला , ये कैसा? पागलपन करते हैं।

रिश्तों में ही नहीं ये तो, तुमसे भी शौदा करते हैं।


हिम्मत तो देखो तेरे- मानव की।

जो सांसों के लिए तुझसे आश लगाए है।

वो आज तुम्हें खुश करने के लिए आया है।

तेरी खिलती कलियां तोड़ कर वो हार बनाकर लाया है


तुने क्या करने के लिए भेजा है।

ये कहां उलझ कर रह गए हैं।

तुने रक्षक बनाकर भेजा जिसको।

वो ही भक्षक बन बैठा है।


तू तो बिना बोले सुनता सबकि फिर ये क्यों पाखंड रचाते हैं।

भूखे को तड़पता छोड़कर ये तुम्हें छप्पन भोग चढ़ाते हैं।

तेरे बनाएं मानव को बेआबरू करके तुम्हारे चादर चढ़ाते हैं।

किसी के घर का दीपक बुझाकर, ये तेरे दर पर मोम जलाते हैं।


Saturday, May 14, 2022

My first job interview.

 मुझे मेरे हृदय के धड़कने की आवाज अपने कानों में साफ़ सुनाई दे रही थी।

कुछ समझ नहीं आ रहा था। मेरे पास से गुजर रहा हर सक्स की आंखों में मुझे बहोत से सवाल नजर आ रहे थे। और स्वयं मेरे पास भी बहुत सारे सवाल थे । एक पल को लगा किसी को रोक लूं.. पूछूं वहां के माहौल और लोगों के बारे में। मन कर रहा था उठो और भागो यहां से, लेकिन आत्मा चीख-चीख कर कह रही थी नहीं यह सही नहीं है। मेरे हृदय और आत्मा दोनों में जोर - दार बहस चल रही थी कि इतने में एक आवाज आई....'

"मैडम जी आपको अंदर बुलाया है"
मैंने एक गहरी सांस ली और कहां --
हे!  प्रभु संभाल लेना।
अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान जो मेरे अंदर के डर को छुपा सके। और ढ़ेर सारा आत्मविश्वास क्योंकि मैं कुछ ग़लत नहीं करने जा रही थी।
मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा सामने कुर्सी पर एक सज्जन बैठे थे, उनके चेहरे पर हल्की सी चिढ़ाने वाली मुस्कान थी। कुछ पल के लिए उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली और कहां आपको देखकर मुझे मेरे पूराने दिन याद आ गए।
मैंने सिर को झुकाकर हाथ जोड़कर उनको प्रणाम किया। मुझे सामने रखी कुर्सी पर बैठने के लिए कहा गया। आभार व्यक्त करते हुए मैंने कुर्सी को खींचा और मैं उसके ऊपर बैठ गई।
सच कहूं तो ये सब मैं पहले दिन यूट्यूब में वीडियो देखी थी। किसी अधिकारी से किस तहज़ीब में बात करते हैं।

हम दोनों में सवाल और जवाब का सिलसिला शुरू हुआ। उनके सवाल मुझे एक तीर के समान लग रहे थे। मानो वे मुझे घायल कर ही देंगे। मैं भी कहां हार मानने वाली थी। मैंने भी एक सच्चे सिपाही की तरह डटकर मुकाबला किया। हर बार मेरा जवाब मेरी डाल बनता और मुझे घायल होने से बचाता। 

आखिर मुझे वह शब्द सुनने को मिल ही गए जिसको सुनने के लिए मेरे कान तरस रहे थे। क्योंकि मैंने अब तक उनकी दो शर्तों को पूरा कर लिया था। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में मैं पास थी।

अब एक अन्य अधिकारी के साथ मुझे मेरा काम दिखाने के लिए भेजा गया। अब मैं यह कहूं कि मुझे सब कुछ अच्छा लग रहा था। नहीं। मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। ना ही कुछ समझ आ रहा था कि अगले ही पल मेरे साथ क्या होने वाला है। मैंने जितनी कल्पना की थी सब कुछ उससे अलग था। उस समय का हर पल मुझे कुछ ना कुछ सिखा रहा था। पास से गुजर रहे शख्स मुझे उम्मीद की नजर से देख रहे थे।

"मैडम आप अंदर जाइए"
मानो उस अधिकारी का और मेरा सफर यही तक का था। मैंने कमरे में अपना कदम रखा ही था, कि एक गहरी भीड़ जैसी आवाज ने मेरा स्वागत किया।
सबके चेहरे पर स्माइल थी।
"Go..od  mo..rrrrrning  te..acher jiiiii...".
2 सेकंड के शब्दों को उन्होंने इतना लम्बा और सुरीली आवाज में कहा कि इतने में मैं अपने आप को संभाल सकती।
उन सब के चेहरों को देखकर मैं अपनी सारे घबराहट को भूल गई । ऐसा लगा मानों मैं- मैं नहीं हूं मुझ में एक नई ऊर्जा सी दौड़ गई । अब सब कुछ अच्छा लगने लगा ।मन कर रहा था जितना भी समय है उसे जी भरकर इन सब के साथ जी लूं। क्या पता कल यह पल आए या ना आए क्योंकि यह मेरा सपना था जो आज पूरा होता नजर आ रहा था। 

मुझे "बागी" फिल्म का एक डायलॉग याद आया 

" जंगल में हिरण जब जागता हैै। तो सोचता है कि आज अगर मैं जी जान से नहीं भागा तो मैं मर जाऊंगा उसी सुबह एक शेर जागता है और सोचता हैै आज अगर मैं जी जान से नहीं भागा तो मैं भूखा मर जाऊंगा शेर हो या हीरन हो भागना तो पड़ेगा ही । एक बागी और एक सिपाही में ज्यादा फर्क नहीं होता, पर यह उनके मकसद है जो एक को बागी और दूसरे को सिपाही बनाते हैं । बागी बनो पर किसी मकसद के लिए।"
 उसमें टाइगर ने वही रहकर मेहनत करने का सोचा था। मैंने भी वही रहकर मेहनत करने का सोचा।

मैंने पढ़ाना शुरू ही किया था कि, एक अन्य अध्यापक ने कक्षा में प्रवेश किया। वो अंतिम बैंच पर जाकर बैठ गया। उन्होंने कहा मैं प्रेक्षक हूं। आप पढ़ाना शुरू करें। अचानक से सारा वातावरण परिवर्तित हो गया। विद्यार्थियों ने अपने हाव-भाव बदल लिए। यह लो हम बैठ गए हैं अब आप हमें पढ़ा कर दिखाओ। हम भी तो देखें आप क्या पढ़ा सकते हैं। मुझे ऐसा लगने लगा। मेरे सामने "गब्बर और उनके गुंडे" बैठे हुए हैं, और मैं "बसंती" हूं। मुझे उन सबके सामने बिना रुके पढ़ाना है, मेरी जुबान रुकि तो मेरी नौकरी गई। मेरा मन कहे रहा था नहीं यह सही नहीं है, लगा ये मेरी बेज्जती कर रहे हैं। सच में उस समय कक्षा में ना तो कोई नम्र भाव वाला विद्यार्थी नजर आ रहे थे और न ही स्नेह भाव वाला अध्यापक। वहां केवल नौकरी देने वाले और नौकरी लेने वाली नजर आ रहे थे। सच कहूं तो भावना महज़ एक शब्द था।
सब एक- दूसरे को परखने में लगे थे।

मानो 'बादशाह अकबर' के दरबार में 'अनारकली' नृत्य पेश कर रही हो।

लेकिन कुछ भी हो मैंने भी देखना था। क्या इससे भी अधिक कठिन हो सकता है। जैसे - जैसे समय बीत रहा था बच्चों के चेहरे खिलने लगे थे। उन्हें समझ आ रहा था जो मैं समझाने की कोशिश कर रही थी। बीच-बीच में बच्चों के सवाल आने शुरू हुए। मैंने भी उनको बड़ी सरलता से जवाब दिया। समय अभी पूरा नहीं हुआ था कि मेरा चैप्टर पूरा हो गया। मैंने बच्चों से कहा आज के लिए केवल इतना ही आगे का हम कल देखेंगे, हां अगर आप सभी को कोई डाउट है तो आप मुझसे पूछ सकते हैं। एक विद्यार्थी ने कुछ पूछने पर मैंने उसे उसका जवाब दिया। बच्चे बहुत खुश थे।उन सब ने खिलखिलाती आवाज में मुझे धन्यवाद कहा।

मैं सातवें आसमान पर पहुंच गई थी। वो कहते है ना मेरे ओर से तो 'पैसा वसूल परफोर्मेंस थी'

 प्रेक्षक का चेहरा वैसे का वैसा ही था। मुझे वापस ऑफिस में जाने को कहा गया। मुझे जाते हुए अब ये नौकरी खोजाने का भय नहीं था। बल्कि मुझे एक-एक करके मेरे सारे अध्यापक याद आ रहे थे। मेरी आत्मा से उनके लिए दुआएं निकल रही थी। 

जैसे एक माली अपने पौधों को सींचता है।  ठीक उसी प्रकार एक अध्यापक अपने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान से सींचता है।

वो अक्सर कहते थे जब तुम हमारे स्थान पर आओगे तब पता चलेगा। वो सचच कहते थे। एक अध्यापक की निजी जिंदगी चाहें जैसी भी हो लेकिन वह अपने विद्यार्थियों को एक समान और बेहतर शिक्षा देने की कोशिश करता है।

मैंने ऑफिस में दोबारा क़दम रखा, "कैसा लगा ये विद्यालय और यहां के विद्यार्थि,
क्या आप यहां पढ़ाना पसंद करेंगी"।
मारे खुशी के मेरे मुंह से निकला की मेरा विद्यालय और मेरे बच्चे बहुत अच्छे हैं।

सच में, हे! गुरु धन्य हो।🙏💐











Friday, May 13, 2022

समझ पाना मुश्किल नहीं है

 कहते हैं जिंदगी हर पल एक नया पाठ पढ़ाती हैं। जिंदगी कुछ इस मोड़ पर आ गई है। जिसे समझ पाना मुश्किल नहीं है,लेकिन ये मन बावरा समझना चाहता नहीं है।

आंखों में ख्वाब लिए।

होंठों पर विश्वास लिए।
बदनामी को साथ लिए।
इस तूफानी मौसम में चंद सवालात लिए।

कुछ नया करने की चाह में।
हम चले हैं ऐसी राह में।
बस जिम्मेदारी है बाहों में।
अब दर्द नहीं है आहों में।

हां तुम सही हो- जुबान यही पुकारे।

मेरे सवाल मेरे अस्तित्व को तमाचा हर बार मारे।

नहीं हर बार तुम ही सही नहीं, अब ये शब्द अक्सर जुबान कह डाले। 

ना जाने क्यों अब ना कहना भी  सुकुन देता है।


खुद को बदलना अब अच्छा नहीं लगता।

कोई हमारे कारण बदले अब तो वो भी सच्चा नहीं लगता।

गठा हुआ सा रिश्ता फिर भी साथ में नहीं चलता।

हे! ईश्वर, इतनी समझदार दुनिया, मुझे कोई बच्चा नहीं मिलता।


Friday, April 1, 2022

You are mine




Oh my lord you are mine.

I can't see because it's black night. 

but everything is fine so you don't mind.

Oh yeah you are mine so why I am crying. 

when I am lonely you don't go slowly . 

You know when I'm alone i can't handle everything. 

But I have to do everything so come and sit beside. 

I know you are mine so you don't go any other side. 

I need you everytime.

There is a huge crowd my around. 

I am alone in that crowd. 

But I'm not afraid because you are mine.

Thursday, March 3, 2022

Being imperfect is very important in life

 


Being imperfect is very important in life. If you are complete So the meaning of life ends there. But if you are imperfect, you will put all your strength to make it perfect. And every step taken towards perfection at that time will teach you something new every moment. Really, the desire to learn this helps us a lot in life. Every person should dream. Then you should put all your strength in making those dreams come true. There should be only one goal in life. Actually that goal is our imperfection. And till that goal is not fulfilled. Till then you keep on making yourself perfect. When you achieve that goal then dream another. Then start working on completing it. If your eyes cannot dream, then make it your goal to fulfill someone else's dream. The happiness that comes in sharing happiness is not found anywhere else. Be happy in life Never be disappointed thinking that I am not the former. Rather, be happy thinking that God has given you a task which you have to complete at any cost. But not to make himself a foil but to make himself believe in himself.

Being parents is not a small thing in life

Being parents is not a small thing in life.I don't know why we forget again and again. Parents have also gone through the phase that we are passing through today. We get entangled in our entanglements badly, and tell our parents that you do not understand. No sir, they understand very well, but their experience becomes so much that they can tell just by looking at our faces. What trouble are we in? Hey once go to them and see and tell the confusion that is going on in your mind. This is the truth, if he cannot solve it himself, then he will definitely tell how to solve it.

Tuesday, March 1, 2022

लोगों से मेरे बारे में ना पूछो

 लोगों से मेरे बारे में ना पूछो।

कोई मेरे बारे में उतना ही जानता है।

जितना मैंने उसे जानने दिया है।

मेरे बारे में सब कुछ जान लें।

हाए! उतनी तो मैंने खुद को भी पर्मिशन नहीं दी।

हां अगर मेरे बारे में कुछ जानना है।

तो आपको मुझे ही जानना होगा ।

लोगों की मेरे प्रति राय नहीं।

हां सब कुछ तो नहीं।

लेकिन आपके प्रश्नों का जवाब मैं जरूर दूंगी।

मैं कोई खुली किताब तो नहीं हूं।

लेकिन कोई मुझे समझ ना पाए मैं वो अल्फाज़ भी नहीं हूं।

मुझे बातें करना अच्छा लगता है।

सभी से नहीं कुछ गिनती के लोग हैं।

खुशियों को बांटना है ये मैं मानती हूं।

गमों को कैसे समेटना है मैं जानती हूं। 

कुछ अलग ही ख्वाहिश है मेरी।

लोगों खुलकर हंसना चाहते हैं।

लेकिन मैं जी भर कर रोना चाहती हूं।

कितनी अजीब बात है ना।

मुझे लगता है हम बड़े हो गए हैं।

शायद इतना कि पिता हमारे कांधे पर सर रख रो दे।

और मां को अपनी बाहों का सहारा देकर हाथों से खिलाएं।

भाई के सिर पर हाथ रखके कह दे मैं संभाल लूंगी तू डर मत।

अपनों की ख्वाहिशों मैं उतना वजन नहीं होता।

जितना स्वयं के ख्वाब में होता है।

कितना आसान होता है ना सफर में अकेले चलना।

वहीं अगर कोई साथ चलने वाला हो तो कभी पलटकर देखो , तो कभी उसके पिछे तेजी से दौड़ना।

सच में बहुत कुछ उलझा रहता है इस खुरापाती दीमक में।

कब क्या सोच कर किस दिशा में दौड़ना शुरू कर देता है नहीं जानते।

"हां बस इतना जानती हूंं।

लोगों से मेरे बारे में ना पूछो।

कोई मेरे बारे में उतना ही जानता है।

जितना मैंने उसे जानने दिया है।" 


Saturday, February 12, 2022

देखो-" मेरे लिए मेरा परिवार पहले है, उसके बाद तुम"

 एक सोच



नहीं जानते कितनी सच्चाई है, या यूं कहें कि ये मेरा वहम है। अगर यह मेरा वहम है तो ही सही है।
हमारा समाज पुरुष प्रधान है, कहीं ना कहीं यह सच है। लेकिन मेहनत के नाम पर महिला आगे है।काम चाहें जो भी हो महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। लेकिन जब अधिकार की बात आती है तो महिलाओं को कतार में खड़ा कर दिया जाता है। खैर छोड़िए इस टोपिक को , यह एक ऐसी जंग है जो सदियों पहले शुरू हुई थी लेकिन अंत न जाने कब होगा।

आज का मेरा बस एक छोटा सा विचार है जो मैं आप सभी के साथ बांटना चाहती हूं।

("देखो मेरे लिए पहले मेरा परिवार है उसके बाद तुम")

अक्सर ये शब्द सुनने को मिलते हैं। और यह शब्द मुझे तब भी अच्छे नहीं लगते है जब तक कोई शख्स किसी दूसरे शख्स को कहता है। आखिर इन शब्दों का क्या मतलब है। ये शब्द एक कमजोर इन्सान की पहचान है। क्योंकि उसमें किसी भी रिश्ते को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं होती। ये शब्द आज के समय में बोयफ्रन्ड - गर्लफ्रेंड को और पति - पत्नी को अक्सर बोलते हैं। 

मतलब मुझे तो समझ नहीं आता वो ये सब कि "मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम" कहकर क्या साबित करना चाहते हैं। यही की हम कमजोर हैै। हममें हिम्मत नहीं है खुद को अपने विचारों को अपने परिवार और अपने समाज के सामने रखने की। अगर हमें आपके लिए अपनों से लड़ना पड़ेगा तो हम नहीं लड़ पाएंगे।

क्या एक मर्द सच में कमजोर होता है ----

सायद हां एक औरत के नजरिए से एक मर्द बहुत ताकतवर होता है। जब एक औरत की जिंदगी में कोई पुरुष आता है तो वह यही समझती है कि वह पुरुष उसकी हिम्मत बनेगा, वह उसके सपनों को साकार करने में मदद चाहें ना करें लेकिन वह अगर गिरने लगी तो उसे सहारा जरुर देगा। 
लेकिन असल जिंदगी में कुछ और ही होता है। वह पुरुष जिसे वह ताकतवर समझती है वह उसे और भी कमजोर बना देता है। जबकि एक औरत अकेले सारी दुनिया से उस पुरुष के लिए लड़ जाती है।

औरत केवल एक औरत नहीं होती उसके बहुत सारे रुप होते हैं।

जब वह एक बेटी होती है तो वह अपने पिता का मान रखने के लिए किसी ऐसे शख्स के साथ अपनी पूरी जिंदगी बीताने को तैयार हो जाती है जिसे वह जानती तक नहीं। पिता के घर में उसे कभी ना कभी यह सुनने को मिलता है ।
"हमारे लिए हमारे परिवार की मान पहले है तुम उसके बाद।"

किसी शख्स से वह जाने अंजाने में प्यार करने लगती है जो उसे बहुत से सपने दिखाता है, लेकिन जब साथ चलने की बात आती है तो उसे सुनने को मिलता है देखो 
"मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"

जब वह शादी करके ससुराल जाती हैं, तो वह अपना सब कुछ अपने पति को मानती है उस परिवार की खुशहाली के लिए अपनी खुशी भूल जाती है। वह उसे कभी ना कभी अपने पति से सुनने को मिलता है,देखो
 "मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।" 

इसके बाद वह मां बनती है तो सोचती है। कि मेरी औलाद जिसे मैंने पैदा किया है।जिसकी परवरिश मैंने की है। उससे स्वार्थ मुझे वो सब सुनने को ना मिले। लेकिन अपनी औलाद से भी उसको सुनने को मिलता है। मां -
"मेरे लिए मेरा लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"

सच में औरत बहुत ताकतवर होती है वह सबको अपना मानती है,लेकिन उसकी सारी उम्र गुजर जाती है। असल में उसका ना तो कोई अपना होता है और ना ही उसका अपना कोई घर होता है।

उसको कोई अपना ना होते हुए भी वह अपनी जिंदगी सबको अपना कहकर गुजार देती है।
सच में बहुत ताकतवर होती है औरत

क्या ऐसा नहीं हो सकता-------......

कि कोई ऐसा शख्स हो जो उसे यह कह सके कि " मेरे लिए मेरा परिवार पहले है, लेकिन तुम उस परिवार से अलग नहीं हो"

जब आपको पता है, कि मैं अपने परिवार को वह सब नहीं समझा पाऊंगा की कोई और शख्स भी है। जिसे मैं अपने परिवार में लेकर आना चाहता हूं और बाकी सदस्यों की तरह ही उसे भी परिवार का सदस्य होने का हक मिलना चाहिए। तो फिर आपको यह कोई अधिकार नहीं है कि आप किसी की भावनाओं का मजाक बनाएं।उसे पहले खुद पर विश्वास करना सिखाएं, फिर प्यार करना सिखाएं, जब वह आपके ऊपर विश्वास करें। आपको अपनी दुनिया मानने लगे तब आपका जवाब हो "देखो मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।" 
इससे अच्छा है आप इन सबसे दूर ही रहो किसी को सहारा देकर छिन लेना -- किसी को अपाहिज करने के बराबर होता है।

"मैं मेरे लिए मेरे परिवार का मान सम्मान बहुत जरूरी है, लेकिन तुम भी तो मेरा मान हो।"

"मां मेरी बीवी बच्चे मेरे लिए जरूरी है, लेकिन उस परिवार की नींव तो तुम ही हो ना।"

मैं खुद के लिए और खुद के सपनों के लिए जीना चाहता हूं, लेकिन तुम्हें भी सपने देखने का पूरा हक है। मैं तुम्हें खुश सायद नहीं रख पाऊं लेकिन कोशिश करूंगा कि तुम्हारी तकलीफ़ को और न बढ़ाऊं।

Tuesday, February 8, 2022

जब प्यार हो जाए तो क्या करें


प्यार

बहुत कुछ सिमटा होता है, इन अधूरे से शब्दों में। ना जाने लोगों ने क्या- क्या परिभाषाएं बना रखी हैं। जिसको जैसा लगता है वह प्यार की अपनी एक अलग परिभाषा बना लेता है। यहां हर किसी को स्वयं से ज्यादा अपने ख्वाबों से प्यार होता है। वो अपने ख्वाबों के पिछे इतना तेजी से दौड़ता है। की स्वयं को बहुत पिछे छोड़ देता है। हम स्वयं को भूल जाते हैं। अरे जब स्वयं से ही प्यार नहीं करोगे तो उसको कैसे संभालोगे जिसको अपने अपना सब कुछ माना है। 
प्यार को समझना बहुत ही आसान है। हमें जिस सख्श की अच्छाईयां - बुराईयां दोनों प्यारी लगने लगे । या फिर यूं कहें उसकी मौजूदगी का अहसास भी हमारी रूह को छू ले समझ जाना मामला गंभीर है।

क्या करें ऐसे में- 
मैं तो कहती हूं कुछ मत सोचिए जाईए और जाकर सीधा बोल दीजिए। अगर सोचने में समय निकालते रहे तो आपके हाथ में कुछ भी नहीं रहेगा। सब कुछ समय अपने साथ बहा कर ले जाएगा। इससे अच्छा है समय रहते आप उसको बोल दो की आप नहीं रह सकते उनके बिना। रिजेक्शन का डर तो रहता ही है। लेकिन यह भी तो सोचो कि अब वह क्या आपके पास में है, नहीं ना और सोच कर देखो क्या पता उनको आपके एक बुलावे का ही इंतजार हो। होने को तो कुछ भी हो सकता है ना। 

ये सच है एक बार आपने हिम्मत करके अगर उनको अपना हाल सुना दिया ना, तो बहुत सारा बोझ आपके सिर से उतर जाएगा। जवाब में चाहें हां हो या ना हो। खुद को पहले ही दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रखना पड़ेगा। जवाब कहीं ना कहीं आपके अंदर ही होता है। बस आपको खुद को बिखरने नहीं देना है। उसके बाद आप बहुत आसानी से अपने जीवन में आगे बढ़ सकतें हैं। अगर वह आपके साथ चलने को तैयार है तो आपके सफर में चलने में आपको आसानी होगी। लेकिन वह आपके साथ चलने को तैयार नहीं है, तो क्या हुआ। हो सकता है आपकी चाहत से ज्यादा आपको किसी ने भगवान से मांग रखा हो। 

और यकिन मानना - जब जिससे आप प्यार करते हैं वह आपके साथ है तो आपको उस रास्ते के कांटों को साफ करना होता है। लेकिन आपके सफर में वह है जो आपसे प्यार करता है तो वह स्वयं उस रास्ते में लगे कांटों को साफ करेगा। और यदि आपने ज़रा सा भी उसका साथ दे दिया तो वह शख्स आपको अपना ईश्वर मानेगा।

बहुत फर्क है दोनों बातों में - एक वो जिससे आप प्यार करते है।
एक वो जो आपसे प्यार करता है।

Monday, February 7, 2022

अरदास ऐसे जीवन की




अ खुदा मुझे काट दे किसी के खुशी के पल बनाकरे
मुझे बाट दे जिसे हर कोई जीना चाहे वो पल बनाकरे


भीड़ ना दे, मुझे भेज दे उस नुक्कड़ का पेड़ बनाके
जिसे छत नसीब ना हो चोखट करीब भेज दे उसकी रहमत बनाकेे


जिसे हर कोई पाना चाहे भेज दे सुकून के दो पल बनाके
जिसे दुत्कारे ये जग सारा मुझे भेज दे उसका सहारा बनाके 


मिटा पाए पेट की आग भेज दे वो दो टूक बनाके
किसी कि भूख को मिटाने के काम तो आऊं ,


हे ईश्वर वो परिंदा बनाकर काट मुझे।
चाहे जिसके हिस्से में जाऊँ,
सुकून के दो पल दे पाऊँ इस तरीके से बांट मुझे।


बहुत जी लिया तुने ये जहां दिया
वो मकान दिया उम्मीद से परे मुकाम दिया

Sunday, January 16, 2022

क्या होता है डर और असल में हम प्यार किस से करते हैं। हमें धोखा क्यों मिलता है?

 डर



कहते हैं परेशानी problem अकेले नहीं आती वो जब भी आती हैं अपने साथ बहुत सारी अनुभव अभिलाषा भी लेकर आती हैं। हां वो अलग बात है वो हमारे लिए कितना कष्ट भरा होता है। पर कुछ भी कहो उस दर्द का भी अपना अलग ही मजा होता है।

हम जब भी जीवन में अपना कदम बढ़ाते हैं तब हमें कोई अंदेशा नहीं होता है कि हमें हमारा वो कदम हमें कहां ले जाएगा। बस स्वयं पर यह भरोसा होता है कि हम खुद को संभाल लेंगे। आज मुझे मेरी 6th class की एक किताब मिली जब मैंने उसे पढ़ना शुरू किया तब उसे एक दिन में उसे पढ़ लिया। उस समय मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आई वो इसलिए नहीं कि मैंने उसे पढ़ लिया , बल्कि वो इसलिए कि मैंने जब 6th class में addmission लिया तब उसे पढ़ने में पूरा साल लगा दिया। 

इसलिए जब भी हम कोई काम शुरू करते हैं तब हमारे अंदर यह डर रहता है कि हम क्या सफल होंगें या नहीं। बस यह डर ही होता है जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है। अगर हम किसी काम को कर चुके होते हैं तब हमें उस काम का पूर्ण ज्ञान हो जाता है। तब हमारा उस काम के प्रति डर खत्म हो जाता है। अगर हम किसी काम को करने से पहले ही हार मान जाएं और वो काम शुरू ही ना करें ऐसा करने से तो हम जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे। अगर किसी काम की शुरुआत है तो अंत भी है। 

वैसे भी हमें कोई भी काम हो उसे एक बार करके देखना चाहिएं। हम सफल हुए तो बहुत अच्छा है और असफल रहे तो उससे भी अच्छा है। क्योंकि हमें उस काम की पूरी जानकारी होती है इसके साथ हमें यह पता होता है सफल हुए इंसान को कितनी सिद्धि मिली है और असफल को अपनी हार पर कैसा लगता है समाज की उसके प्रति क्या धारणा बन जाती है। तो अगर आप हार जाए तो यह ना सोचें कि हम हार गए बल्कि उस हार के कारण को ढूंढे और अपनी हार को जीत में बदलें।

रिश्ते


हम सभी के जीवन में बहुत से लोग जुड़े होते हैं और उन्ही लोगों के प्रति हमारी बहुत सी जिम्मेंदारीयां भी जुड़ी होती हैं। हम चाहकर भी उनसे अलग नहीं हो सकतें। स्वयं ईश्वर हमें उन रिश्तों के साथ हमें इस धरती पर भेजते हैं। फिर हम उनसे अलग कैसे रह सकते हैं। जीवन में हर चीज का अपना एक अलग महत्व है। बस उसे पहचानने की देरी है।

आज के समय में किसी के पास समय नहीं है और समय ना देने से रिश्ते टूट जाते हैं। वो मुझे याद नहीं करता तो मैं क्यों करूं। ये जरूरी तो नहीं की आपके पास समय है तो सामने वाले के पास भी समय हो। या फिर होने को तो वो स्वस्थ हैं भी या नहीं । तो वो आपसे ना पूछे तो आप भी उससे उसका हाल ना पूछें ये इन्साफ नहीं। फिर हम इसे रिश्ते नहीं व्यापार कहेंगे । वो हमारे लिए काम करे तो हम भी उसके बदले में काम करें।

मांगा

कहते हैं ईश्वर से अगर हम सच्चे मन से कुछ मांगते हैं तो वो हमें जरूर मिलता है। ऐसे में कोई काम करने की क्या जरूरत है बस ईश्वर से मांग ही लो। Corona के कारण देश में lockdown था तब ईश्वर से मांगा ही होगा सभी ने फिर वो गरीब बेसहारा लोगों को भूखे पेट क्यों सोना पड़ा। नहीं सर ईश्वर भी उसी का साथ देता है जो परिश्रम करता है। कहते हैं मजदूर बहुत मेहनती होता है। लेकिन बीते दिनों ने यह दिखा दिया कि वह मजबूर भी बहुत होता है। और जब पेट में अन्न की भूख होती है तब मान सम्मान की बात सब ढकोसला लगती हैं। एक पल को स्वयं पर से ही नहीं ईश्वर के ऊपर से भी विश्वास उठ जाता है।

संकट

भारत  एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र देश है। यहां ईश्वर को सबसे ऊपर माना गया है लेकिन उसका असल रुप क्या है यह कोई नहीं जानता। यहां भगवान के अनेक रूप देखने को मिलेगें । और जब इन्सान पर कोई संकट आता है तब वह अपने आप को उस संकट से निकालने के बजाए भगवान को खुश करने की कोशिश में लग जाता है।की मैं भगवान को खुश करूंगा तब वो मुझे इस संकट से बाहर निकल लेंगे। क्या कभी ऐसा हुआ है कि हम किसी जंगल में हो और शेर आ जाए तब हम वहां से भाग कर या कहीं छिप कर खुद को बचाएंगे या फिर ये कहेंगे कि ना पहले मैं भगवान की पूजा करूंगा तब भगवान मुझे बचाने के लिए आएंगे। ये तो सही नहीं है समस्या से निपटने के लिए हमें खुद को ही कुछ करना होता है हां भगवान से हम यह मांग सकते हैं कि हमें सही मार्ग दिखा दे। इतना तो भगवान भी कर सकते हैं। अब सारा काम भगवान पर छोड़ देंगे तो हमें क्या भगवान ने यहां तमाशा देखने के लिए भेजा है।

इंसान

एक इंसान का जन्म बहुत ही किस्मत से मिलता है। भगवान ने बहुत प्यारी दुनिया बनाई है और इस दुनिया की देखभाल करने के लिए ही इंसान को धरती पर उतारा है। लेकिन पता नहीं यहां आने के बाद इंसान को क्या हो जाता है कि वह अपने आप में खो जाता है और किसी के बारे में उसे कोई सुध नहीं होती।

व्रत

India में शादीशुदा औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए भुखे पेट रहकर व्रत करती हैं। सभी को अच्छा लगता हैं बहुत खुशी मिलती है। लेकिन क्या कोई जानता है कहते हैं कि भगवान शिव की पत्नी पार्वती जी ने जब वह कुंवारी थी तब यह व्रत सबसे पहले रखा था। और उन्होंने शिव को अपने पति के रूप मांगा था। पार्वती जो कि महलों में पली-बढ़ी उन्होंने शिव जो फकीर के भेष में रहने वाला उसको मांगा यह बहुत बड़ी बात है। आज के समय में अगर पति पत्नी दोनों एक दूसरे को समझकर और बिना किसी मनमुटाव के शांति से जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाएं तो यह पूजा से कम है क्या। और वैसे भी अगर व्रत करने से ही उम्र लम्बी होती है तब तो हिंदुस्तान में पुरुषों की आयु की औसत बहुत ज्यादा होनी चाहिए थी। और उन देशों में जहां ये सब व्रत नहीं होते वहां के पुरूषों को तो मर जाना चाहिए था।

प्यार

कहते हैं प्यार बहुत ही अनोखा अहसास होता है जिसको भी यह होता है उसे यह दुनिया बहुत रंगीन और प्यारी लगने लगती है। जिस शख्स से हमें प्यार होता है उसकी सभी बातें अच्छी लगती हैं। हमें उसमें कोई कमी नजर नहीं आती।हर वक़्त हमें उसके साथ होने का अहसास होता है। जीवन में हमें कोई ऐसा शख्स मिलता है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि हम इसके बिना अधुरे हैं। उसी के सपने और जो उसे अगर एक बार देखना ले तो हमें खाना तक नहीं खाते हमें कुछ और अच्छा ही नहीं लगता। और जो उसके दर्शन हुए नहीं की बस हां अब हमने इस दुनिया को जीत लिया हो। इसमें यह जरूरी नहीं कि यह पागलपन दोनों तरफ से हो । अक्सर यह एक तरफा से भी होता है। फिर क्या हुआ जो वो हमसे प्यार नहीं करता मैं तो सच्चा प्यार करता हूं या करती हूं। और ऐसा पागलपन 1-2, 2-3 साल तक चलता रहता है । वो इतनी हिम्मत भी नहीं जुटा पाते कि वो जिनके लिए इतने पागल हैं कम से कम उसको तो बता दें।

लेकिन नहीं कहीं हम उसको खो न दें इस डर से हम उसे नहीं बता पाते । ऐसा जरूरी नहीं कि सामने वाले को हमारी भावनाओं के बारे में जानकारी हो। जबकि उसको तो इसकी भनक भी नहीं होती है और वो हमारी जिंदगी से कहीं दूर जा चुके होते है। फिर हमारे अंदर पछतावे के सिवाय कुछ नहीं रहता और यही सोचते रहते हैं काश मैंने उससे पूछा होता तो क्या पता वो आज मेरे पास होता। और अगर वो ना कहता तो क्या था अकेले तो हम आज भी है पर उम्र भर का पछतावा नहीं होता है

प्यार किस से होता है

असल जीवन में प्यार की परिभाषा कुछ और ही है। प्यार वो नहीं है कि हमें सामने वाले शख्स की सभी बातें अच्छी लगती हैं, बल्कि उसमें हम अपना ही सुख देखते हैं। हम उसमें क्या पसंद करते हैं- दरअसल हम उसमें खुद को देखते हैं।
हां उसे ये काम करना आता है , उसके पास वो सब कुछ है जो हमें आगे बढ़ने में या खुश रहने में मदद करेगा तो मुझे यह पसंद है। असल में इन्सान किसी दूसरे से नहीं बल्कि खुद से ही प्यार करता  है।
और जब हमसे हमारा सुख छिनता दिखाई देता है तब हम बेचैन हो उठते हैं। कुछ लोग उन्हें छल-कपट से पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या इससे हमें असल में खुशी मिलेगी। 

इन्सान को जीवन में सबसे ज्यादा महत्व खुद को देता है।  कि जो हम कर सकते हैं वो कोई और नहीं कर सकता। भगवान ने हमें इस धरती पर उतारा है तो हमें पूर्ण रूप दिया है। 
अगर हम खुद से ही प्यार नहीं करते हैं तब हम हमेशा हमारे बारे में ही सोचते रहेंगे हम स्वयं में ही कमियां निकालने में लगे रहेंगे। जीवन भर ना स्वयं खुश रह पाएंगे और ना ही आसपास के परिवेश को। हमें जो भी जीवन में जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे पूरा करने की कोशिश में लगे रहिए। हां वो जिम्मेदारी पूरी करने में शायद हमारी जिंदगी बीत जाए और पता नहीं वो काम पूरा हो या नहीं भी हो। लेकिन हम हमारी तरफ से उसे पूरा करने की कोशिश करते रहनी चाहिए।

इन्ही जिम्मेदारी के बीच में उलझकर हमें खुद को भी नहीं भुलना होगा। हां जीवन में हर चीज़ का अपना महत्व है हमारे जीवन में कुछ भी होता है अच्छा या बुरा दोनों का अपना महत्व है। और जो लोग हमारी जिंदगी में आते हैं वो भी हमें बहुत कुछ सीखा जाते हैं। 

क्या ये सही है

कहते हैं समाज में पुरुष हो या स्त्री सभी को एक समान अधिकार है। अपने जीवन को अपनी मर्जी से जी सकते हैं। जब चाहे जहां जा सकते हैं और जब चाहे अपने जीवन में किसी को आने की अनुमति दे सकते हैं। लेकिन कोई नहीं जानता इस में कितने प्रतिशत सच्चाई है। क्या सचमुच औरत और पुरुष को एक समान जीवन जीने का अधिकार दिया गया है। हां हमारे भारत के संविधान के अंदर यह समानता का अधिकार है कि औरत हो या पुरुष सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन क्या असल जिंदगी में यह समानता का अधिकार औरतों को मिल पाया है। इस बात का प्रश्न आज भी दिमाग में दौड़ता रहता है। और केवल औरत और पुरुष के बीच ही असमानता नहीं है। यह समानता हमारे समाज के अंदर भी कूट-कूट कर भरी हुई हैं। समाज में एक इंसान को उसके काम के आधार पर बांट दिया गया है। जिसे हम दूसरे शब्दों में जातिवाद भी करते हैं। कहने को महेज यह जातिवाद एक शब्द है। लेकिन यह शब्द जहन में कुछ इस कदर घर कर गया है कि इसने एक इंसान को महज माटी का पुतला बनाकर रख दिया है। हम अपने समाज को दोषी नहीं ठहरा सकते। यह परंपरा तो हमें विरासत में मिली हुई है। हमें बचपन से यह सिखाया गया है - कि हम और हमारा धर्म , और हमारी जाति सही हैं अन्य धर्म पर विश्वास नहीं किया जा सकता। हम मजहब की लड़ाई में कुछ इस कदर मिल जाते हैं कि हम इंसानियत तक को भूल जाते हैं। जबकि उस परमपिता परमेश्वर ने हमें सबसे पहले एक इंसान के रूप में इस धरती पर भेजा है। हमारा परम कर्तव्य यह रहता है कि हम इंसानियत की रक्षा करें। इन्हीं शब्दों के कारण एक इंसान को दूसरे इंसान के अंदर महज छल दिखाई देता है।कहने को यह छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन इन्हीं की वजह से एक इंसान की जिंदगी बर्बाद होकर रह जाती हैं। मैं यह नहीं कहती की मैं गलत हूं या मैं सही हूं। मानती हूं आज परिस्थितियां पहले जैसी नहीं है। बहुत से बदलाव आ चुके हैं। लेकिन हम खुद को बदलें केवल खुद को तो शायद परिस्थितियां बदल सकते हैं।

वर्षों से जो लोग कहते थे हम दर्द अछूत का सहते हैं।
आज इस कोरोना की महामारी ने सबको अछूता बना दिया।
 यह प्रकृति की माया है अब भेद समझ में आया है।
अछूत होने का दर्द क्या होता है और जब किसी को अछूत बना दिया जाता है तो उसे कैसा महसूस होता है।
अछूत होना महेज एक शब्द नहीं है यह चलते-फिरते इंसान को माटी का पुतला बनाकर रख देता है उसके सोचने समझने की सारी इच्छाओं का कत्ल कर देता है।
वह दिन रात सोचता रहता है कि मुझे किस अपराध की सजा मिल रही है वह अपराध जो मैंने किया ही नहीं। और फिर सोचता है क्या यह सही है क्या मैं ही गलत हूं या फिर यह समाज गलत है। नहीं यह इतना बड़ा समाज गलत नहीं हो सकता हो सकता है। कहीं ना कहीं मैं ही तो गलत नहीं हूं और इससे सही गलत के चक्कर में उलझ कर  इंसान आगे नहीं बढ़ पाता ।और जब वह इन सब बातों से निकलता है तब तक इतना समय निकल चुका होता है इतने समय में वह खुद को बहुत कुछ बना चुका होता।जो इन सब बातों से ऊपर निकल गया उसने ऊंचाइयों को छू लिया इसीलिए ईश्वर ने हमें संपूर्ण बनाया है

धोखा--

हम अक्सर सोचते हैं उसने हमें धोखा दे दिया है। या यूं कहें कि वो मुझे वादा कर के मुकर गया है। हेे! भगवान जब जरूरत से ज्यादा किसी को महत्व दोगे और उम्मीद रखोगे तो ऐसा ही होगा।
अब हम स्वयं किसी काम को नहीं कर सकते हैं तभी किसी दूसरे आदमी से मदद लेते हैं ना। अब जो काम हम नहीं कर पाएं तो ऐसा जरूरी तो नहीं कि वो भी कर पाए । लेकिन नहीं हम जितनी उम्मीद खुद से नहीं लगाते उससे कहीं ज्यादा सामने वाले से लगा लेते हैं यही कारण है कि हम उसे हमारे काम ना होने का जिम्मेदार मानते हैं। और उसे धोखेबाज ठहरा देते हैं।
अरे भाई उसकी भी ज़िंदगी है उसे भी खुश रहने का अधिकार है। वो भी चाहता है कि कोई हो जो उसकी सुनें और उसे समझे। लेकिन नहीं बस हमारा ही काम हो जाए हमारे लिए बस इतना ही जरूरी है। जब सबसे ज्यादा महत्व और उम्मीद खुद पर रखोगे तभी खुद को और दूसरों को खुश रख पाओगे।

Friday, January 14, 2022

ये मन क्यों नहीं डरता है


ये जो तिनका तिनका करके गलती करता है । 

तू क्यूं बहते पानी में विष मिलाता चलाता है । 

ये तो समय गवाही देगा और तू रोएगा । 

तेरी सांस चलेगी और तू बेबस हो जाएगा । 

तेरे अंश का टुकड़ा भी बोझा ढोएगा । 

सदियों तक यही बात दोहराई जाएगी । 

तेरा क्या है तू एक दिन चला जाएगा ।

खिलती हंसी को गम दे जाएगा । 

तेरी कितनी पीढ़ी इसका कर चुकाएंगी । 

ये तो बस आने वाला समय ही तय कर पाएगा । 

हे ! ईश्वर ये मन क्यों नहीं डरता है । 

मरकर फिर वापस आना है , यही जीवन चक्र है । 

जितना कर्ज लिया है , वापस उसे चुकाना है । 

हमें तो तेरा ध्यानधरके जन्म - जन्मांतर से पीछा छुड़ाना है ।


Bharti

Wednesday, January 12, 2022

मुंह मत खुलवा मेरा तेरी औकात लिख दूंगी।

जज्बात


मुंह मत खुलवा मेरा तेरी औकात लिख दूंगी।
आज  मैंने कलम उठाइ है तेेेरा इतिहास लिख दूंगी।।

तू  वो राम नहीं जिनके वचन की खातिर  मैैं वन-वन भटकूँगी।
तू वो रावण नहीं जिनके मरण की खातिर मैं पल-पल तरसूूँगी।
मैं वो अंबा हूँ स्वाभिमान की खातिर तेरी शैय्या सजा दूंगी।
कब  तक यूं सहूंगी अब मौन तोड़ा है तेरा अभिमान तोडूूंगी।

की  जब तू जानता है तूझे पैदा मैंने किया है।
तू  मुझसे शुरू मुझपे खत्म हूआ है।
तो फिर मुुझे क्यों तार-तार करने पर तूला है।
ठहर जा बस कर आखिर कब तक आग की शैैैय्या में जलूँगी।

गलती मेरी है मै देर से आती थी सौ सवाल करती थी।
तू देर से आता था किस हाल में आता था इग्नोर करती थी।
काश मैंने तुम्हें इनसानियत सिखाई होती तो आज ये न हुआ होता।
एक कलि यूं ना टूटकर सूनसान सड़क पर मिली होती।

Baby i like you. I want you. I need you.trust me वो क्या अलफाज थे तेेरे।
कैसे बह जाती जज्बातों के भवर में साथ मैैं तेरे।
बहुत से रिस्ते ना सही एक पगड़ी, एक आंंचल,एक कलाइ साथ रहे मेरे।
चाहने वाले तो तेरे भी बहुत थे मैैंने कब कहा मै उन्हें ठुुकरा दूंगी।

कल्पना तो करके देेेखो अपनो से दूूर जाना क्या होता है।
अनजान गलियों के मुह मौड़े खड़े रिस्तों को अपनाना क्या होता है।
बीज से बने पौधे का उखड़ कर कहीं ओर जम जाना क्या होता है।
अपने अरमानों की शैय्या सजाकर उस आंगन में दफन होना क्या होता है।

ये इन्साफ नहीं जमाने के तराजू का बराबर माप नहीं।
वो तो ऐसा है तू भी ऐसी ही होगी क्या।
ये पहनोगी तो यही होगा ।
तुम वो नहीं जो तुुुम्हें वो सब सुविधाएं मिलेंगी।
कब  तक बहेगी नदी की धारा यूंही।

अब परछाई भी चिढ़ाने लगी मुझे क्या कर देेेगी आजाद मुझे।
जब  नोच-नोच कर तार-तार कर दिया मुझे।
सवालों की बौछार , चुप्पी की बेडीयों  का उपहार मिला ।
अब  ये बेडीयांं तोडूगी ,कब तक कुुछ ना बोलूँगी।।


मुंंह मत खुलवा मेेरा तेरी औकात लिख दूंगी।
आज मैंने कलम उठाइ है तेरा इतिहास लिख दूंगी।।

                   

                                Bharti

बेनाम सा रिश्ता



तुम को पन्नों में उतार पाना कहां मुमकिन है,


कुछ भी तो नहीं था 
मेरे और तुुुम्हारे दरमियान
अनजान सी गलियां , बेनाम सा रिश्ता
कुछ मौन हम रहे तुम भी तो खामोश थे

रेल की पटरी से हम साथ चलते रहे
कैसा रिश्ता था ये हम इसमें भी संंतुष्ट रहे
बेमतलब की बातों से कहीं दूर रहे
हम अपने सपनों की दूनिया सजा रहे

साथ चलते हुए झांंक आया करते थे एक-दूसरे में हम
अब तो जरूरी सा लगने लगे एक-दूसरे को हम
जब लडखडाते कदम कसके बाह पकड़ लेेेतेे एक दूसरे की हम
साथ चलते रहे वक्त जैसा भी आया बाट लेते हम

तू अपने सपनों को तलाशने में व्यस्त रहा
तलाश हमारी भी तो जारी रही
बस वक्त के पन्नों को पलट रहे
पन्ने के हर शब्द में जिक्र एक- दूसरे का करते रहे 

अपने और सपने बस सब कुछ इसी में उलझ कर रह गया
एक बार समय आकर फिर वहीं रुक गया
बेनाम सा रिश्ता अपना वजूद खोज रहा
फिर भी देख इंतजार इन आंखों को तेरा ही रहा।

इतने खूबसूरत शब्द तो हमारे पास भी नहीं हैं।

                Bharti


Tuesday, January 11, 2022

ब्रेकअप होग्या

 


आज तो गजब के होग्या।

मेरी सहेली का ब्रेकअप होग्या।

वा रोती हुई मेरे धोरै आई।

अर उसनै अपनी आपबीती सुनाई।


मैं मौन होकै उसनै सुनती रही।

कितनी गलती उसकी थी बस याहे गिनती रही।

वा हर सांस पै उसका नाम रटै थी।

बेरा ए नै वा लाड़- तै उसनै के-के कहवै थी।


इसा लागै था वो भी हर बात पै हामी भरग्या।

उसका के टैक्स लागै था, वो तो घणे वादे करग्या।

सांची रै उसकै खाट घालण की जगह नहीं।

अर वो बैरी चांद पै प्लाट काटण की बात करग्या।


वा घणि पढै थी, अर वो उसनै पढण बैठाग्या।

लदौड तो पहलै हे था, इसके पाछै वो अपनी कमर तुडवाग्या।

गलती किसै कि कौन्या हालात ए इसा होग्या।

एक तो बेरोजगारी और उपर तै लोकडाउन मारग्या।


जो होया सो होया मैं सुणकै कहानी अपने घर आएगी।

थी तो आखिर मेरी सहेली दिल मै मेरै उदासी छागी।

प्यार तो आत्मा तै होया करै जबरदस्ती तै नहीं बस या ए समझ पाई।

तेरा प्यार सच्चा होगा तो वो जरूर लौट कै आवैगा बस या ए समझा पाई।


Bharti

Sunday, January 9, 2022

अनदेखा प्यार



डार्लिंग ईसा भी के कदे होया करै।

किसे नै देखें बिना प्यार क्यूकर होया करै।


होग्या तो होग्या इश्क पै के किसै का जोर चाल्या करै।

कालू की शक्ल मै भी धर्मेंद्र दिखाई दीया करै।

या भी बात साचि सै मां के रूप मै दोस्त सबनै ना मिला करै।

'मां मनै भी प्यार होग्या' या बात सुणकै नै मां की हासि बहोत छुटया करै।

हम समझावांगे, उसनै- तू एकबै घरां बुला ले।

नू बरांणे बालक की किस्मत ना फोड़ा करै।

हेे! मेरे राम , औलाद पै इतना भरोसा भी के होया करै।

लेकिन हमनै भी तो अपणि शक्ल और अक्ल पै भरोसा होया करै।

सोच में नेगेटिविटी और कोनफिडेन्स मै कमी म्हारै कदे नहीं आया करै।

सोच मिलेगी, विचार मिलगे, गुण तो आपए मिल जाया करै।

म्हारे घरक्या नै डर तो इस बात का रहया करै। 

एक म्यान मै दो तलवार कदे खट्या नहीं होया करै।

एक तो कुबैधि म्हारी औलाद, ईसाए दूसरा और, हमनै के घर मै दंगल करवाणा सै।

पर या बात भी साची सै बिना किरदार के कहानी पूरी नहीं होया करै।

जब पेट मै भूख की आग हो तो माणस कोठा भरण की नहीं सोच्या करै।

आपा मरे पाछै ए स्वर्ग दिख्या करै।

प्यार तो केवल विश्वास पै टिक्या करै।

किसै नै पत्थर मैं भगवान तो किसै नै हर किसै में ए राम दिख्या करै।

मीरा भी तो कृष्ण नै बिना देख्ये प्यार करया करै।


हां डार्लिंग इसा भी होया करै।

किसे नै बिना देखे भी प्यार होया करै।

  

     2.



"तू बस मेरा होकर मत रहना।


मैं तुम्हें पंख दूं तू उड़ लेना।"

ये जीवन मिला है मुश्किल से,
कहीं रह जाएं ख्वाब अधूरे से।
तू अपने सपने चुन लेना।
तू बिखरे मोती बुन लेना।
तू रोते हुए को उम्मीद देना।
उनके जख्मों को सी देना। 
तू थक जाए तो लौट आना।
तू बस खुद को काबिल समझ लेना।
मैं संभाल लूंगी तू ना घबराना।
हर खुशी को हद तक जी लेना।
बदले में जो कीमत हो जीने की,
तू वो मेरे हिस्से से ले जाना।
तू बस मेरा होकर मत रहना।
मैं तुम्हें पंख दूं तू उड़ लेना।

  Bharti


ये मेरा जीवन है

 1. 

न्यू बोली --जी आपकी morning good कब होती है।

मैं बोला -- जी और तो बेरा कौना जै म्हारी भैंस बिना लात ठाए दूध दे - दे म्हरी morning good तब होती है।।




2.

मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब नहीं होती जब मेरे पापा मुझे पैसे देते हैं,

बल्कि खुशी तब होती है - - जब मुझे दिए गए पैसे जरुरत पड़ने पर वापस मांगते हैं - और मैं हक से उनको बोलती हूं पापा आप मुझे मेरे पैसे कब लौटा रहे हो। 

तब मेरे पापा के फेस पे बड़ी.. सी स्माइल होती है और वो बोलते हैं तेरे पैसे मैं तुम्हें बहुत जल्दी लौटा दूंगा मेरी अम्मा ।

3.

कहीं भी जाने से पहले तैयार होकर - खुद को आईने में कितना भी निहार लो ।

 जब तक मजा नहीं आता तब तक मां आपकी बलाइयाँ लेते हुए ये ना कह दे हाए ... नज़र ना लगे मेरी बच्चि को ।


4.

हम सभी कि जिंदगी में एक पल ऐसा आता है हम जो कुछ करना चाहते हैं।हमारा मस्तिष्क उसके बारे में ना सोचकर किसी और के बारे में सोचने लगता है। ऐसा होने पर हम काम करते हैं तो ना तो हम सोच पाते हैं और ना ही किम कर पाते हैं।

 तो ऐसे में दिमाग को खुला छोड़ दो... जा.. तू - सोच जो सोचना है। तब एक पल ऐसा आता है वो अपने आप ही उस जगह से हट जाएगा। और बोलेगा आजा अब बहुत हुआ कुछ काम करते हैं। तब हम वो काम करेंगे तो उसे पूरा करने के लिए हम सम्पूर्ण होंगे आधे-अधूरे नहीं।


5.

कितनी अजीब बात है ना, हमारी जिंदगी में वैसे तो बहुत से लोग जुड़े होते हैं। 

लेकिन कोई शक्श ऐसा आता है जिसकी बातों में कुछ तो ऐसा होता है।जो हमारे रोंगटे खड़े कर देता है। 


6.

संसार का सारा सुख एक ओर

और जब मां आपको सुबह-सुबह उठाए

तब आप बोले मम्मी बस 5 मिनट और सोने दो

उसके बाद मम्मी आपको बोले ठीक है लेकिन 5 मिनट के बाद तुम नहीं आई ना तो मैं फिर से आऊंगी

उस 5 मिनट  का सुख एक ओर।


7. 

आपका जिंदगी में आना तब सफल हो जाता है

जब सारी दुनिया आपके खिलाफ हो

तब आपके पापा आपकी ढाल बनकर खड़े हो जाएं

और बोले मेरी बेटी मेरा मान है वो कभी किसी के साथ गलत कर ही नहीं सकती।


8.

हमें फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला हमारे बारे में क्या सोच रखता है।

बस हमें इस बात से फर्क पड़ता है कि हम उनके बारे में जो सोच रखते हैं, बस वो उसका मान रखा ले।


9.

हमें खुशी तब नहीं होती जब हम किसी पर अधिकार जमाएं।

 बल्कि खुशी तब होती है कोई हम पर विश्वास करके हमारे ऊपर अधिकार जमाएं।


10. 

जीवन में परेशानियों का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि परेशानियों के बिना जीवन बेरंग सा हो जाता है। खुशी की बात तो यह है कि जब हम अपने जीवन में आने वाली परेशानियों को खुद से हल करते हैं तब हमें जो खुशी मिलती है ना वह खुशी ही तो हमें जिंदगी को जीने का नया तरीका सिखाती है।



Thursday, January 6, 2022

HSSC & Student

 


या HSSC और Student के बीच की लड़ाई सै।

ताऊ कितनी ए बाट दिखाले नौकरी हमनै लेकै दिखाणी सै।


आदरणीय खट्टर और खदरी नै कसम खा ली सै।

ब्याह म्हारा नहीं होया, थमनै भी रांडे मारण की तैयारी सै।

जबै तो HR Police के पेपर में दूध काढ़ण की सर्वोत्तम विधि बूझ राखी सै। 

बता के उसनै पुलिस स्टेशन के बाहर भैंस बांधणी सै।


तो HSSC कै बेरा नहीं के मन मै आरी सै।

पटवारी परीक्षा एक बार भी नहीं ली, फीस तीसरी भरवाण की त्यारी सै।

जणै ग्रुप D मै लागे छोरे की ब्याह की त्यारी सै।

उस छोरे नै छोरी मै बहुत वैरायटी चाहिए सै, HSSC भी पेपर मैं आऊट ओफ सिलेबस ल्यारी सै।


प्रधान, उन्नै बेरा कौन्या हम हरियाणा आले सै।

ये माणस नै प्रपोज करें पाच्छै उसकी क्वालिटी देखै सै।

जै कोए छौरा ना कह दे, तो छौरी उसके घर आगै तांडव करया करै।

स्टडी के नाम पै अडै छौरे ITI और छौरी JBT आले सर्वोत्तम दर्ज़ा पाया करै।


मनै सुर्यवंशम कई बार देख राखी सै।

एक छोरा पढ़या लिखा देखकै ब्याह रचाण की ठाणी सै।

बस तो मैं चलाऊंगी, IAS मनै वो एक बणाणा सै।

बहोत कुछ दिया इस धरती नै इसकी पाई-पाई लोटाणी सै।


या HSSC और Student के बीच की लड़ाई सै।

ताऊ कितनी ए बाट दिखाले नौकरी हमनै लेकै दिखाणी सै।


Bharti



हरियाणा आले



नीत का ठाडा , घणा आच्छा, एक माणस टकराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


वो सहज- सहज बतलावै था।

वो दिल का हाल सुणावै था।

वो दुनिया नै बुरी बतावै था।

वो अपणे जख्म दिखावै था।


मैं भी किसै का रांझा था।

कोए मेरी हीर होया करती।

लोगां की सांस थम्या करती।

जब मेरी हीर हंसा करती।


लोगां नै बहोत समझाया मैं।

ऊंचे घर की छोरी कै, हाए क्यूं चक्करा में आया मैं।

सैलरी मेरी का वनथर्ड तो उसके कैप्चीनो पै उड़ा आया मैं।

बचिकुची नै ज़ारा और गुच्ची नै पूज आया मैं।


वा मनै बाबू कह्या करती, बाबू आला फिल कराएगी रै।

उसके बाप नै नहीं लडाए,जितने लाड़ वा मेरे पै लडवागी रै।

सारी फर्माइश पूरी करदी,मी- सा बरसा आया मैं।

मेरे हिस्से का किला, उसके कन्यादान मै बुलावा आया मैं।


मेरी मां मन्नै राजाबेटा अर बाबू सेर कह्या करै।

दिल का मैं पापी कौन्या हम 'जय सीयाराम जी' कह्या करै।

जब पहर के चालूं धोला कुड़ता छोरी हैंडसम कह्या करै।

हम हरियाणा के बड़े दिल आले, बैराणे नै भी ' ताईआले ' कह्या करै।


नीत का ठाडा, घणा आच्छा, एक माणस टक्कराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


       Bharti



Tuesday, January 4, 2022

उलझा सा जीवन






ये कुछ बनने की चाह,

ये कुछ खोने का डर।

चलते जा रहें हैं, 

भटक रहे हैं दर बदर।

जो पास में है उसकी हमें कहां कदर।

जिसकी आश नहीं हमें तो बस उसी की खबर।


हे ! ईश्वर..

जिसने खुद को जान लिया।

उसने तुझको मान लिया।

जिसको तुमने जान लिया, 

उसने ये जीवन जान लिया।


कल किसने देखा है। 

हमको तो आपने भेजा है।

आपने जीतना समय दिया है

हमें तो हर पल को जीना है।


आज यहां बसेरा है।

तो कल कहीं ओर सवेरा है।

मिट्टी की यह काया सारी।

बस कर्म की है माया सारी।


ये किस बहम में फंसे हैं।

"बस ये मिल जाए ,मेरे! मौला..,

बदले में चाहे जो ले-ले।"

हर बात में शौदेबाजी करते हैं।

खिलती कली तोड़कर तुम्हें खुश करते हैं।


गलती मेरी नहीं है, मेरे! मौला।

मुझे हर कण में तू दिखता है।

तभी तो तेरे नाम का पुतला भी लाखों में बिकता है।

देख तू बैठा सिंहासन पर साथ में पहरेदार बैठाता है।


ना जाने क्या सोच रहे हैं।

बिना आत्मा के शरीर को नौंच रहें हैं।

किसी के विश्वास के साथ खेल रहे हैं।

तो अपने आप से भाग रहे हैं।






         Bharti


Saturday, January 1, 2022

Happy New Year 2022

 

मुझे इतना अच्छा परिवार और इतने अच्छे और सच्चे दोस्त देने के लिए। 

अ जिंदगी तेरा शुक्रिया।

आओ एक नई शुरुआत करते हैं।
क्यों न पुराने गमों को भुलाकर,
खुशी के चंद पल ही सही बस उनको याद रखते हैं।
क्या दीया तूने मुझे अबतक ,
इसका हिसाब कभी बाद में करते हैं।
ये जो दो पल ही सही इन्हें बेहिसाब जीते हैं।
तुम अपने पास रखो इन गिले-शिकवे को।
एक दिन जीत जाएंगे ,
बस इसी कोशिश में हम हर रोज क्यों मर रहे हैं।
कोई बात नहीं जो उसने हमें याद नहीं किया।
क्यों न अपने इगो को साइड में रखकर,
हम ही उनके पास चलते हैं।
क्या पता कब बुलावा आ जाए उस रब का।
हमारे जाने से पहले कहीं 😜 वो ही ना चला जाए,
तो इस नए साल की शुरुआत हम आपके साथ करते हैं।
बाहें फैला दी है हमने देखना यह है,
ये साल हमें किस हाल में रखता है। 
अब यूं ही परखते रहेंगे एक दूसरे को।
जो समय है वो भी जाता रहेगा।
गुजरे साल की तरह बस मुट्ठी भर यादें ही रह जानी है।
तो बहुत सारी ना सही बस मुट्ठी भर यादें ही बन जाएंगे।
इसी बहाने से किसी की खाली जिंदगी में,
एक मुस्कान की वजह ही बन जाएंगे।
अब किसी से कोई शिकवा ना करेंगे,
बस अपनी जिंदगी में चंद पल ही सही लेकिन अपने लिए जरुर निकालेंगे।
आओ एक नई शुरुआत करते हैं।
ये सारी दुनिया ही अपनी।
हर रोज किसी न किसी चेहरे की मुस्कान बनने की कोशिश करते हैं।
बाहें फैलाकर इस नए साल का स्वागत करते है।
😊Happy New Year 2022❤️🎂