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Thursday, January 6, 2022

हरियाणा आले



नीत का ठाडा , घणा आच्छा, एक माणस टकराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


वो सहज- सहज बतलावै था।

वो दिल का हाल सुणावै था।

वो दुनिया नै बुरी बतावै था।

वो अपणे जख्म दिखावै था।


मैं भी किसै का रांझा था।

कोए मेरी हीर होया करती।

लोगां की सांस थम्या करती।

जब मेरी हीर हंसा करती।


लोगां नै बहोत समझाया मैं।

ऊंचे घर की छोरी कै, हाए क्यूं चक्करा में आया मैं।

सैलरी मेरी का वनथर्ड तो उसके कैप्चीनो पै उड़ा आया मैं।

बचिकुची नै ज़ारा और गुच्ची नै पूज आया मैं।


वा मनै बाबू कह्या करती, बाबू आला फिल कराएगी रै।

उसके बाप नै नहीं लडाए,जितने लाड़ वा मेरे पै लडवागी रै।

सारी फर्माइश पूरी करदी,मी- सा बरसा आया मैं।

मेरे हिस्से का किला, उसके कन्यादान मै बुलावा आया मैं।


मेरी मां मन्नै राजाबेटा अर बाबू सेर कह्या करै।

दिल का मैं पापी कौन्या हम 'जय सीयाराम जी' कह्या करै।

जब पहर के चालूं धोला कुड़ता छोरी हैंडसम कह्या करै।

हम हरियाणा के बड़े दिल आले, बैराणे नै भी ' ताईआले ' कह्या करै।


नीत का ठाडा, घणा आच्छा, एक माणस टक्कराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


       Bharti



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