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Friday, January 14, 2022

ये मन क्यों नहीं डरता है


ये जो तिनका तिनका करके गलती करता है । 

तू क्यूं बहते पानी में विष मिलाता चलाता है । 

ये तो समय गवाही देगा और तू रोएगा । 

तेरी सांस चलेगी और तू बेबस हो जाएगा । 

तेरे अंश का टुकड़ा भी बोझा ढोएगा । 

सदियों तक यही बात दोहराई जाएगी । 

तेरा क्या है तू एक दिन चला जाएगा ।

खिलती हंसी को गम दे जाएगा । 

तेरी कितनी पीढ़ी इसका कर चुकाएंगी । 

ये तो बस आने वाला समय ही तय कर पाएगा । 

हे ! ईश्वर ये मन क्यों नहीं डरता है । 

मरकर फिर वापस आना है , यही जीवन चक्र है । 

जितना कर्ज लिया है , वापस उसे चुकाना है । 

हमें तो तेरा ध्यानधरके जन्म - जन्मांतर से पीछा छुड़ाना है ।


Bharti

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