ये जो तिनका तिनका करके गलती करता है ।
तू क्यूं बहते पानी में विष मिलाता चलाता है ।
ये तो समय गवाही देगा और तू रोएगा ।
तेरी सांस चलेगी और तू बेबस हो जाएगा ।
तेरे अंश का टुकड़ा भी बोझा ढोएगा ।
सदियों तक यही बात दोहराई जाएगी ।
तेरा क्या है तू एक दिन चला जाएगा ।
खिलती हंसी को गम दे जाएगा ।
तेरी कितनी पीढ़ी इसका कर चुकाएंगी ।
ये तो बस आने वाला समय ही तय कर पाएगा ।
हे ! ईश्वर ये मन क्यों नहीं डरता है ।
मरकर फिर वापस आना है , यही जीवन चक्र है ।
जितना कर्ज लिया है , वापस उसे चुकाना है ।
हमें तो तेरा ध्यानधरके जन्म - जन्मांतर से पीछा छुड़ाना है ।
Bharti
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