F don't know why - Comrade

don't know why





पता नहीं क्यों तेरी बातें मेरे ज़हन से जाती नहीं
रात बीत जाती है पलकों तले नींद आती नहीं

पता नहीं क्यों तेरा जिक्र जुबां से हटता नहीं
और तेरे जिक्र कि हया से पलकें उठती नहीं

पता नहीं क्यों धड़कन की आवाज कानों में सुनाई देती है
एक पल को तेरी खबर ना मिले तो आत्मा रो देती है

पता नहीं क्यों अब तुम्हें दुआ में मांगा करती हूं
कहीं टूट ना जाए भ्रम मेरा बस इसी बात से डरती हूं

पता नहीं क्यों तेरी गैरमौजूदगी में तुमसे बहुत सी बातें होती है
और तुम रूबरू क्या आए खामोश ये रातें होती है 

पता नहीं क्यों मुझे सपना अब तेरा ही अच्छा लगता है
मेरा सपना ही तुम हो तो मुझे वो सपना सच्चा लगता है

पता नहीं क्यों खुद को भूल जाने को दिल करता है
पूछे कोई मेरे घर का पता तो तेरी दहलीज बताया करता है।

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2 Comments:

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