और जब जान ही ना रहे तो ये जहान का क्या फायदा।
कुछ ऐसा ही कहता हैै ये आजकल का कायदा।
और जब जहां ही नहीं रहेगा तो उस जान का क्या करोगे।
अकेले बैठकर मेरे साथी तुम रो भी ना सकोगे।
उम्मीद से देखे तुमको तो नजरें ना चुराया करो।
खुद से नजरे मिला सको कुछ ऐसा करिश्मा किया करो।
खाक से उठा खाक में मिला, क्या खाक बचा इस जीवन में।
सफेदपोश में लिपटी थी वो उसमें ही कोख को सुला दिया अब क्या बचा इस जीवन में।
कमर झुकी हुई है सांस चली है , धड़कन मिलों दूर से सुनी है।
जलता दीपक ऐसे झोंका, लपटों में उम्मीद जली है।
ऐसा ना कर, हाथ बांधकर क्यों बैठा है, उजड़ रही है बस्ती तेरी।
पल में काया पलट जाएगी मिट जाएगी हस्ती तेरी।
क्या अपना-पराया करता है, जिसे देख- देख तू हंसता है।
एक बार तू हाथ बढ़ा, सोई हुई उम्मीद जगा तू उम्मीद से भरा खिलौना है।
है आश मुझे विश्वास मुझे हम विष विरह का पी लेंगे ।
ये जंग है जीवन जीने की तेरे लौट आने की आशा में हम सारा जीवन जी लेंगे।
हे। ईश्वर - है जहान मेरा तो है जान मेरी।
ये जिंदगी कल भी तेरी थी, ये जिंदगी आज भी है तेरी।
Bharti


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