1.
"अ खुदा तू इतना रहम हमपर बरपा
दावतें दसतक हो ना हो कोई गिला नहीं
बस जब भी ये जुबां खुले इसपे तेरा ही नाम हो
और जब भी ये आँखें खुले बस तेरा ही दिदार हो।"
2.
"जानि ये कैसी महफिल सजाई है
यहाँ खाक में लिपटी हुई तन्हाई है
हम प्यार की सौगात लेके आए हैं
यहाँ हर हाथ में खंजर और आँखों में बारूद लिए पाए हैं।"
3.
"की मेरे हर सवाल का जवाब तू है
फिर तेरे माथे पर ये सिकन क्यों है
हम तुम्हें देखकर मुसकुराते है
फिर हमें छूने से तेरे हाथ कांपते क्यों हैं।"
4.
"जानि कुछ तो लिहाज किया होता
जब बात पर्दे की थी तो पर्दा किया होता
हमें किसी और का एक नज़र देखना भी गवारा नहीं
भरी महफिल में यूं अपना तमाशा ना बनाया होता।"
5.
2.
"जानि ये कैसी महफिल सजाई है
यहाँ खाक में लिपटी हुई तन्हाई है
हम प्यार की सौगात लेके आए हैं
यहाँ हर हाथ में खंजर और आँखों में बारूद लिए पाए हैं।"
3.
"की मेरे हर सवाल का जवाब तू है
फिर तेरे माथे पर ये सिकन क्यों है
हम तुम्हें देखकर मुसकुराते है
फिर हमें छूने से तेरे हाथ कांपते क्यों हैं।"
4.
"जानि कुछ तो लिहाज किया होता
जब बात पर्दे की थी तो पर्दा किया होता
हमें किसी और का एक नज़र देखना भी गवारा नहीं
भरी महफिल में यूं अपना तमाशा ना बनाया होता।"
5.
" मेरा कोई दोष ना था
तुम्हें ही होश ना था
हम तो रोज तेरे दरवाजे पर आया करते थे
उसे बंद देख वापस लौट जाया करते थे।"
6.
" की वो किसी की याद में इस कदर खोए हैं
कोई बताए उन्हें की सुबह हो गई है
हम तो उन्हें समझा-समझा कर थक गए है
वो रोशनी चांद की है तेरी शमा तो कब का बुझ गई है।"
7.
" जानि इतना तो होश बचाकर रखो
वो सामने आ जाए उसे पहचान सको
ये तेरी उंगलियां हैं जो अपना कर्ज़ अदा कर रही हैं
वरना तेरी स्याही तो कब का खत्म हो गई है।"
8.
ये खुदा की ख़ुदाई है जो हम पर ये रहमत बरसाइ है
तुम याद थे बस याद थे
माफ करना वैद जी ने हमारी यादाश्त कमजोर बताइ है
हम तुम्हें भूल गए बस अब हमें याद नहीं।
Bharti



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ReplyDeleteआपका मेरे ब्लोग में स्वागत है। मेरे ब्लोग में आकर मेरी पोस्ट पढ़ने और टिप्पणी करने के लिए आपका धन्यवाद। हां क्यों नहीं अगर आप एक लेखक हैं तो आप अपने उस ब्लोग का जिसमें आप लिखते हैं उसका लिंक यहाँ प्रदर्शित किजिए।
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