क्या मांगू उस रब से
ना जाने कितने जख्म तुम्हारे दरवाजे से लेकर आए हैं।
झुठी मुस्कुराहट से, खुद का दर्द छुपाए है।
आंखों से गिरते आंसू में,ना जाने क्यों तुम रहते हो।
और जब जब आंसू गिरता है, वो प्यार तेरा बहता है।
अब और क्या मांगू उस रब से , जब से तुम्हें पाया है।
इश्क तेरा, हमें इस जहां में पागल कर गया है।
ना जाने एक साथ चलने वाले अपनी राह क्यों बदलते हैं।
राह बदलने पर अक्सर रास्ते भटकते हैं।
वो चाहे मीलों दूर हो या दिल के करीब ।
चाहने को तो पूरी दुनिया तुम्हारी हो, लेकिन होने को तो वो ही ख़ास होता है।
और क्या मांगू किसी से, सिवाय उसके या खामोशि के ।।।........


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