मेेरी आशिकी.......॥
मेरी आशिकी ने मुझे बेइमान बना दिया।
तूने सरे आम मुझे आम बना दिया।।
तूने कहा मै रेशम की डोर, तू मामूली धागा।
मैंने माना मैैं मामूली धागा तू रेेेशम की डोर।
रेशम की डोर का बंधन कभी ना बंधे।
मामूली धागे का बंधन ऐसा स्वयं टूटे बंधन ना छूटे।।
वजूूद है मेरा मैं कोई खिलौना नहीं।
मेरी हया सरे आम निलाम होती नहीं।।
कमबख्त जमाने का क्या दोस।
तू बोलता रहा मैैं रह गई खामोश।।
तूने कहा मै रेत सा तू पत्थर समान।
मैंने माना मैैं पत्थर ही सही तू रेत समान।
हाँ पत्थर ही सही मैं रूप बदलती नहीं।
वजूद है मेरा एक हवा के झोंके से फिसलती नहीं।।
दिल ने कहा तुम्हें बाहों में भर लूं तू समाता ही नहीं।
बेबशी देख तुम्हें जितना कसके पकड़ती हूँ।
तू फिसलता ही जाता है।
दिमाग़ ने कहा तुमको आजाद कर दू।।
जब सब ठुकरा दें तुम्हें ,
चले आना इस पत्थर के पास।
तू जो मेरी तकदीर हुआ, तो मुुझे जरूर मिलेगा।
फिर देखना ये पत्थर तुम्हें और मजबूत मिलेगा।।
मेरी आशिकी ने मुझे बेइमान बना दिया।
तुने सरेआम मुुझे आम बना दिया।।
Bharti


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