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Sunday, January 16, 2022

क्या होता है डर और असल में हम प्यार किस से करते हैं। हमें धोखा क्यों मिलता है?

 डर



कहते हैं परेशानी problem अकेले नहीं आती वो जब भी आती हैं अपने साथ बहुत सारी अनुभव अभिलाषा भी लेकर आती हैं। हां वो अलग बात है वो हमारे लिए कितना कष्ट भरा होता है। पर कुछ भी कहो उस दर्द का भी अपना अलग ही मजा होता है।

हम जब भी जीवन में अपना कदम बढ़ाते हैं तब हमें कोई अंदेशा नहीं होता है कि हमें हमारा वो कदम हमें कहां ले जाएगा। बस स्वयं पर यह भरोसा होता है कि हम खुद को संभाल लेंगे। आज मुझे मेरी 6th class की एक किताब मिली जब मैंने उसे पढ़ना शुरू किया तब उसे एक दिन में उसे पढ़ लिया। उस समय मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आई वो इसलिए नहीं कि मैंने उसे पढ़ लिया , बल्कि वो इसलिए कि मैंने जब 6th class में addmission लिया तब उसे पढ़ने में पूरा साल लगा दिया। 

इसलिए जब भी हम कोई काम शुरू करते हैं तब हमारे अंदर यह डर रहता है कि हम क्या सफल होंगें या नहीं। बस यह डर ही होता है जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है। अगर हम किसी काम को कर चुके होते हैं तब हमें उस काम का पूर्ण ज्ञान हो जाता है। तब हमारा उस काम के प्रति डर खत्म हो जाता है। अगर हम किसी काम को करने से पहले ही हार मान जाएं और वो काम शुरू ही ना करें ऐसा करने से तो हम जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे। अगर किसी काम की शुरुआत है तो अंत भी है। 

वैसे भी हमें कोई भी काम हो उसे एक बार करके देखना चाहिएं। हम सफल हुए तो बहुत अच्छा है और असफल रहे तो उससे भी अच्छा है। क्योंकि हमें उस काम की पूरी जानकारी होती है इसके साथ हमें यह पता होता है सफल हुए इंसान को कितनी सिद्धि मिली है और असफल को अपनी हार पर कैसा लगता है समाज की उसके प्रति क्या धारणा बन जाती है। तो अगर आप हार जाए तो यह ना सोचें कि हम हार गए बल्कि उस हार के कारण को ढूंढे और अपनी हार को जीत में बदलें।

रिश्ते


हम सभी के जीवन में बहुत से लोग जुड़े होते हैं और उन्ही लोगों के प्रति हमारी बहुत सी जिम्मेंदारीयां भी जुड़ी होती हैं। हम चाहकर भी उनसे अलग नहीं हो सकतें। स्वयं ईश्वर हमें उन रिश्तों के साथ हमें इस धरती पर भेजते हैं। फिर हम उनसे अलग कैसे रह सकते हैं। जीवन में हर चीज का अपना एक अलग महत्व है। बस उसे पहचानने की देरी है।

आज के समय में किसी के पास समय नहीं है और समय ना देने से रिश्ते टूट जाते हैं। वो मुझे याद नहीं करता तो मैं क्यों करूं। ये जरूरी तो नहीं की आपके पास समय है तो सामने वाले के पास भी समय हो। या फिर होने को तो वो स्वस्थ हैं भी या नहीं । तो वो आपसे ना पूछे तो आप भी उससे उसका हाल ना पूछें ये इन्साफ नहीं। फिर हम इसे रिश्ते नहीं व्यापार कहेंगे । वो हमारे लिए काम करे तो हम भी उसके बदले में काम करें।

मांगा

कहते हैं ईश्वर से अगर हम सच्चे मन से कुछ मांगते हैं तो वो हमें जरूर मिलता है। ऐसे में कोई काम करने की क्या जरूरत है बस ईश्वर से मांग ही लो। Corona के कारण देश में lockdown था तब ईश्वर से मांगा ही होगा सभी ने फिर वो गरीब बेसहारा लोगों को भूखे पेट क्यों सोना पड़ा। नहीं सर ईश्वर भी उसी का साथ देता है जो परिश्रम करता है। कहते हैं मजदूर बहुत मेहनती होता है। लेकिन बीते दिनों ने यह दिखा दिया कि वह मजबूर भी बहुत होता है। और जब पेट में अन्न की भूख होती है तब मान सम्मान की बात सब ढकोसला लगती हैं। एक पल को स्वयं पर से ही नहीं ईश्वर के ऊपर से भी विश्वास उठ जाता है।

संकट

भारत  एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र देश है। यहां ईश्वर को सबसे ऊपर माना गया है लेकिन उसका असल रुप क्या है यह कोई नहीं जानता। यहां भगवान के अनेक रूप देखने को मिलेगें । और जब इन्सान पर कोई संकट आता है तब वह अपने आप को उस संकट से निकालने के बजाए भगवान को खुश करने की कोशिश में लग जाता है।की मैं भगवान को खुश करूंगा तब वो मुझे इस संकट से बाहर निकल लेंगे। क्या कभी ऐसा हुआ है कि हम किसी जंगल में हो और शेर आ जाए तब हम वहां से भाग कर या कहीं छिप कर खुद को बचाएंगे या फिर ये कहेंगे कि ना पहले मैं भगवान की पूजा करूंगा तब भगवान मुझे बचाने के लिए आएंगे। ये तो सही नहीं है समस्या से निपटने के लिए हमें खुद को ही कुछ करना होता है हां भगवान से हम यह मांग सकते हैं कि हमें सही मार्ग दिखा दे। इतना तो भगवान भी कर सकते हैं। अब सारा काम भगवान पर छोड़ देंगे तो हमें क्या भगवान ने यहां तमाशा देखने के लिए भेजा है।

इंसान

एक इंसान का जन्म बहुत ही किस्मत से मिलता है। भगवान ने बहुत प्यारी दुनिया बनाई है और इस दुनिया की देखभाल करने के लिए ही इंसान को धरती पर उतारा है। लेकिन पता नहीं यहां आने के बाद इंसान को क्या हो जाता है कि वह अपने आप में खो जाता है और किसी के बारे में उसे कोई सुध नहीं होती।

व्रत

India में शादीशुदा औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए भुखे पेट रहकर व्रत करती हैं। सभी को अच्छा लगता हैं बहुत खुशी मिलती है। लेकिन क्या कोई जानता है कहते हैं कि भगवान शिव की पत्नी पार्वती जी ने जब वह कुंवारी थी तब यह व्रत सबसे पहले रखा था। और उन्होंने शिव को अपने पति के रूप मांगा था। पार्वती जो कि महलों में पली-बढ़ी उन्होंने शिव जो फकीर के भेष में रहने वाला उसको मांगा यह बहुत बड़ी बात है। आज के समय में अगर पति पत्नी दोनों एक दूसरे को समझकर और बिना किसी मनमुटाव के शांति से जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाएं तो यह पूजा से कम है क्या। और वैसे भी अगर व्रत करने से ही उम्र लम्बी होती है तब तो हिंदुस्तान में पुरुषों की आयु की औसत बहुत ज्यादा होनी चाहिए थी। और उन देशों में जहां ये सब व्रत नहीं होते वहां के पुरूषों को तो मर जाना चाहिए था।

प्यार

कहते हैं प्यार बहुत ही अनोखा अहसास होता है जिसको भी यह होता है उसे यह दुनिया बहुत रंगीन और प्यारी लगने लगती है। जिस शख्स से हमें प्यार होता है उसकी सभी बातें अच्छी लगती हैं। हमें उसमें कोई कमी नजर नहीं आती।हर वक़्त हमें उसके साथ होने का अहसास होता है। जीवन में हमें कोई ऐसा शख्स मिलता है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि हम इसके बिना अधुरे हैं। उसी के सपने और जो उसे अगर एक बार देखना ले तो हमें खाना तक नहीं खाते हमें कुछ और अच्छा ही नहीं लगता। और जो उसके दर्शन हुए नहीं की बस हां अब हमने इस दुनिया को जीत लिया हो। इसमें यह जरूरी नहीं कि यह पागलपन दोनों तरफ से हो । अक्सर यह एक तरफा से भी होता है। फिर क्या हुआ जो वो हमसे प्यार नहीं करता मैं तो सच्चा प्यार करता हूं या करती हूं। और ऐसा पागलपन 1-2, 2-3 साल तक चलता रहता है । वो इतनी हिम्मत भी नहीं जुटा पाते कि वो जिनके लिए इतने पागल हैं कम से कम उसको तो बता दें।

लेकिन नहीं कहीं हम उसको खो न दें इस डर से हम उसे नहीं बता पाते । ऐसा जरूरी नहीं कि सामने वाले को हमारी भावनाओं के बारे में जानकारी हो। जबकि उसको तो इसकी भनक भी नहीं होती है और वो हमारी जिंदगी से कहीं दूर जा चुके होते है। फिर हमारे अंदर पछतावे के सिवाय कुछ नहीं रहता और यही सोचते रहते हैं काश मैंने उससे पूछा होता तो क्या पता वो आज मेरे पास होता। और अगर वो ना कहता तो क्या था अकेले तो हम आज भी है पर उम्र भर का पछतावा नहीं होता है

प्यार किस से होता है

असल जीवन में प्यार की परिभाषा कुछ और ही है। प्यार वो नहीं है कि हमें सामने वाले शख्स की सभी बातें अच्छी लगती हैं, बल्कि उसमें हम अपना ही सुख देखते हैं। हम उसमें क्या पसंद करते हैं- दरअसल हम उसमें खुद को देखते हैं।
हां उसे ये काम करना आता है , उसके पास वो सब कुछ है जो हमें आगे बढ़ने में या खुश रहने में मदद करेगा तो मुझे यह पसंद है। असल में इन्सान किसी दूसरे से नहीं बल्कि खुद से ही प्यार करता  है।
और जब हमसे हमारा सुख छिनता दिखाई देता है तब हम बेचैन हो उठते हैं। कुछ लोग उन्हें छल-कपट से पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या इससे हमें असल में खुशी मिलेगी। 

इन्सान को जीवन में सबसे ज्यादा महत्व खुद को देता है।  कि जो हम कर सकते हैं वो कोई और नहीं कर सकता। भगवान ने हमें इस धरती पर उतारा है तो हमें पूर्ण रूप दिया है। 
अगर हम खुद से ही प्यार नहीं करते हैं तब हम हमेशा हमारे बारे में ही सोचते रहेंगे हम स्वयं में ही कमियां निकालने में लगे रहेंगे। जीवन भर ना स्वयं खुश रह पाएंगे और ना ही आसपास के परिवेश को। हमें जो भी जीवन में जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे पूरा करने की कोशिश में लगे रहिए। हां वो जिम्मेदारी पूरी करने में शायद हमारी जिंदगी बीत जाए और पता नहीं वो काम पूरा हो या नहीं भी हो। लेकिन हम हमारी तरफ से उसे पूरा करने की कोशिश करते रहनी चाहिए।

इन्ही जिम्मेदारी के बीच में उलझकर हमें खुद को भी नहीं भुलना होगा। हां जीवन में हर चीज़ का अपना महत्व है हमारे जीवन में कुछ भी होता है अच्छा या बुरा दोनों का अपना महत्व है। और जो लोग हमारी जिंदगी में आते हैं वो भी हमें बहुत कुछ सीखा जाते हैं। 

क्या ये सही है

कहते हैं समाज में पुरुष हो या स्त्री सभी को एक समान अधिकार है। अपने जीवन को अपनी मर्जी से जी सकते हैं। जब चाहे जहां जा सकते हैं और जब चाहे अपने जीवन में किसी को आने की अनुमति दे सकते हैं। लेकिन कोई नहीं जानता इस में कितने प्रतिशत सच्चाई है। क्या सचमुच औरत और पुरुष को एक समान जीवन जीने का अधिकार दिया गया है। हां हमारे भारत के संविधान के अंदर यह समानता का अधिकार है कि औरत हो या पुरुष सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन क्या असल जिंदगी में यह समानता का अधिकार औरतों को मिल पाया है। इस बात का प्रश्न आज भी दिमाग में दौड़ता रहता है। और केवल औरत और पुरुष के बीच ही असमानता नहीं है। यह समानता हमारे समाज के अंदर भी कूट-कूट कर भरी हुई हैं। समाज में एक इंसान को उसके काम के आधार पर बांट दिया गया है। जिसे हम दूसरे शब्दों में जातिवाद भी करते हैं। कहने को महेज यह जातिवाद एक शब्द है। लेकिन यह शब्द जहन में कुछ इस कदर घर कर गया है कि इसने एक इंसान को महज माटी का पुतला बनाकर रख दिया है। हम अपने समाज को दोषी नहीं ठहरा सकते। यह परंपरा तो हमें विरासत में मिली हुई है। हमें बचपन से यह सिखाया गया है - कि हम और हमारा धर्म , और हमारी जाति सही हैं अन्य धर्म पर विश्वास नहीं किया जा सकता। हम मजहब की लड़ाई में कुछ इस कदर मिल जाते हैं कि हम इंसानियत तक को भूल जाते हैं। जबकि उस परमपिता परमेश्वर ने हमें सबसे पहले एक इंसान के रूप में इस धरती पर भेजा है। हमारा परम कर्तव्य यह रहता है कि हम इंसानियत की रक्षा करें। इन्हीं शब्दों के कारण एक इंसान को दूसरे इंसान के अंदर महज छल दिखाई देता है।कहने को यह छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन इन्हीं की वजह से एक इंसान की जिंदगी बर्बाद होकर रह जाती हैं। मैं यह नहीं कहती की मैं गलत हूं या मैं सही हूं। मानती हूं आज परिस्थितियां पहले जैसी नहीं है। बहुत से बदलाव आ चुके हैं। लेकिन हम खुद को बदलें केवल खुद को तो शायद परिस्थितियां बदल सकते हैं।

वर्षों से जो लोग कहते थे हम दर्द अछूत का सहते हैं।
आज इस कोरोना की महामारी ने सबको अछूता बना दिया।
 यह प्रकृति की माया है अब भेद समझ में आया है।
अछूत होने का दर्द क्या होता है और जब किसी को अछूत बना दिया जाता है तो उसे कैसा महसूस होता है।
अछूत होना महेज एक शब्द नहीं है यह चलते-फिरते इंसान को माटी का पुतला बनाकर रख देता है उसके सोचने समझने की सारी इच्छाओं का कत्ल कर देता है।
वह दिन रात सोचता रहता है कि मुझे किस अपराध की सजा मिल रही है वह अपराध जो मैंने किया ही नहीं। और फिर सोचता है क्या यह सही है क्या मैं ही गलत हूं या फिर यह समाज गलत है। नहीं यह इतना बड़ा समाज गलत नहीं हो सकता हो सकता है। कहीं ना कहीं मैं ही तो गलत नहीं हूं और इससे सही गलत के चक्कर में उलझ कर  इंसान आगे नहीं बढ़ पाता ।और जब वह इन सब बातों से निकलता है तब तक इतना समय निकल चुका होता है इतने समय में वह खुद को बहुत कुछ बना चुका होता।जो इन सब बातों से ऊपर निकल गया उसने ऊंचाइयों को छू लिया इसीलिए ईश्वर ने हमें संपूर्ण बनाया है

धोखा--

हम अक्सर सोचते हैं उसने हमें धोखा दे दिया है। या यूं कहें कि वो मुझे वादा कर के मुकर गया है। हेे! भगवान जब जरूरत से ज्यादा किसी को महत्व दोगे और उम्मीद रखोगे तो ऐसा ही होगा।
अब हम स्वयं किसी काम को नहीं कर सकते हैं तभी किसी दूसरे आदमी से मदद लेते हैं ना। अब जो काम हम नहीं कर पाएं तो ऐसा जरूरी तो नहीं कि वो भी कर पाए । लेकिन नहीं हम जितनी उम्मीद खुद से नहीं लगाते उससे कहीं ज्यादा सामने वाले से लगा लेते हैं यही कारण है कि हम उसे हमारे काम ना होने का जिम्मेदार मानते हैं। और उसे धोखेबाज ठहरा देते हैं।
अरे भाई उसकी भी ज़िंदगी है उसे भी खुश रहने का अधिकार है। वो भी चाहता है कि कोई हो जो उसकी सुनें और उसे समझे। लेकिन नहीं बस हमारा ही काम हो जाए हमारे लिए बस इतना ही जरूरी है। जब सबसे ज्यादा महत्व और उम्मीद खुद पर रखोगे तभी खुद को और दूसरों को खुश रख पाओगे।

Friday, January 14, 2022

ये मन क्यों नहीं डरता है


ये जो तिनका तिनका करके गलती करता है । 

तू क्यूं बहते पानी में विष मिलाता चलाता है । 

ये तो समय गवाही देगा और तू रोएगा । 

तेरी सांस चलेगी और तू बेबस हो जाएगा । 

तेरे अंश का टुकड़ा भी बोझा ढोएगा । 

सदियों तक यही बात दोहराई जाएगी । 

तेरा क्या है तू एक दिन चला जाएगा ।

खिलती हंसी को गम दे जाएगा । 

तेरी कितनी पीढ़ी इसका कर चुकाएंगी । 

ये तो बस आने वाला समय ही तय कर पाएगा । 

हे ! ईश्वर ये मन क्यों नहीं डरता है । 

मरकर फिर वापस आना है , यही जीवन चक्र है । 

जितना कर्ज लिया है , वापस उसे चुकाना है । 

हमें तो तेरा ध्यानधरके जन्म - जन्मांतर से पीछा छुड़ाना है ।


Bharti

Wednesday, January 12, 2022

मुंह मत खुलवा मेरा तेरी औकात लिख दूंगी।

जज्बात


मुंह मत खुलवा मेरा तेरी औकात लिख दूंगी।
आज  मैंने कलम उठाइ है तेेेरा इतिहास लिख दूंगी।।

तू  वो राम नहीं जिनके वचन की खातिर  मैैं वन-वन भटकूँगी।
तू वो रावण नहीं जिनके मरण की खातिर मैं पल-पल तरसूूँगी।
मैं वो अंबा हूँ स्वाभिमान की खातिर तेरी शैय्या सजा दूंगी।
कब  तक यूं सहूंगी अब मौन तोड़ा है तेरा अभिमान तोडूूंगी।

की  जब तू जानता है तूझे पैदा मैंने किया है।
तू  मुझसे शुरू मुझपे खत्म हूआ है।
तो फिर मुुझे क्यों तार-तार करने पर तूला है।
ठहर जा बस कर आखिर कब तक आग की शैैैय्या में जलूँगी।

गलती मेरी है मै देर से आती थी सौ सवाल करती थी।
तू देर से आता था किस हाल में आता था इग्नोर करती थी।
काश मैंने तुम्हें इनसानियत सिखाई होती तो आज ये न हुआ होता।
एक कलि यूं ना टूटकर सूनसान सड़क पर मिली होती।

Baby i like you. I want you. I need you.trust me वो क्या अलफाज थे तेेरे।
कैसे बह जाती जज्बातों के भवर में साथ मैैं तेरे।
बहुत से रिस्ते ना सही एक पगड़ी, एक आंंचल,एक कलाइ साथ रहे मेरे।
चाहने वाले तो तेरे भी बहुत थे मैैंने कब कहा मै उन्हें ठुुकरा दूंगी।

कल्पना तो करके देेेखो अपनो से दूूर जाना क्या होता है।
अनजान गलियों के मुह मौड़े खड़े रिस्तों को अपनाना क्या होता है।
बीज से बने पौधे का उखड़ कर कहीं ओर जम जाना क्या होता है।
अपने अरमानों की शैय्या सजाकर उस आंगन में दफन होना क्या होता है।

ये इन्साफ नहीं जमाने के तराजू का बराबर माप नहीं।
वो तो ऐसा है तू भी ऐसी ही होगी क्या।
ये पहनोगी तो यही होगा ।
तुम वो नहीं जो तुुुम्हें वो सब सुविधाएं मिलेंगी।
कब  तक बहेगी नदी की धारा यूंही।

अब परछाई भी चिढ़ाने लगी मुझे क्या कर देेेगी आजाद मुझे।
जब  नोच-नोच कर तार-तार कर दिया मुझे।
सवालों की बौछार , चुप्पी की बेडीयों  का उपहार मिला ।
अब  ये बेडीयांं तोडूगी ,कब तक कुुछ ना बोलूँगी।।


मुंंह मत खुलवा मेेरा तेरी औकात लिख दूंगी।
आज मैंने कलम उठाइ है तेरा इतिहास लिख दूंगी।।

                   

                                Bharti

बेनाम सा रिश्ता



तुम को पन्नों में उतार पाना कहां मुमकिन है,


कुछ भी तो नहीं था 
मेरे और तुुुम्हारे दरमियान
अनजान सी गलियां , बेनाम सा रिश्ता
कुछ मौन हम रहे तुम भी तो खामोश थे

रेल की पटरी से हम साथ चलते रहे
कैसा रिश्ता था ये हम इसमें भी संंतुष्ट रहे
बेमतलब की बातों से कहीं दूर रहे
हम अपने सपनों की दूनिया सजा रहे

साथ चलते हुए झांंक आया करते थे एक-दूसरे में हम
अब तो जरूरी सा लगने लगे एक-दूसरे को हम
जब लडखडाते कदम कसके बाह पकड़ लेेेतेे एक दूसरे की हम
साथ चलते रहे वक्त जैसा भी आया बाट लेते हम

तू अपने सपनों को तलाशने में व्यस्त रहा
तलाश हमारी भी तो जारी रही
बस वक्त के पन्नों को पलट रहे
पन्ने के हर शब्द में जिक्र एक- दूसरे का करते रहे 

अपने और सपने बस सब कुछ इसी में उलझ कर रह गया
एक बार समय आकर फिर वहीं रुक गया
बेनाम सा रिश्ता अपना वजूद खोज रहा
फिर भी देख इंतजार इन आंखों को तेरा ही रहा।

इतने खूबसूरत शब्द तो हमारे पास भी नहीं हैं।

                Bharti


Tuesday, January 11, 2022

ब्रेकअप होग्या

 


आज तो गजब के होग्या।

मेरी सहेली का ब्रेकअप होग्या।

वा रोती हुई मेरे धोरै आई।

अर उसनै अपनी आपबीती सुनाई।


मैं मौन होकै उसनै सुनती रही।

कितनी गलती उसकी थी बस याहे गिनती रही।

वा हर सांस पै उसका नाम रटै थी।

बेरा ए नै वा लाड़- तै उसनै के-के कहवै थी।


इसा लागै था वो भी हर बात पै हामी भरग्या।

उसका के टैक्स लागै था, वो तो घणे वादे करग्या।

सांची रै उसकै खाट घालण की जगह नहीं।

अर वो बैरी चांद पै प्लाट काटण की बात करग्या।


वा घणि पढै थी, अर वो उसनै पढण बैठाग्या।

लदौड तो पहलै हे था, इसके पाछै वो अपनी कमर तुडवाग्या।

गलती किसै कि कौन्या हालात ए इसा होग्या।

एक तो बेरोजगारी और उपर तै लोकडाउन मारग्या।


जो होया सो होया मैं सुणकै कहानी अपने घर आएगी।

थी तो आखिर मेरी सहेली दिल मै मेरै उदासी छागी।

प्यार तो आत्मा तै होया करै जबरदस्ती तै नहीं बस या ए समझ पाई।

तेरा प्यार सच्चा होगा तो वो जरूर लौट कै आवैगा बस या ए समझा पाई।


Bharti

Sunday, January 9, 2022

अनदेखा प्यार



डार्लिंग ईसा भी के कदे होया करै।

किसे नै देखें बिना प्यार क्यूकर होया करै।


होग्या तो होग्या इश्क पै के किसै का जोर चाल्या करै।

कालू की शक्ल मै भी धर्मेंद्र दिखाई दीया करै।

या भी बात साचि सै मां के रूप मै दोस्त सबनै ना मिला करै।

'मां मनै भी प्यार होग्या' या बात सुणकै नै मां की हासि बहोत छुटया करै।

हम समझावांगे, उसनै- तू एकबै घरां बुला ले।

नू बरांणे बालक की किस्मत ना फोड़ा करै।

हेे! मेरे राम , औलाद पै इतना भरोसा भी के होया करै।

लेकिन हमनै भी तो अपणि शक्ल और अक्ल पै भरोसा होया करै।

सोच में नेगेटिविटी और कोनफिडेन्स मै कमी म्हारै कदे नहीं आया करै।

सोच मिलेगी, विचार मिलगे, गुण तो आपए मिल जाया करै।

म्हारे घरक्या नै डर तो इस बात का रहया करै। 

एक म्यान मै दो तलवार कदे खट्या नहीं होया करै।

एक तो कुबैधि म्हारी औलाद, ईसाए दूसरा और, हमनै के घर मै दंगल करवाणा सै।

पर या बात भी साची सै बिना किरदार के कहानी पूरी नहीं होया करै।

जब पेट मै भूख की आग हो तो माणस कोठा भरण की नहीं सोच्या करै।

आपा मरे पाछै ए स्वर्ग दिख्या करै।

प्यार तो केवल विश्वास पै टिक्या करै।

किसै नै पत्थर मैं भगवान तो किसै नै हर किसै में ए राम दिख्या करै।

मीरा भी तो कृष्ण नै बिना देख्ये प्यार करया करै।


हां डार्लिंग इसा भी होया करै।

किसे नै बिना देखे भी प्यार होया करै।

  

     2.



"तू बस मेरा होकर मत रहना।


मैं तुम्हें पंख दूं तू उड़ लेना।"

ये जीवन मिला है मुश्किल से,
कहीं रह जाएं ख्वाब अधूरे से।
तू अपने सपने चुन लेना।
तू बिखरे मोती बुन लेना।
तू रोते हुए को उम्मीद देना।
उनके जख्मों को सी देना। 
तू थक जाए तो लौट आना।
तू बस खुद को काबिल समझ लेना।
मैं संभाल लूंगी तू ना घबराना।
हर खुशी को हद तक जी लेना।
बदले में जो कीमत हो जीने की,
तू वो मेरे हिस्से से ले जाना।
तू बस मेरा होकर मत रहना।
मैं तुम्हें पंख दूं तू उड़ लेना।

  Bharti


ये मेरा जीवन है

 1. 

न्यू बोली --जी आपकी morning good कब होती है।

मैं बोला -- जी और तो बेरा कौना जै म्हारी भैंस बिना लात ठाए दूध दे - दे म्हरी morning good तब होती है।।




2.

मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब नहीं होती जब मेरे पापा मुझे पैसे देते हैं,

बल्कि खुशी तब होती है - - जब मुझे दिए गए पैसे जरुरत पड़ने पर वापस मांगते हैं - और मैं हक से उनको बोलती हूं पापा आप मुझे मेरे पैसे कब लौटा रहे हो। 

तब मेरे पापा के फेस पे बड़ी.. सी स्माइल होती है और वो बोलते हैं तेरे पैसे मैं तुम्हें बहुत जल्दी लौटा दूंगा मेरी अम्मा ।

3.

कहीं भी जाने से पहले तैयार होकर - खुद को आईने में कितना भी निहार लो ।

 जब तक मजा नहीं आता तब तक मां आपकी बलाइयाँ लेते हुए ये ना कह दे हाए ... नज़र ना लगे मेरी बच्चि को ।


4.

हम सभी कि जिंदगी में एक पल ऐसा आता है हम जो कुछ करना चाहते हैं।हमारा मस्तिष्क उसके बारे में ना सोचकर किसी और के बारे में सोचने लगता है। ऐसा होने पर हम काम करते हैं तो ना तो हम सोच पाते हैं और ना ही किम कर पाते हैं।

 तो ऐसे में दिमाग को खुला छोड़ दो... जा.. तू - सोच जो सोचना है। तब एक पल ऐसा आता है वो अपने आप ही उस जगह से हट जाएगा। और बोलेगा आजा अब बहुत हुआ कुछ काम करते हैं। तब हम वो काम करेंगे तो उसे पूरा करने के लिए हम सम्पूर्ण होंगे आधे-अधूरे नहीं।


5.

कितनी अजीब बात है ना, हमारी जिंदगी में वैसे तो बहुत से लोग जुड़े होते हैं। 

लेकिन कोई शक्श ऐसा आता है जिसकी बातों में कुछ तो ऐसा होता है।जो हमारे रोंगटे खड़े कर देता है। 


6.

संसार का सारा सुख एक ओर

और जब मां आपको सुबह-सुबह उठाए

तब आप बोले मम्मी बस 5 मिनट और सोने दो

उसके बाद मम्मी आपको बोले ठीक है लेकिन 5 मिनट के बाद तुम नहीं आई ना तो मैं फिर से आऊंगी

उस 5 मिनट  का सुख एक ओर।


7. 

आपका जिंदगी में आना तब सफल हो जाता है

जब सारी दुनिया आपके खिलाफ हो

तब आपके पापा आपकी ढाल बनकर खड़े हो जाएं

और बोले मेरी बेटी मेरा मान है वो कभी किसी के साथ गलत कर ही नहीं सकती।


8.

हमें फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला हमारे बारे में क्या सोच रखता है।

बस हमें इस बात से फर्क पड़ता है कि हम उनके बारे में जो सोच रखते हैं, बस वो उसका मान रखा ले।


9.

हमें खुशी तब नहीं होती जब हम किसी पर अधिकार जमाएं।

 बल्कि खुशी तब होती है कोई हम पर विश्वास करके हमारे ऊपर अधिकार जमाएं।


10. 

जीवन में परेशानियों का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि परेशानियों के बिना जीवन बेरंग सा हो जाता है। खुशी की बात तो यह है कि जब हम अपने जीवन में आने वाली परेशानियों को खुद से हल करते हैं तब हमें जो खुशी मिलती है ना वह खुशी ही तो हमें जिंदगी को जीने का नया तरीका सिखाती है।



Thursday, January 6, 2022

HSSC & Student

 


या HSSC और Student के बीच की लड़ाई सै।

ताऊ कितनी ए बाट दिखाले नौकरी हमनै लेकै दिखाणी सै।


आदरणीय खट्टर और खदरी नै कसम खा ली सै।

ब्याह म्हारा नहीं होया, थमनै भी रांडे मारण की तैयारी सै।

जबै तो HR Police के पेपर में दूध काढ़ण की सर्वोत्तम विधि बूझ राखी सै। 

बता के उसनै पुलिस स्टेशन के बाहर भैंस बांधणी सै।


तो HSSC कै बेरा नहीं के मन मै आरी सै।

पटवारी परीक्षा एक बार भी नहीं ली, फीस तीसरी भरवाण की त्यारी सै।

जणै ग्रुप D मै लागे छोरे की ब्याह की त्यारी सै।

उस छोरे नै छोरी मै बहुत वैरायटी चाहिए सै, HSSC भी पेपर मैं आऊट ओफ सिलेबस ल्यारी सै।


प्रधान, उन्नै बेरा कौन्या हम हरियाणा आले सै।

ये माणस नै प्रपोज करें पाच्छै उसकी क्वालिटी देखै सै।

जै कोए छौरा ना कह दे, तो छौरी उसके घर आगै तांडव करया करै।

स्टडी के नाम पै अडै छौरे ITI और छौरी JBT आले सर्वोत्तम दर्ज़ा पाया करै।


मनै सुर्यवंशम कई बार देख राखी सै।

एक छोरा पढ़या लिखा देखकै ब्याह रचाण की ठाणी सै।

बस तो मैं चलाऊंगी, IAS मनै वो एक बणाणा सै।

बहोत कुछ दिया इस धरती नै इसकी पाई-पाई लोटाणी सै।


या HSSC और Student के बीच की लड़ाई सै।

ताऊ कितनी ए बाट दिखाले नौकरी हमनै लेकै दिखाणी सै।


Bharti



हरियाणा आले



नीत का ठाडा , घणा आच्छा, एक माणस टकराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


वो सहज- सहज बतलावै था।

वो दिल का हाल सुणावै था।

वो दुनिया नै बुरी बतावै था।

वो अपणे जख्म दिखावै था।


मैं भी किसै का रांझा था।

कोए मेरी हीर होया करती।

लोगां की सांस थम्या करती।

जब मेरी हीर हंसा करती।


लोगां नै बहोत समझाया मैं।

ऊंचे घर की छोरी कै, हाए क्यूं चक्करा में आया मैं।

सैलरी मेरी का वनथर्ड तो उसके कैप्चीनो पै उड़ा आया मैं।

बचिकुची नै ज़ारा और गुच्ची नै पूज आया मैं।


वा मनै बाबू कह्या करती, बाबू आला फिल कराएगी रै।

उसके बाप नै नहीं लडाए,जितने लाड़ वा मेरे पै लडवागी रै।

सारी फर्माइश पूरी करदी,मी- सा बरसा आया मैं।

मेरे हिस्से का किला, उसके कन्यादान मै बुलावा आया मैं।


मेरी मां मन्नै राजाबेटा अर बाबू सेर कह्या करै।

दिल का मैं पापी कौन्या हम 'जय सीयाराम जी' कह्या करै।

जब पहर के चालूं धोला कुड़ता छोरी हैंडसम कह्या करै।

हम हरियाणा के बड़े दिल आले, बैराणे नै भी ' ताईआले ' कह्या करै।


नीत का ठाडा, घणा आच्छा, एक माणस टक्कराग्या रै।

मेरी धोली काया, नहीं कोए छाया, वो अपणा रंग चढाग्या रै।


       Bharti



Tuesday, January 4, 2022

उलझा सा जीवन






ये कुछ बनने की चाह,

ये कुछ खोने का डर।

चलते जा रहें हैं, 

भटक रहे हैं दर बदर।

जो पास में है उसकी हमें कहां कदर।

जिसकी आश नहीं हमें तो बस उसी की खबर।


हे ! ईश्वर..

जिसने खुद को जान लिया।

उसने तुझको मान लिया।

जिसको तुमने जान लिया, 

उसने ये जीवन जान लिया।


कल किसने देखा है। 

हमको तो आपने भेजा है।

आपने जीतना समय दिया है

हमें तो हर पल को जीना है।


आज यहां बसेरा है।

तो कल कहीं ओर सवेरा है।

मिट्टी की यह काया सारी।

बस कर्म की है माया सारी।


ये किस बहम में फंसे हैं।

"बस ये मिल जाए ,मेरे! मौला..,

बदले में चाहे जो ले-ले।"

हर बात में शौदेबाजी करते हैं।

खिलती कली तोड़कर तुम्हें खुश करते हैं।


गलती मेरी नहीं है, मेरे! मौला।

मुझे हर कण में तू दिखता है।

तभी तो तेरे नाम का पुतला भी लाखों में बिकता है।

देख तू बैठा सिंहासन पर साथ में पहरेदार बैठाता है।


ना जाने क्या सोच रहे हैं।

बिना आत्मा के शरीर को नौंच रहें हैं।

किसी के विश्वास के साथ खेल रहे हैं।

तो अपने आप से भाग रहे हैं।






         Bharti


Saturday, January 1, 2022

Happy New Year 2022

 

मुझे इतना अच्छा परिवार और इतने अच्छे और सच्चे दोस्त देने के लिए। 

अ जिंदगी तेरा शुक्रिया।

आओ एक नई शुरुआत करते हैं।
क्यों न पुराने गमों को भुलाकर,
खुशी के चंद पल ही सही बस उनको याद रखते हैं।
क्या दीया तूने मुझे अबतक ,
इसका हिसाब कभी बाद में करते हैं।
ये जो दो पल ही सही इन्हें बेहिसाब जीते हैं।
तुम अपने पास रखो इन गिले-शिकवे को।
एक दिन जीत जाएंगे ,
बस इसी कोशिश में हम हर रोज क्यों मर रहे हैं।
कोई बात नहीं जो उसने हमें याद नहीं किया।
क्यों न अपने इगो को साइड में रखकर,
हम ही उनके पास चलते हैं।
क्या पता कब बुलावा आ जाए उस रब का।
हमारे जाने से पहले कहीं 😜 वो ही ना चला जाए,
तो इस नए साल की शुरुआत हम आपके साथ करते हैं।
बाहें फैला दी है हमने देखना यह है,
ये साल हमें किस हाल में रखता है। 
अब यूं ही परखते रहेंगे एक दूसरे को।
जो समय है वो भी जाता रहेगा।
गुजरे साल की तरह बस मुट्ठी भर यादें ही रह जानी है।
तो बहुत सारी ना सही बस मुट्ठी भर यादें ही बन जाएंगे।
इसी बहाने से किसी की खाली जिंदगी में,
एक मुस्कान की वजह ही बन जाएंगे।
अब किसी से कोई शिकवा ना करेंगे,
बस अपनी जिंदगी में चंद पल ही सही लेकिन अपने लिए जरुर निकालेंगे।
आओ एक नई शुरुआत करते हैं।
ये सारी दुनिया ही अपनी।
हर रोज किसी न किसी चेहरे की मुस्कान बनने की कोशिश करते हैं।
बाहें फैलाकर इस नए साल का स्वागत करते है।
😊Happy New Year 2022❤️🎂