क्या होता है डर और असल में हम प्यार किस से करते हैं। हमें धोखा क्यों मिलता है?
डर
कहते हैं परेशानी problem अकेले नहीं आती वो जब भी आती हैं अपने साथ बहुत सारी अनुभव अभिलाषा भी लेकर आती हैं। हां वो अलग बात है वो हमारे लिए कितना कष्ट भरा होता है। पर कुछ भी कहो उस दर्द का भी अपना अलग ही मजा होता है।
हम जब भी जीवन में अपना कदम बढ़ाते हैं तब हमें कोई अंदेशा नहीं होता है कि हमें हमारा वो कदम हमें कहां ले जाएगा। बस स्वयं पर यह भरोसा होता है कि हम खुद को संभाल लेंगे। आज मुझे मेरी 6th class की एक किताब मिली जब मैंने उसे पढ़ना शुरू किया तब उसे एक दिन में उसे पढ़ लिया। उस समय मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आई वो इसलिए नहीं कि मैंने उसे पढ़ लिया , बल्कि वो इसलिए कि मैंने जब 6th class में addmission लिया तब उसे पढ़ने में पूरा साल लगा दिया।
इसलिए जब भी हम कोई काम शुरू करते हैं तब हमारे अंदर यह डर रहता है कि हम क्या सफल होंगें या नहीं। बस यह डर ही होता है जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है। अगर हम किसी काम को कर चुके होते हैं तब हमें उस काम का पूर्ण ज्ञान हो जाता है। तब हमारा उस काम के प्रति डर खत्म हो जाता है। अगर हम किसी काम को करने से पहले ही हार मान जाएं और वो काम शुरू ही ना करें ऐसा करने से तो हम जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे। अगर किसी काम की शुरुआत है तो अंत भी है।
वैसे भी हमें कोई भी काम हो उसे एक बार करके देखना चाहिएं। हम सफल हुए तो बहुत अच्छा है और असफल रहे तो उससे भी अच्छा है। क्योंकि हमें उस काम की पूरी जानकारी होती है इसके साथ हमें यह पता होता है सफल हुए इंसान को कितनी सिद्धि मिली है और असफल को अपनी हार पर कैसा लगता है समाज की उसके प्रति क्या धारणा बन जाती है। तो अगर आप हार जाए तो यह ना सोचें कि हम हार गए बल्कि उस हार के कारण को ढूंढे और अपनी हार को जीत में बदलें।
रिश्ते
हम सभी के जीवन में बहुत से लोग जुड़े होते हैं और उन्ही लोगों के प्रति हमारी बहुत सी जिम्मेंदारीयां भी जुड़ी होती हैं। हम चाहकर भी उनसे अलग नहीं हो सकतें। स्वयं ईश्वर हमें उन रिश्तों के साथ हमें इस धरती पर भेजते हैं। फिर हम उनसे अलग कैसे रह सकते हैं। जीवन में हर चीज का अपना एक अलग महत्व है। बस उसे पहचानने की देरी है।
आज के समय में किसी के पास समय नहीं है और समय ना देने से रिश्ते टूट जाते हैं। वो मुझे याद नहीं करता तो मैं क्यों करूं। ये जरूरी तो नहीं की आपके पास समय है तो सामने वाले के पास भी समय हो। या फिर होने को तो वो स्वस्थ हैं भी या नहीं । तो वो आपसे ना पूछे तो आप भी उससे उसका हाल ना पूछें ये इन्साफ नहीं। फिर हम इसे रिश्ते नहीं व्यापार कहेंगे । वो हमारे लिए काम करे तो हम भी उसके बदले में काम करें।
मांगा
कहते हैं ईश्वर से अगर हम सच्चे मन से कुछ मांगते हैं तो वो हमें जरूर मिलता है। ऐसे में कोई काम करने की क्या जरूरत है बस ईश्वर से मांग ही लो। Corona के कारण देश में lockdown था तब ईश्वर से मांगा ही होगा सभी ने फिर वो गरीब बेसहारा लोगों को भूखे पेट क्यों सोना पड़ा। नहीं सर ईश्वर भी उसी का साथ देता है जो परिश्रम करता है। कहते हैं मजदूर बहुत मेहनती होता है। लेकिन बीते दिनों ने यह दिखा दिया कि वह मजबूर भी बहुत होता है। और जब पेट में अन्न की भूख होती है तब मान सम्मान की बात सब ढकोसला लगती हैं। एक पल को स्वयं पर से ही नहीं ईश्वर के ऊपर से भी विश्वास उठ जाता है।
संकट
भारत एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र देश है। यहां ईश्वर को सबसे ऊपर माना गया है लेकिन उसका असल रुप क्या है यह कोई नहीं जानता। यहां भगवान के अनेक रूप देखने को मिलेगें । और जब इन्सान पर कोई संकट आता है तब वह अपने आप को उस संकट से निकालने के बजाए भगवान को खुश करने की कोशिश में लग जाता है।की मैं भगवान को खुश करूंगा तब वो मुझे इस संकट से बाहर निकल लेंगे। क्या कभी ऐसा हुआ है कि हम किसी जंगल में हो और शेर आ जाए तब हम वहां से भाग कर या कहीं छिप कर खुद को बचाएंगे या फिर ये कहेंगे कि ना पहले मैं भगवान की पूजा करूंगा तब भगवान मुझे बचाने के लिए आएंगे। ये तो सही नहीं है समस्या से निपटने के लिए हमें खुद को ही कुछ करना होता है हां भगवान से हम यह मांग सकते हैं कि हमें सही मार्ग दिखा दे। इतना तो भगवान भी कर सकते हैं। अब सारा काम भगवान पर छोड़ देंगे तो हमें क्या भगवान ने यहां तमाशा देखने के लिए भेजा है।
इंसान
एक इंसान का जन्म बहुत ही किस्मत से मिलता है। भगवान ने बहुत प्यारी दुनिया बनाई है और इस दुनिया की देखभाल करने के लिए ही इंसान को धरती पर उतारा है। लेकिन पता नहीं यहां आने के बाद इंसान को क्या हो जाता है कि वह अपने आप में खो जाता है और किसी के बारे में उसे कोई सुध नहीं होती।
व्रत
India में शादीशुदा औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए भुखे पेट रहकर व्रत करती हैं। सभी को अच्छा लगता हैं बहुत खुशी मिलती है। लेकिन क्या कोई जानता है कहते हैं कि भगवान शिव की पत्नी पार्वती जी ने जब वह कुंवारी थी तब यह व्रत सबसे पहले रखा था। और उन्होंने शिव को अपने पति के रूप मांगा था। पार्वती जो कि महलों में पली-बढ़ी उन्होंने शिव जो फकीर के भेष में रहने वाला उसको मांगा यह बहुत बड़ी बात है। आज के समय में अगर पति पत्नी दोनों एक दूसरे को समझकर और बिना किसी मनमुटाव के शांति से जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाएं तो यह पूजा से कम है क्या। और वैसे भी अगर व्रत करने से ही उम्र लम्बी होती है तब तो हिंदुस्तान में पुरुषों की आयु की औसत बहुत ज्यादा होनी चाहिए थी। और उन देशों में जहां ये सब व्रत नहीं होते वहां के पुरूषों को तो मर जाना चाहिए था।
प्यार
कहते हैं प्यार बहुत ही अनोखा अहसास होता है जिसको भी यह होता है उसे यह दुनिया बहुत रंगीन और प्यारी लगने लगती है। जिस शख्स से हमें प्यार होता है उसकी सभी बातें अच्छी लगती हैं। हमें उसमें कोई कमी नजर नहीं आती।हर वक़्त हमें उसके साथ होने का अहसास होता है। जीवन में हमें कोई ऐसा शख्स मिलता है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि हम इसके बिना अधुरे हैं। उसी के सपने और जो उसे अगर एक बार देखना ले तो हमें खाना तक नहीं खाते हमें कुछ और अच्छा ही नहीं लगता। और जो उसके दर्शन हुए नहीं की बस हां अब हमने इस दुनिया को जीत लिया हो। इसमें यह जरूरी नहीं कि यह पागलपन दोनों तरफ से हो । अक्सर यह एक तरफा से भी होता है। फिर क्या हुआ जो वो हमसे प्यार नहीं करता मैं तो सच्चा प्यार करता हूं या करती हूं। और ऐसा पागलपन 1-2, 2-3 साल तक चलता रहता है । वो इतनी हिम्मत भी नहीं जुटा पाते कि वो जिनके लिए इतने पागल हैं कम से कम उसको तो बता दें।
लेकिन नहीं कहीं हम उसको खो न दें इस डर से हम उसे नहीं बता पाते । ऐसा जरूरी नहीं कि सामने वाले को हमारी भावनाओं के बारे में जानकारी हो। जबकि उसको तो इसकी भनक भी नहीं होती है और वो हमारी जिंदगी से कहीं दूर जा चुके होते है। फिर हमारे अंदर पछतावे के सिवाय कुछ नहीं रहता और यही सोचते रहते हैं काश मैंने उससे पूछा होता तो क्या पता वो आज मेरे पास होता। और अगर वो ना कहता तो क्या था अकेले तो हम आज भी है पर उम्र भर का पछतावा नहीं होता है




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