जिंदगी के खट्टे मिठे अनुभव हम और आप .1
1. "हमें अपनी तन्हाई कुछ इस कदर प्यारी है।
तेरे साथ होने का अहसास ही भीड़ पर भारी है।
कुछ इस कदर चाहत हमको तुम्हारी है।
लव्ज़ मौन रहते हैं बस धड़कनों में बातें जारी हैं॥"
2.
"उसे भीड़ पसंद नहीं,
हमनें महफिल जमानी छोड़ दी।
दबा लेती है ये महंगी तेरे हाथों की खुशबू,
हमनें वो भी लगानी छोड़ दी।
उसका इश्क कुछ इस कदर सर चढ़कर बोला,
हमने बातें बनानी छोड़ दी।
हम में हमारा कुछ नहीं,
वो एक ईशारा तो दे हम सांसों को बुलाना छोड़ दे॥"
3.
"तेरी बातों में कुछ इस कदर खो गए,
हम तेरे हो गए हमें पता तक ना चला।
हम कतरा-कतरा पिंघल गए,
तुमनें हमें कब समेटा हमें पता तक ना चला।
तुम नशे सा छा गए,
हम कब मदहोश हो गए हमें पता तक ना चला
बहुत दूरियां रही हमारे दरमियाँ कब सांसों का फासला मिट गया हमें पता तक ना चला॥"
4.
"की वो किसी की तारीफ में कुछ इस कदर घडते हैं अपने शब्दों को
रोम-रोम खिल उठता है सर झुक जाता है सजदा करने को॥"

















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