Pages

Tuesday, July 28, 2020

जिंदगी के खट्टे मिठे अनुभव हम और आप .1


1. "हमें अपनी तन्हाई कुछ इस कदर प्यारी है।
      तेरे साथ होने का अहसास ही भीड़ पर भारी है।
      कुछ इस कदर चाहत हमको तुम्हारी है।
      लव्ज़ मौन रहते हैं बस धड़कनों में बातें जारी हैं॥"


2.
"उसे भीड़ पसंद नहीं,
हमनें महफिल जमानी छोड़ दी।
दबा लेती है ये महंगी तेरे हाथों की खुशबू, 
हमनें वो भी लगानी छोड़ दी।
उसका इश्क कुछ इस कदर सर चढ़कर बोला, 
हमने बातें बनानी छोड़ दी।
हम में हमारा कुछ नहीं, 
वो एक ईशारा तो दे हम सांसों को बुलाना छोड़ दे॥"

 3.
"तेरी बातों में कुछ इस कदर खो गए,
हम तेरे हो गए हमें पता तक ना चला।

हम कतरा-कतरा पिंघल गए,
तुमनें हमें कब समेटा हमें पता तक ना चला।

तुम नशे सा छा गए,
हम कब मदहोश हो गए हमें पता तक ना चला

बहुत दूरियां रही हमारे दरमियाँ कब सांसों का फासला मिट गया हमें पता तक ना चला॥"

4.
"की वो किसी की तारीफ में कुछ इस कदर घडते हैं अपने शब्दों को
रोम-रोम खिल उठता है सर झुक जाता है सजदा करने को॥"

Monday, July 27, 2020

हिंदी शायरी

1.
"अ खुदा मैं जब-जब भी उसे याद करूँ
हिचकि जरूर आए उसे ये फरियाद करूँ।"
 2.
"कितना कमा लेती हो जो इतना तनकर चलती है
अजि लॉकडाउन है सरकार हमारी कहाँ चलती है
फेस पे समाइल पैदाइश रहती है
हमने तो बस अपनी जरूरतें कम कर रखी हैं।"
 3.
"बहुत सी दरारें नज़र आ रही हैं।
तेरे दिल के आईने में सपने हज़ार नज़र आ रहे हैं।
तू कहता था मुझे तन्हाई पसंद रही है
तेरे पास आकर देखा जनाब,
तेरा दिल हमसफ़र की तलाश कर रहा है॥"

 4.
"अपने दिल की धड़कन को धडकने पर यूं मजबूर ना कर
ये जीन्दगी तुम्हें मिली है इस पर गुरूर कर
जो लोग कहतें हैं मेरे लिए घरबार छोड़ दे उन सब को साइड कर।
तू जैसा है जो भी है जो लोग तुम्हें चाहें बस उनको प्यार कर॥"


Friday, July 24, 2020

जर्रा-जर्र खिल गया तू सावन के जैसे बरसा है


तुम आए हो चले आना कदमों के निशान मिटा आना
आंगन छोटा है मेरे हुजरे का भीड़ को साथ में ना लाना

तुम्हें शौक है बाजे- गाजे का जरा दबे पाव चले आना
अभी सुलाया है थपथपा के उन अरमानों को ना जगाना

तु परिंदा नज़र आया उस खिलती प्यारी बगिया का
ऊंची उड़ान ना भरना छत गीली है मेरे हुजरे की

पतझड़ रहती है यहाँ पंखों को आहिस्ता खोलना
झड़ जाएगी वो भी जो कोपल फूटी हैं अभी-अभी

कोमल कदम संभाल के सूख के कांटे बिखर गए
समय लगेगा मैं अभी लगी हूँ आंगन मेरा संवारने

सुना है, आता है तुम्हें चेहरा पढ़ना पर्दा ना हटाइये
तुम जैसे हो जो भी हो हम तुम्हें आहट से पहचान गए

ये साजिशों में रचि दौड़ धूप पागल हमें बन देगी
तू आगे-आगे चल मैं तेरे कदमों के निशां पे चल दूंगीं

फिर से महका मेरा आशियां तू इत्र के जैसे बिखरा है
जर्रा-जर्रा खिल गया है तू सावन के जैसे बरसा है

                         Bharti


हिंदी शायरी


1.
"मैं समझ में आ जाऊँ ऐसा किरदार थोड़े हूँ।
तू आए और आकर पढ़ जाए खुली किताब थोड़े हूँ।
तुम्हें हर पल भा जाऊँ ऐसा विचार थोड़े हूँ।
जनाब,
वर्षों लग जाते हैं किसी को समझने में। 
तू आए पल में बुनियाद हिलाकर चला जाए,
इतनि कमजोर मीनार थोड़े हूँ।"

2.
"गजब का हूनर है तेरे तन्हा होने में
जब थक हार कर बैठ जाती हूँ किसी कौने में
गुस्ताखी माफ़ करना
जरा सा झांक लेती हूँ तेरी खिलाड़ी में
तुम तो बहुत कुछ समेटे बैठे हो अपने आंगन में।"


3.
"किसी का हो जाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसको अपना बना लेना।
किसी को पलकों में बसाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसकी पलकों में बस जाना।
बहुत आसान है जनाब किसी के लिए मर मिटाना।
बस मुस्किल है,
उसके बिना जीना॥"

4.
"मुझे जागीर में रेगिस्तां दे दिया।
और पूछते हैं,
तेरा गुलिस्तां खिलता क्यों नहीं।
नींद-चैन सब छीन लिया
और शिकायत है,
तू पहले जैसी अब रही नहीं।
वचन में रोशनी मांग ली,
और कहते हैं अंधेरा मुझे पसंद नहीं॥"



Bharti




Monday, July 20, 2020

चलो इस बार स्वंय के लिए जीते हैं



जब विश्वास तोड़ दिया जाता है,
एक आंशु तक ना गिरता आत्मा रो देती है
बस एक ख्याल बाकी रह जाता है 
बाकी सब बिखर जाता है 
सांस थमती नहीं,रूह जम जाती है
बनकर पूतला जिम्मेदारी ढोते रहते हैं
एक बार वो मिले तो सवाल करूँ उसे 
क्यों किया उसने स्थिर पानी में तूफान उठा दिया उसने
खैर वो खुश तो है ना जिंदगी के उस मौड़ पे
हम तो परछाई थे
फिर क्यों चल दिए हमें छोड़के
माना आदि हैं हम उनके कांधे पर सर रख सोने के
पर आदत कहां है उन्हें भी यूं अकेले चलने की 
ये तो समय का चक्र है जो अपना काम करता है
फिर आसपास क्यों मंडराया करता है 
पल में भूल जाएँ सब कुछ ऐसा नहीं होता है
इनसान हैं भगवान ने स्वंय बनाया है 
खुद को मिटा ले इतना कायर थोड़े हैं
पल पल कोशें हम उसे ऐसा जरूरी थोड़े है
कोई तो होगा जो इसे फिर से जोड़ देगा ऐसा आभास होता है
चलो इस बार स्वंय के लिए जीते हैं।
  
      Bharti

Sunday, July 12, 2020

बराबरी की बातें

बराबरी की बातें



एक बार जिंदगी को जिंदगी समझकर देखें
छोड़ो बराबरी की बातें,
आज एक-दूसरे की जिम्मेदारी को समझकर देखें
बात जब बराबरी की आए,
तो खुशियाँ ही क्यों गमों को साझा करके देखें
यूं तो कट रहें हैं जिंदगी के हसिन लम्हें,
चलो आज जिम्मेदारीयां ढोने वाले से बातें बेहिसाब करके देखें

माना आसान नहीं होता किरदार औरत का निभा पाना।
लेकिन कहाँ आसान होता है जज्बात मर्द के समझ आना।
सपनों की ऊंची उड़ान भर वो चाहता है कहीं उड़ जाना।
नहीं आसान रहा होगा उसके लिए अपने सपनों को कोडियों के भाव बेच पाना।

कोई तो वजह रही होगी उसके अनपढ़ रहने में।
जो चेहरा पढ़ ले क्या मुस्किल है भला किताब को पढ़ने में।
बहुत कुछ समेटे बैठा रहता है अपने अंदर में।
जख्म गहरा हो कितना भी सरेआम निलाम करता नहीं किसी महफील में।

एक बार तू अपना उसे कहके तो देख ले।
जमाने भर से लड़ जाएगा तू दिल लगाकर देख ले।
उसे यूं आजमाना और मझधार में छोड़ना बंद कर दे।
बेवफाई का इलज़ाम एक तरफा लगाएँ ये सही नहीं ।
तू अपने तराजू का माप एक बार चैक करवाके देख ले।।

ये दिल बहुत दुखता है उसका उसे मिट्टी का खिलौना समझना बंद कर दे।
वो अपने आप चला  जाएगा तेरी राहों से तू उसे पलटकर देखना बंद कर दे।
आईने समान दिल के टूकड़े हजार करके उसे जख्मी छोड़ देना अब बंद कर दे।
टूटे हुए आईने को अब यूं घिस-घिस कर साफ करना बंद कर दे।

बहुत मजबूत होता है मगर मजबूर होता है।
ये दो पहियों की गाड़ी है साथ चलने में मगरूर होता है।
आकर एक पल पास बैठ जाया कर क्या पता उस विधाता को क्या मंजूर होता है।
यूं तो कटने को कट जाएगी जिंदगी क्या कभी ख्वाहिशों का समुंद्र भी खत्म होता है।

                           Bharti










Wednesday, July 8, 2020

मेरे अलफाज कहते हैं,मेरे जज्बात को समझो



मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है,वो गलती ना हमारी थी।।

मेरे हमदम, मेरे सरताज, मैंने हमराह तुम्हें माना
बहुत मुस्किल है जानेजां ..इस  दिल को समझाना
कभी खेली मैं आंचल में, कभी झूली थी बाहों में
वो दूनिया ही निराली थी, जहां मेरी मनमानी थी।

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी  थी।।

क्या ये हो रहा है अब ,क्यों वो हो रहा था तब
कहीं चटका कोई मनका, कहीं टूटा कोई तारा
ना कोई अब तमन्ना है, ना कोई तब शिकायत थी
वो तेरा प्यार अंधा था, कुछ मेरी खता भी थी

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

जिसे मांना खुदा अपना, वो धरती पर है आ उतरा
जुदा हम तुमसे होके हो.. ,जोगी बन गए यारा
बहुत कुछ सह लिया तुमनें, बहुत कुछ कह लिया उसनें
तुम्हें मैं क्या ये समझादूँ , तुम्हें मैं क्या ये बतलादूँ

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

चले आना- चले आना जमाना छोड़ दे तुमकों
महोब्बत की थी हमने तो, अब उसको निभाना है
चलीं  आऊंगी बंधन तोड़- चोला छोड़ के यारा
ये जीवन अब तुम्हारा है, ये जीवन कल तुम्हारा था

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

बड़ा रंगीन मोसम है, बड़ा दिलकश नजारा है
जमाना बीत गया यारा, आज तुमनें पुकारा है
तू कैसी है, तू खुश तो है , की मेरा हाल पूछा है
तुम खुश तो हो मेरी बाहों में आके ओ मेरी जाना

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

बिना सावन ही साजन के आज ये नैन बरसे हैं
बहोत जोरों से तोड़ा दिल, की धड़कन रो रही अब तक
जमाना कुछ समझता है, ये जीवन की कहानी है
मेरे लिखने पे मत जाना, ये हर दिल की कहानी है

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

किसी ने तोड़ दिया ये दिल, तो कोई जोड़ लेता है
तेरी मुस्कान कहती है, तू कितना पीर सहता है
कहानी वो ना झूठी थी, कहानी ये ना झूठी है
ये तो उस रब की माया है, जो ऐसा खेल रचता है

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

             Bharti