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Sunday, July 12, 2020

बराबरी की बातें

बराबरी की बातें



एक बार जिंदगी को जिंदगी समझकर देखें
छोड़ो बराबरी की बातें,
आज एक-दूसरे की जिम्मेदारी को समझकर देखें
बात जब बराबरी की आए,
तो खुशियाँ ही क्यों गमों को साझा करके देखें
यूं तो कट रहें हैं जिंदगी के हसिन लम्हें,
चलो आज जिम्मेदारीयां ढोने वाले से बातें बेहिसाब करके देखें

माना आसान नहीं होता किरदार औरत का निभा पाना।
लेकिन कहाँ आसान होता है जज्बात मर्द के समझ आना।
सपनों की ऊंची उड़ान भर वो चाहता है कहीं उड़ जाना।
नहीं आसान रहा होगा उसके लिए अपने सपनों को कोडियों के भाव बेच पाना।

कोई तो वजह रही होगी उसके अनपढ़ रहने में।
जो चेहरा पढ़ ले क्या मुस्किल है भला किताब को पढ़ने में।
बहुत कुछ समेटे बैठा रहता है अपने अंदर में।
जख्म गहरा हो कितना भी सरेआम निलाम करता नहीं किसी महफील में।

एक बार तू अपना उसे कहके तो देख ले।
जमाने भर से लड़ जाएगा तू दिल लगाकर देख ले।
उसे यूं आजमाना और मझधार में छोड़ना बंद कर दे।
बेवफाई का इलज़ाम एक तरफा लगाएँ ये सही नहीं ।
तू अपने तराजू का माप एक बार चैक करवाके देख ले।।

ये दिल बहुत दुखता है उसका उसे मिट्टी का खिलौना समझना बंद कर दे।
वो अपने आप चला  जाएगा तेरी राहों से तू उसे पलटकर देखना बंद कर दे।
आईने समान दिल के टूकड़े हजार करके उसे जख्मी छोड़ देना अब बंद कर दे।
टूटे हुए आईने को अब यूं घिस-घिस कर साफ करना बंद कर दे।

बहुत मजबूत होता है मगर मजबूर होता है।
ये दो पहियों की गाड़ी है साथ चलने में मगरूर होता है।
आकर एक पल पास बैठ जाया कर क्या पता उस विधाता को क्या मंजूर होता है।
यूं तो कटने को कट जाएगी जिंदगी क्या कभी ख्वाहिशों का समुंद्र भी खत्म होता है।

                           Bharti










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