ये कुछ बनने की चाह,
ये कुछ खोने का डर।
चलते जा रहें हैं,
भटक रहे हैं दर बदर।
जो पास में है उसकी हमें कहां कदर।
जिसकी आश नहीं हमें तो बस उसी की खबर।
हे ! ईश्वर..
जिसने खुद को जान लिया।
उसने तुझको मान लिया।
जिसको तुमने जान लिया,
उसने ये जीवन जान लिया।
कल किसने देखा है।
हमको तो आपने भेजा है।
आपने जीतना समय दिया है
हमें तो हर पल को जीना है।
आज यहां बसेरा है।
तो कल कहीं ओर सवेरा है।
मिट्टी की यह काया सारी।
बस कर्म की है माया सारी।
ये किस बहम में फंसे हैं।
"बस ये मिल जाए ,मेरे! मौला..,
बदले में चाहे जो ले-ले।"
हर बात में शौदेबाजी करते हैं।
खिलती कली तोड़कर तुम्हें खुश करते हैं।
गलती मेरी नहीं है, मेरे! मौला।
मुझे हर कण में तू दिखता है।
तभी तो तेरे नाम का पुतला भी लाखों में बिकता है।
देख तू बैठा सिंहासन पर साथ में पहरेदार बैठाता है।
ना जाने क्या सोच रहे हैं।
बिना आत्मा के शरीर को नौंच रहें हैं।
किसी के विश्वास के साथ खेल रहे हैं।
तो अपने आप से भाग रहे हैं।
Bharti

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