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Tuesday, December 15, 2020
सच्चा दोस्त
Sunday, November 29, 2020
जिंदगी के खट्टे-मीठे लम्हे हम और आप -3
1 .
2.
Wednesday, November 25, 2020
मीराबाई जी
मीराबाई जी का जीवन चरित्र----
परम भक्त मीराबाई के अनूठे प्रेम और निराली भक्ति की क्या महिमा कही जाए कि जिसका अब तक हिंदुस्तान भर में दृष्टांत किया जाता है। मीरा का जन्म c 1498 को जोधपुर के मेरता (राठौर रतनसिंह जी )की इकलौती बेटी और मेरता(मारवाड़ देश) के राव दूदा जी की पोती थी।इनका जन्म कुड़की नामक गांव में जो उन गांव में से है(जो कि उनके पिता को गुजारे के लिए दूदा जी से मिले थे)
मीराबाई जी के गुरु रविदास (रैदास)-
कहने को मीराबाई जी श्री कृष्ण की भक्त मानी जाती है। किंतु उसे यह मार्गदर्शन करने वाले कोई और नहीं बल्कि गुरु रविदास जी थे। गुरु रविदास जी का वर्णन मीराबाई जी के बहुत से पदों में मिलता है। जब मीराबाई जी का जन्म हुआ उस समय पर समाज में जातिवाद छुआछूत का बहुत प्रभाव था। समाज में चारों ओर छुआछूत का बोलबाला था। और यही कारण रहा है कि मीराबाई जी के गुरु रविदास जी जो एक निम्न कुल से संबंध रखते थे। जबकि मीराबाई थी एक राजकुल परिवार की बेटी और बहु मानी जाती हैं।
जब मीरा बाई जी के पति का स्वर्गवास हो गया था तब हिंदू परंपराओं के अनुसार मीराबाई जी को गंगा स्नान के लिए काशी ले जाया गया था। वहां पर जाकर मीराबाई जी ने देखा की एक निम्न कुल से संबंध रखने वाले महान पुरुष गुरु रविदास ने मात्र मिट्टी की मूर्तियों को बैठे-बिठाए अपनी ईश्वर भक्ति के चमत्कार से गंगा के इस पार से दूसरे पार तेरा दिया। तब मीराबई जी को उस महान आदमी से मिलने तथा अपना गुरु बनाने का निर्णय लिया। काशी मैं जाकर मीरा जी ने गुरु रविदास को अपना गुरु बनाया तथा गुरु रविदास जी ने मीरा बई जी को ईश्वर की भक्ति करने का मार्गदर्शन दिया। जिसका वर्णन मीराबाई जी ने अपने पदों में कुछ इस प्रकार किया है----
"मीरा मनमानी सूरत सैल आसमानी।
जब जब सूरत लगे वह घर की, पल-पल नैनन पानी।
ज्यों हिये पीत तीर सम सालत , कसक कसक कसकानी।
रात दिवस मोहि नींद ना आवत, भावे अन्ना पानी।
ऐसी पीर बिरह तन भीतर, जागत रैन बिहानी।
ऐसा भेद मिले कोई भेदी,देस बिदेस पिछानी।
तासों पीर कहूं तन केरी, फिर नहिं भरमों खानी।
खोजत फिल्मों भेद वा घर को, कोई न करत बखानी। रै
संत मिले मोंहि सतगुरु, दीन्हा सुरत सहदानी।
मैं मिली जाय पार पिय अपना, तब मोरी पीर बुझानी।
मीरा खाक खलक सिर डारी, मैं अपना घर जानी।।"
मीराबाई जी की कृष्ण भक्ति--
बचपन से ही मीराबाई को परमार्थ का जाओ और गिरधारी लाल जी का इष्ट था। ऐसा माना जाता है कि जब मीराबई जी बहुत छोटी थी तब उनके पड़ोस में एक लड़की का विवाह हो रहा था यह सब देखकर मीराबाई जी ने अपनी मां से पूछा था कि मेरा पति कौन है।तब उनकी माताजी ने हंसकर गिरधरलाल की मूर्ति को उनका पति बतलाया था।
जब मीरा जी विधवा हो गई और साधु का भेष बनाकर ईश्वर की भक्ति में लीन रहने लगी तब उनके देवर महाराणा विक्रमजीत जो(अपने भाई महाराणा रतन सिंह के बाद चित्तौड़ की गद्दी पर बैठे थे) उनके यहां साधुओं की भीड़ का लगा रहना नहीं भाया। उन्होंने दो भरोसेमंद दासिया चंपा और चमेली को मीरा का पहरेदार बनाया। मीर की संगत में रहकर चंपा और चमेली के ऊपर भी ईश्वर की भक्ति का रंग चढ़ गया। मीरा के साथ-साथ चंपा और चमेली भी रैदास की शिष्य बनीं।
Friday, October 23, 2020
अब तक जिम्मेदारी का वजन नहीं उठा पाया है
ये तेरे हाथों की नम्रता बताती है
तूने कोई कमाइ नहीं की
हर वक्त बदलते मौसम की
सुनवाई नहीं की
अपनी ही धुन में चला
हमराही की निगरानी नहीं की
ये तेरी आंखों की सफाई बताती है
तूने जुदाई की तनहाई नहीं देखी
आवाज़ बड़ी दरदरी सी सुनाई पड़ती है
लगता है अपनों को सफाई नहीं दी
नाजुक जान पड़ते हैं कदमताल ये तुम्हारे
कभी किसी की बुनियाद के चक्कर नहीं लगाए
और हां तेरी जड़े बड़ी दूर तक फैलीं हैं
कहीं ओर रोपाई नहीं हुई
टुकड़े का महत्व समझ से परे है
लगता है कभी भूख ने दस्तक नहीं दी
कोई आश्चर्य नहीं होता तुमने वजन को किलोग्राम से मापा है
लगता है अब तक जिम्मेदारीयो़ं का वजन नहीं उठा पाया है।
Thursday, October 8, 2020
साख
Saturday, September 12, 2020
जिंदगी में बनें रहने का बहाना तो मिलेगा
आज तिनका-तिनका करके फसल कटी गई
सबको मिलेगा हिस्सा ऐसी मुनियादी की गई
सभी में अन्न फूसें की बटाई कुछ इस तरीके से की गई
हमारे हिस्से में सूरज की धूप और पसीने की बारिश की गई
वो तो खुश थे पर हमें खुश करने की कोशिश की गई
हमें सबकुछ मिल जाए ऐसी आरज़ू तो कभी हमनें भी नहीं की
क्या फायदा उस जिंदगी का जब सब कुछ मिल जाए
कुछ खो जाने का दर्द और कुछ पाने की अभिलाषा ही मर जाए
चोट को देखने के बहाने ही सही वो दर्द का अहसास तो मिलेगा
हमें पागल रहने दो किसी को पढ़ने का अवसर तो मिलेगा
सब कुछ ना सही कुछ तो मिलेगा उसी उम्मीद के साथ
फिर से बोएं वही फसल बीज से पेड़ बनने का नजारा तो मिलेगा
समुंद्र की गहराई ना सही किनारे पर बैठ कर नजारा तो मिलेगा
Thursday, August 20, 2020
ऐसी विदाई मंजूर नहीं मुझे
Tuesday, August 18, 2020
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
रिश्तों में लिपटकर अपनी पहचान खोज रही
जब तक तेरी गोद में रही तेरे ताज सा मान हो गई
दहलीज पार क्या की वो उसका इमान हो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
अपनों में बटि बिना छत का मकान हो गई
जब तक म्यान में रही सबकी शान हो गई
म्यान से बाहर क्या आई सबकी आंन खो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
जिसके मन की करी उसकी होकर रह गई
सब की खातिर एक को छोड़ा बेवफा हो गई
एक की खातिर सबको क्या छोड़ा वो समाज पर बदनुमा दाग हो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
चुल्हे की रोशनी में शमशान हो गई
उसके मान पर आए तो महाभारत रच गई
बन के बैरागी इस दुनिया से तर गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई......॥
Saturday, August 8, 2020
जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभव हम और आप - 2
1.
"अ खुदा तू इतना रहम हमपर बरपा
2.
"जानि ये कैसी महफिल सजाई है
यहाँ खाक में लिपटी हुई तन्हाई है
हम प्यार की सौगात लेके आए हैं
यहाँ हर हाथ में खंजर और आँखों में बारूद लिए पाए हैं।"
3.
"की मेरे हर सवाल का जवाब तू है
फिर तेरे माथे पर ये सिकन क्यों है
हम तुम्हें देखकर मुसकुराते है
फिर हमें छूने से तेरे हाथ कांपते क्यों हैं।"
4.
"जानि कुछ तो लिहाज किया होता
जब बात पर्दे की थी तो पर्दा किया होता
हमें किसी और का एक नज़र देखना भी गवारा नहीं
भरी महफिल में यूं अपना तमाशा ना बनाया होता।"
5.
" मेरा कोई दोष ना था
तुम्हें ही होश ना था
हम तो रोज तेरे दरवाजे पर आया करते थे
उसे बंद देख वापस लौट जाया करते थे।"
6.
" की वो किसी की याद में इस कदर खोए हैं
कोई बताए उन्हें की सुबह हो गई है
हम तो उन्हें समझा-समझा कर थक गए है
वो रोशनी चांद की है तेरी शमा तो कब का बुझ गई है।"
7.
" जानि इतना तो होश बचाकर रखो
वो सामने आ जाए उसे पहचान सको
ये तेरी उंगलियां हैं जो अपना कर्ज़ अदा कर रही हैं
वरना तेरी स्याही तो कब का खत्म हो गई है।"
8.
ये खुदा की ख़ुदाई है जो हम पर ये रहमत बरसाइ है
तुम याद थे बस याद थे
माफ करना वैद जी ने हमारी यादाश्त कमजोर बताइ है
हम तुम्हें भूल गए बस अब हमें याद नहीं।
Bharti
Thursday, August 6, 2020
अपना - अपना नजरिया
कितना आसान है ना किसी के अस्तित्व पर सवाल करना।
पर उतना ही मुस्किल है उसके अस्तित्व के लिए सारी दुनिया से लड़ जाना।
कितना आसान है ना किसी की जिंदगी में झांक आना।
पर उतना ही मुस्किल है उसकी रूह में उत्तर कर उसके अंदर झांक पाना।
कितना आसान है ना किनारे पर बैठ कर लहरों को देखना।
पर उतना ही मुस्किल है उनमे उठे जज्बातों के तुफान को देख पाना।
कितना आसान है ना एक माला से मनको को अलग कर देना।
पर उतना ही मुस्किल है चुन-चुन के हर मनके को एक माला में पिरोना।
कितना आसान है ना किसी पर अपना अधिकार जमाना।
पर उतना ही मुस्किल है स्वयं को उसके अधीन करके जिंदगी को जी पाना।
Bharti
Tuesday, July 28, 2020
जिंदगी के खट्टे मिठे अनुभव हम और आप .1
1. "हमें अपनी तन्हाई कुछ इस कदर प्यारी है।
तेरे साथ होने का अहसास ही भीड़ पर भारी है।
कुछ इस कदर चाहत हमको तुम्हारी है।
लव्ज़ मौन रहते हैं बस धड़कनों में बातें जारी हैं॥"
3.
"तेरी बातों में कुछ इस कदर खो गए,
हम तेरे हो गए हमें पता तक ना चला।
हम कतरा-कतरा पिंघल गए,
तुमनें हमें कब समेटा हमें पता तक ना चला।
तुम नशे सा छा गए,
हम कब मदहोश हो गए हमें पता तक ना चला
बहुत दूरियां रही हमारे दरमियाँ कब सांसों का फासला मिट गया हमें पता तक ना चला॥"
Monday, July 27, 2020
हिंदी शायरी
"कितना कमा लेती हो जो इतना तनकर चलती है
अजि लॉकडाउन है सरकार हमारी कहाँ चलती है
फेस पे समाइल पैदाइश रहती है
हमने तो बस अपनी जरूरतें कम कर रखी हैं।"
3.
"बहुत सी दरारें नज़र आ रही हैं।
तेरे दिल के आईने में सपने हज़ार नज़र आ रहे हैं।
तू कहता था मुझे तन्हाई पसंद रही है
तेरे पास आकर देखा जनाब,
तेरा दिल हमसफ़र की तलाश कर रहा है॥"
4.
"अपने दिल की धड़कन को धडकने पर यूं मजबूर ना कर
ये जीन्दगी तुम्हें मिली है इस पर गुरूर कर
जो लोग कहतें हैं मेरे लिए घरबार छोड़ दे उन सब को साइड कर।
तू जैसा है जो भी है जो लोग तुम्हें चाहें बस उनको प्यार कर॥"
Friday, July 24, 2020
जर्रा-जर्र खिल गया तू सावन के जैसे बरसा है
अभी सुलाया है थपथपा के उन अरमानों को ना जगाना
झड़ जाएगी वो भी जो कोपल फूटी हैं अभी-अभी
कोमल कदम संभाल के सूख के कांटे बिखर गए
समय लगेगा मैं अभी लगी हूँ आंगन मेरा संवारने
सुना है, आता है तुम्हें चेहरा पढ़ना पर्दा ना हटाइये
तुम जैसे हो जो भी हो हम तुम्हें आहट से पहचान गए
ये साजिशों में रचि दौड़ धूप पागल हमें बन देगी
तू आगे-आगे चल मैं तेरे कदमों के निशां पे चल दूंगीं
फिर से महका मेरा आशियां तू इत्र के जैसे बिखरा है
जर्रा-जर्रा खिल गया है तू सावन के जैसे बरसा है
Bharti
हिंदी शायरी
3.
"किसी का हो जाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसको अपना बना लेना।
किसी को पलकों में बसाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसकी पलकों में बस जाना।
बहुत आसान है जनाब किसी के लिए मर मिटाना।
बस मुस्किल है,
उसके बिना जीना॥"
Monday, July 20, 2020
चलो इस बार स्वंय के लिए जीते हैं
Sunday, July 12, 2020
बराबरी की बातें
एक बार तू अपना उसे कहके तो देख ले।
जमाने भर से लड़ जाएगा तू दिल लगाकर देख ले।
उसे यूं आजमाना और मझधार में छोड़ना बंद कर दे।
बेवफाई का इलज़ाम एक तरफा लगाएँ ये सही नहीं ।
तू अपने तराजू का माप एक बार चैक करवाके देख ले।।
ये दिल बहुत दुखता है उसका उसे मिट्टी का खिलौना समझना बंद कर दे।
वो अपने आप चला जाएगा तेरी राहों से तू उसे पलटकर देखना बंद कर दे।
आईने समान दिल के टूकड़े हजार करके उसे जख्मी छोड़ देना अब बंद कर दे।
टूटे हुए आईने को अब यूं घिस-घिस कर साफ करना बंद कर दे।
बहुत मजबूत होता है मगर मजबूर होता है।
ये दो पहियों की गाड़ी है साथ चलने में मगरूर होता है।
आकर एक पल पास बैठ जाया कर क्या पता उस विधाता को क्या मंजूर होता है।
यूं तो कटने को कट जाएगी जिंदगी क्या कभी ख्वाहिशों का समुंद्र भी खत्म होता है।
Bharti
Wednesday, July 8, 2020
मेरे अलफाज कहते हैं,मेरे जज्बात को समझो
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
बहुत मुस्किल है जानेजां ..इस दिल को समझाना
कभी खेली मैं आंचल में, कभी झूली थी बाहों में
वो दूनिया ही निराली थी, जहां मेरी मनमानी थी।
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
क्या ये हो रहा है अब ,क्यों वो हो रहा था तब
कहीं चटका कोई मनका, कहीं टूटा कोई तारा
ना कोई अब तमन्ना है, ना कोई तब शिकायत थी
वो तेरा प्यार अंधा था, कुछ मेरी खता भी थी
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
जिसे मांना खुदा अपना, वो धरती पर है आ उतरा
जुदा हम तुमसे होके हो.. ,जोगी बन गए यारा
बहुत कुछ सह लिया तुमनें, बहुत कुछ कह लिया उसनें
तुम्हें मैं क्या ये समझादूँ , तुम्हें मैं क्या ये बतलादूँ
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
चले आना- चले आना जमाना छोड़ दे तुमकों
महोब्बत की थी हमने तो, अब उसको निभाना है
चलीं आऊंगी बंधन तोड़- चोला छोड़ के यारा
ये जीवन अब तुम्हारा है, ये जीवन कल तुम्हारा था
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
बड़ा रंगीन मोसम है, बड़ा दिलकश नजारा है
जमाना बीत गया यारा, आज तुमनें पुकारा है
तू कैसी है, तू खुश तो है , की मेरा हाल पूछा है
तुम खुश तो हो मेरी बाहों में आके ओ मेरी जाना
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
बिना सावन ही साजन के आज ये नैन बरसे हैं
बहोत जोरों से तोड़ा दिल, की धड़कन रो रही अब तक
जमाना कुछ समझता है, ये जीवन की कहानी है
मेरे लिखने पे मत जाना, ये हर दिल की कहानी है
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
किसी ने तोड़ दिया ये दिल, तो कोई जोड़ लेता है
तेरी मुस्कान कहती है, तू कितना पीर सहता है
कहानी वो ना झूठी थी, कहानी ये ना झूठी है
ये तो उस रब की माया है, जो ऐसा खेल रचता है
मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।
Bharti
Wednesday, June 17, 2020
Sunday, May 17, 2020
कभी मुझसे भी तो पूछो क्या है आप
इतना ना मुस्कुुुराया किजिए
जख्म दिखने लगेंगे कुुछ तो किजिए
क्या हैं आप कभी मुझसे भी तो पूछिए
आप कभी अलफाजों में भी तो समाया किजिए
कभी मुझसे भी पूछो जनाब लाजवाब हैं आप
मेरी उन जागि-जागि रातों का खवाब हैं आप
आसमां के घने बादलों सेे सटा चांंद हैं आप
प्यासी पड़ी जमीन की रिमझिम सी बरसात हैं आप
तेरी सोहबत ने क्या से क्या कर डाला
बहुत लड़ती थी इस जमाने से तुुने मौन कर डाला
अक्सर बेनाम सेे चेहरे डोल जाया करते थे मेरे मन आंंगन में
क्या था वो क्यों था वो समय निकल गया सोचने में
मैं नहीं मानतीं थी, दिल होता है
तेरी आहट क्या मिली कमबख़्त बेचैन हो उठता है
अब तो सोते जागते तेरी माला सी रटता है
क्या करें तेरी आँँखों में नशा ही ऐसा होता है
आजाद सी झूूम उठती थी बेेेपरवाह उन अनजान गाँव में
तू परछाई बनकर जब से साथ चलने लगा मेरी राहों में
बहुत से आए गए कहते रहे कांटे बहुत हैं तेरी राहों में
ऐसे तुम थे जो ठहरे रहे मेरी बाहों में
तू मेरा वो खवाब है जिसे मैंने सोते जागते देखा है
तुमनें भी तो मेरी दुखती रग को छूआ है
तेरे आगे में हार जाऊँ ऐसा कभी ना हुआ है
तू जीता है इसमें थोडा बहोत खुदा भी तो शामिल हुआ है
लोग कहते हैं मेरे बारे में ये मुस्कराती बहुत है
मेरे माँ बाप इसे देेेेखकर ही तो जिंंदा हैं
ये भी सच है मुुस्कान पे हर गम फिदा है
असल में ये ही तो जिंदगी को जीने की अदा है
जब तू आया था मेरे कांंधे पर हाथ रख फरमाया था
अनमोल है मेरी मुसकान तुने तो मेरे गमों का मोल लगाया था
बहुत मुसकुराती हूं वो लोग कहते थे
तूने कैैसे जान लिया वो मुस्कान झूठी थी
मतवाली, मस्तमौला, जिंदा-दिल कई नाम थे मेरे
तू मिला क्या मिला जो मिला बस छूट गया मेरा
बहुत बहादुर थी डर क्या है इससे अनजान थी
तू मिला अब डर है मुझे खो न जाऊँ इस भीड़ में तुम्हें
Bharti
Friday, May 15, 2020
ना जाने क्यों हमसाये सा नजर आया
मैैंने कहा ला देेेख लूूँ दिखा ज़रा जख्म तेेरेे
हसकर उसने जवाब दिया हैं हाथ नमकीन तेरेे।
उसकी नज़र कहर सा ढा गई
सदीयों से दबी पीर उसकी सिसकियाँ बोल गई
मैैं तो हलके से उसके मन को टटोलने चलि गई
वो तो दिल की गहराई में उतरते चला गया
दसकों सेे दबे राज दिल के खोलता चला गया
परछाई बनकर उसका पीछा करना चाहा
वो कमबख्त परछाई को ही तोड़ता चला गया
ना जाने क्यों हमसाये सा नज़र आया
वो तो अपनो से मिले जख्म से जख्मी पाया
सहमा सा पथ निहारता पथियार की पाया
उस मोड़ पर भी वो विशवास से चूर पाया
मै उसमें मेरे कान्हा की छवि को देेेेखती
ना मुझमें मीरा सी भक्ति, ना राधा सी शक्ति
मैं कलयुग की नारी बस तुझसे सच्ची भक्ति
बनकर रुकमणी ले जाऊँ पीर के भवर से कहीं दूर तुझको
जब छूकर देखा घाव उसके नासूर सा नज़र आए
बस विशवास पर विशवास था दवा ना साथ लाए
हाँ कुछ-कुछ परिचित थी मैं वो निशां जाने पहचाने नजर आए
याद आया ये तो गिरकर संभलने से पाए
वो आंखों में विशवास लिए हाथ बढ़ाते चला गया
लड़खड़ाये कदम उसके पर आगे बढ़ता चला गया
उसका मेेरी ओर बढ़ता हर कदम मुझे आजमाता चला गया
संघर्षों का आदि वो बतलाता चला गया
उसने कसकर पकड़ा हाथ मेरा कभी ना छोड़ने के लिए
मैंने आत्मसमर्पण किया अब जीना है तेेरे लिए
बस मुझको मुझसे शर्मसार ना करना ये अरदास लिये
तू पहरेदार बन मेरी आबरू का ये विशवास लिए
विशवास की लौ लिए हर बाधा पार कर जाएंगें
उस कर्ता ने चाहा तो कर्म रंग लाएगा सफलता झूम जाएगी
तेरे रंंग में रंगकर नमक और मिठास का भेद भूल जाएगें
अब मंजिल दूर नहीं हर धर्म को अपनाएंगे
Bharti
Monday, February 3, 2020
The Alchemist ---- Ben Jonson
Drama
The Alchemist ---Ben Jonson
About Writer--
Benjamin Jonson, for other people with the same name ,see Ben Jonson .
Ben Jonson was an English playwright and poet, whose artistry exerte a lasting impact upon English poetry and stage comedy.
He popularised the comedy of humorous.
He is best know for the satirical play " Every Man In His Humour (1598).
Born - 11 June 1572 Westminster, London England.
Died -6 August 1637 (aged 65) London England.
17 th century poet.
The Alchemist -
Introduction-
The Alchemist 1610
The Alchemist as a satirical comedy.
The Alchemist is a comedy by English playwright Ben Jonson. First performed in 1610 by King's men is a generally considered Jonson's best and most characteristic comedy.
Main Characters-
Love bit-The master of the house
Face - Jeremy servant of Love bit
Subtle - Jeremy's friend & he discussed himself as a doctor expert in alchemist power.
5 clients ----
1. Dapper - He is a legal Clark and a climber who comes to the commen in order to get a "gambling fly " .He is a extremely greedy.
2 Drugger - An honest, good soul. He is a young tobacconist who has just bought a new shop on the corner of a street. He wants the Doctor ( having met face in a pub ) to advise him on (effectively) the feng shui of the building.At the end of the play he loses everything and is dispatched with a punch from lovewit
Dmply( Dame Pliant) - often called widow in the play.Sha is sister of Kastrill.
Sr Epicure Mamman- epicure mammon name means person who is devoted to sensory enjoyment and material wealth and he is perhaps the play's biggest con.
Surly- He is the close friend of Mamman . In the end he is attacked by kastrill and loses the girl.
Anamiush - He is anapactist . He is poor greedy for power.
Kastrill - An "Angry boy" he wants to learn the skill of quarrelling formal.
Theme- Dreams, Love, selfishness.
- The plague
- Arrival of the clients
- Fraudulent practices
- Realism and satire
- Love bit return.
लंदन में पलेग फैलाने के कारण वहाँ के सभी धनी लोग कुछ समय के लिए अपने घर को छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे। इस तरह लवबिट भी कुछ समय के लिए दूसरी जगह चला गया था। तथा अपने घर को अपने नौकर के भरोसे पर छोड़कर गया था।
लेकिन उसके नौकर फेस ने अपना नाम बदलकर जैरमि रख लिया।और अपने दोस्त तथा एक विधवा के साथ मिलकर लोगों को ठगने का व्यापार चलाया। ये सब मिलकर लोगों को भविष्यवाणी तथा पारसपत्थर के बारे में बताते थे
ये सब मैटल्स को गोल्ड में बदलने की बात करते थे।इसके दो दोस्त उसकी मदद करते हैं। फैस( जैरमि) कलाईंटो को लेकर आने का काम करता है तथा उसका दोस्त सबटल स्वयं को उनका हैड बताता है।वह सभी को उनकी परेशानियों के हल बताता है।
इनके पास पहला कलाईंट डरैपर आता है ।वह एक कलर्क होता है। तथा एक आत्मा मागता है जो उसको जूए में जिता सके । ये लोग उसके पास से पैसे लेकर उसे कुछ हवन वगैरा करने के लिए भेज देतें हैं।
दूसरा कलाईंट Drugger आता है जो एक टोबैकोनिस्ट है । वह अपनी दुकान के लिए यह जानकारी लेने आया था की वास्तु के हिसाब से किस दिसा में उसका मुख हो। ये लोग इससे भी पैसे लेकर वापस भेज देते हैं।
इसके बाद मैमन अपने दोस्त सरलि के साथ आता है। मैमन बहुत ही लालची होता है तथा पारसपत्थर लेने के लिए आता है। ये उसका सामान रख लेते है और डॉल को इसके साथ भेज देते है। सरलि को पारसपत्थर जैसी चीज पर भरोसा नहीं है वह तो इन सभी के झूठ पर से पर्दा हटाने आया था।
Drugger आकर बताता है की एक जवान विधवा Dmply अपने भाई Kastrill के साथ यहाँ सादी के सिलसिले मेंआती है।Drugger दोनों भाई बहन को उनके पास ले जाता है।
तब सरलि अनामियूस के भेस में आता है तो ये ठग Dmply को इसके साथ भेज देते हैं। तब सरलि उसे अपनी असली पहचान बताता है। तब सब के सामने उनकी असलियत आ जाती है।
इतने में डॉल सबको बताती है घर का मालिक लवबिट लौट आया है। डॉल ,सबटल भाग जाते हैं। जैरमि फिर से फैस बन जाता है। लवबिट की सादी Dmply से हो जाती है।
In English
Sunday, January 19, 2020
Julius Caeser written by William Shakespeare (In Hindi)
Drama
About write - William Shakespeare was an English poet , playwright and actor widely regarded as the gratest writer in the English language.
He ia world's gratest dramatist.
He is often called England's national poet and the "Bard of avon".
His extant works including collaboration.
Born- 26 April 1564
Died -23 April 1616
Resting place- church of the Holy Trinity, Stratford-upon-Avon
Works - 39plays, 154 sonnets and two long narrative poems.
Julius Caesar
Julius Caesar
Published- 1623
Tragic Drama
First performance- 21 September 1599
Introduction-
1. Julius Caesar written by William Shakespeare set in Rom in 44 B.C.
2. The central psychological drama of the play focaus on Brutus's struggle between the conflicting demand of honour patriotism and friendship.
3. The tragedy of Julius Caesar first folio.
4 . There has been a lot of controversy man over the problem of hero of Julius Ceasar.
5. Julius Caesar is the first hero and Brutus is the second hero.
Mane characters
Julius Ceasar ,wife calpurnia
His adopted son -Octavius Caesar
Brutus, wife portia
Mark Antony
( conspirators against caesar)-8
Macus Brutus
Cassius
Casca
About topic-
- Julius ceasar comes defeating the sons of Pompey the battle.
- Conspirators plan to assassinate him
- In the fastival of lupercal ,Caesar reject the crown thrice.
- Sooth sager beware of the idea of March.
- Engage Brutus inhis conspiracy by scheming actions.
- Plan to join Brutus in the cinspitatn team for credibility and safety.
- Plan to go to capital.
- Caesar is stabbed by the conspirater at the capital
- Mark Anthony's emotional speech.
- The crowd goes will attack conspirators
- Battle of philippy.
In Hindi
In English
Bharti
Saturday, January 18, 2020
तन्हा (मेरा एक रंग में लिपटना)
Friday, January 17, 2020
Doctor faustus written by Christopher Marlowe
Drama
In hindi
Doctor Faustus
यह एक बहुत बड़े विदवान कि कहानी है । जिसका नाम डॉ फॉस्टस होता है । इसने बहुत सी किताबें पढ़ी और अपनी नौलिज को बढाया। जब उसे यह महसूस हूआ की अब मुुझे अपने ज्ञान को और भी बढाना चाहिए , तब उसने काला जादू सिखाने का मन बनाया। उसने अपने नौकर वैैैगनर को अपने पास बुलाया और कहा की वह अपने दोस्तों से मिलना चाहता है । वैगनर ने उसके दो दोस्तों को बुलाया - वैल्डस और कोर्नेेलियस । डॉ फॉस्टस ने उनसे काला जादू सिखाने की इच्छा जताई ।तब उसके दोनों दोस्तों नेे उन्हें काला जादू सिखाने केे लिए किताबें दी ।
इस बीच दो एंजेल्स की एंट्री होती है।
गुड एंजेल और बैड एंजल दोनों अपनी राय फॉस्टस को देेेती हैं।
गुड एंजल - काला जादू को छोड़ दो और ईशवर की राह पर चलो ।
बैड एंजल - नहीं तुम काला जादू पढो
डॉक्टर फॉस्टस ने काला जादू का रास्ता अपनाया और बुुुक्स पढता रहा।
वैल्डस और कोर्नेलियस दोनों एक बार फिर से फॉस्टस के पास आते हैं और डैैविल को बुलवानें कि बात करते हैं। कुछ समय पस्चात् दोनों वहां से चले जाते हैं।
डॉ फॉस्टस अपने काला जादू की मदद से लूसिफर के भूत मिफिस्टोफीलिस को बुलाता है,और उसके मालिक वैगनर से मिलने की बात करता है। डॉ फॉस्टस उसके सामने एक पर्पोजल रखता है की वह उसका नौकर बन जाए । मिफिस्टो यह सब वैगनर को बताता है तब वैगनर उसे फॉस्टस के पास एक डील करने के लिए भेेजा।
इस पर्पोजल में-----24 वर्ष तक फॉस्टस जो चाहे वो कर सकता है मिफिस्टोफीलिस उनको गुलाम के रुप में मिलेगा और बदले में 24 वर्षों बाद अपनी आत्मा वैगनर (डैैैैविल)को देनी होगी ।वह इस बीच कभी भी ईश्वर को याद तथा पूूूजा नहीं कर सकता अगर वह ऐसा करेेगा तो 24 वर्षो से पहले ही उसे अपनी जिंदगी सेेेे हाथ धौना पड़ेगा
फॉस्टस यह डील मंजूर करता है और उस अगरीमन्ट के उपर अपने खून से हस्ताक्षर करता है।
24 वर्षों तक जादू करता है। अपने जादू से लोगों को परेशान करता है। मिफिस्टो उसे सारी दूनिया की सैर कराता है।
वह अपने जादू की मदद से किसी के सीर पर सींग उगा देेेता है ।
घोड़े के ऊपर आदमी को बैठा कर उसे पानीके ऊपर चलवाता है और नीचे से घोड़े को गायब कर देता है।
बिना मौसम के फल पेश करता है।
धीरे-धीरे समय बीतता चला गया फॉस्टस दूनिया घूमते-घूमते थक गया अब वह मिफिस्टो से शादी कराने को कहता है। किंतु मिफिस्टो उसे इंंकार कर देता है । क्योंकि शादी एक पवित्र सेरेमनी है ।
फिर वह सोचता है कहीं वह गलत तो नहीं कर रहा है । क्या उसे ईश्वर से माफी मांग लेेेनी चाहिए।
तभी मिफिस्टो उसे चेतावनी देता है अगर उसनें ईश्वर को याद किया तो वह उसकी शोल को ले जाएगा ।
अब उसका टाईम पूरा होने को है तब वह अपनी काला जादू की किताबों को जला देता है। ताकि कोई और ईंसान अपनी जिंदगी बरबाद न कर सके।
अब उसका टाईम पूरा हो जाता है डैविल आता है डॉ फॉस्टस की आत्मा को ले जाता है।
इस प्रकार यह एक दूखांत है।
Bharti
































