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Tuesday, December 15, 2020

सच्चा दोस्त

 

जिंदगी में क्या जरूरी है--

अक्सर इसी सवाल की तलाश में हम निकल खड़े होते हैं। और अपने आसपास के माहौल में खुद को उस पर रखते हैं। अक्सर अनसुलझे सवाल मेरे जेहन में घूमते रहते हैं। जिंदगी में क्या जरूरी है--कहने को कितना आसान और कितना छोटा सा सवाल है पर इसकी तलाश में पूरी जिंदगी निकल जाती है क्या जरूरी है जिंदगी में -----

वैसे क्या जरूरी है जो हमें प्यार करते हैं
या जिन्हें हम प्यार करते हैं

मेरे लिए इन दोनों में से किसी एक को चुनना नामुमकिन सा लगता है। क्योंकि हमारी जिंदगी अकेले हमारी नहीं होती जिंदगी में अपना वजूद और अपनों का साथ बहुत मायने रखता है। जो हमें प्यार करते हैं वह हमारी हर छोटी बड़ी ख्वाहिशों का ख्याल रखते हैं। और जिन्हें हम प्यार करते हैं उनकी हर पसंद नापसंद का खयाल हम रखते हैं। जो हमें प्यार करते हैं वह हमें किसी भी तकलीफ में नहीं देख सकते वह हमारे लिए खुद को मिटा बैठते हैं। हम जितनी ऊंचाई पर हैं वह एक सीडी की तरह हमें उस ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करते हैं।
और जिन्हें हम प्यार करते हैं उन्हें ऊंचाई पर पहुंचाने में हम खुद को भूल जाते हैं। हमें कोई अंदेशा नहीं होता भविष्य में हमारे साथ क्या होगा। बस खुद को भुलाकर हम अपनों की खुशी में मस्त रहते हैं।

लेकिन मेरे इस सवाल का जवाब मुझे नहीं मिला है कि जिंदगी में क्या जरूरी है जो हमें प्यार करते हैं या जिन्हें हम प्यार करते हैं?


सच्चा दोस्त---

कहते हैं प्यार में इंसान सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने प्रेमी के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता वह जो कुछ भी कहे वही सही नजर आता है। उसे जिंदगी की सच्चाई नजर नहीं आती ईश्वर ने क्या हमें यह जिंदगी यूं ही दबाने के लिए दी है या कुछ करने के लिए। क्योंकि जो इंसान किसी एक इंसान के लिए खुद को भुला सकता है। असल में वह इंसान अगर चाहे तो जिंदगी में एक अनछुआ मुकाम हासिल कर सकता है।

दोस्त यह महज़ एक शब्द ही नहीं है। यह एक इंसान की दुनिया होता है चाहे वह हमें जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर मिले लेकिन एक सच्चा दोस्त जिंदगी को सवार देता है। सच्चा दोस्त हमें संभालता है चाहे वक्त बुरा हो या अच्छा वह हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता। हम भले ही उससे रोज बातें ना करते हो लेकिन हमारे बात करने के लहजे या यूं कहें हमारे पहले अल्फाज से वह हमारे दिल का हाल समझ लेते हैं। हमें उन्हें अपनी मजबूरी बताने की जरूरत नहीं होती खुद को समझाने की जरूरत नहीं होती वह बिना कहे सब समझ जाते हैं वह हमारे संपूर्ण दुनिया होते हैं। अगर माता-पिता के बाद कोई हमें समझ पाता है तो वह हमारा दोस्त होता है। दोस्त को हमारी कमजोरी और हमारी ताकत अच्छे से पता होती है अगर वह चाहे तो हमें पल में मिटा सकता है और वह चाहे तो हमें चांद पर बैठा सकते हैं। जिंदगी में हम अपने बचपन में अपने मां बाप के सामने बहुत रोते हैं कभी वह रोना असल में होता है कभी अपनी जिद्द मनवाने के लिए अब नाटक करते हैं। लेकिन जब हम अपना होश संभालते हैं और उस वक्त हमारी आंखों में नमी आती है वह सिर्फ एक सच्चे दोस्त के सामने ही अति आती है। हमारी होश संभालने के बाद हम अपने मां बाप के परिवार के सामने रो नहीं पाते लेकिन जिंदगी में अगर सच्चा दोस्त हो तो अपने अंदर की घुटन को मिटाने के लिए दोस्त कंधा बहुत याद आता है।  अक्सर देखा है मैंने सच्चा प्यार ना मिलने पर बहुत जल्द ब्रेकअप हो जाते हैं कितनी अजीब बात है ना दोस्ती में कभी ब्रेकअप नहीं आते दोस्ती में बस दोस्ती होती है।

 मुझे भी मेरी जिंदगी में एक नहीं दो दोस्त मिले हैं पहली मेरी सच्ची दोस्त मुझे मेरी मां के रूप में मिली है बचपन से लेकर आज तक मुझे अच्छी बुरी हर चीज की समझ दी है।
और दूसरी सच्ची दोस्त मुझे मेरे कॉलेज में मिले हैं जिन्होंने मुझे बहुत कुछ सीखा है और समझाया है। मैं यह नहीं कहते कि वह मेरे अच्छे बुरे में मेरा साथ देते हैं। लेकिन हां जहां भी उन्हें यह लगता है मैं गलत हूं वहां मुझे रोक देते हैं और जो उन्हें सही लगता है वह मुझे बताते हैं। उसकी यही बात मुझसे बाकी सब से अलग बनाती हैं। इसीलिए वह मेरी सच्चे दोस्त हैं।

Thank you Seema
And thank you mummy.

मेरी जिंदगी में आना और उसे इतना प्यारा बनाने के लिए।

Sunday, November 29, 2020

जिंदगी के खट्टे-मीठे लम्हे हम और आप -3

 1 .


1.



"ये जिंदगी है बाबूजी यहां वक्त भी मिलता है अपने हिसाब से।
क्या पता ये वक़्त कब लपेट ले हमें तो आओ समेट ले जो मिलता है करीब से।
अपनी जरूरतें पूरी कर लें बस मिलता है वक्त नसीब से।
अब कौन हिसाब रखे नाराजगियों का तो पास रखो जो मिलता है तहज़ीब से।"


2.



  "यूं  तो खेल-खेल में बहुत से किस्से जोड़ें हैं।
बेमतलब के रिश्तों को भी हक से जोड़ें हैं।
क्या जाता है कहने में अरमान हमने दिल से जोड़ें हैं।
कोई टूट गया तो क्या हुआ ख्वाबो को पंख लगा आसमान में छोड़े है।"



3. 

"अपना अपना का राग अलापा करते हो
वक़्त की दरकार में सरकार बदला करते हो
जब समय मिले तो क्यों न खुद में झांका करते हो
तोड़ कर जज़्बात अपने दोष हम पर क्यों लगाया करते हो।"



4. 
 " वो अक्सर पूछा करते हैं
अब तक आया नहीं कोई रंग पहचान में तेरे।
अब कौन उन्हें बताएं कि जिंदगी ने इतने रंग दिखाएं हैं मेरे।
हर रंग में मिले उस रंग को जो रंगता है उसे भी हम पहचानते।
अब किसी एक से शिकवा करना अच्छा नहीं हमें तो हर-एक रंग पहचानते।"



5.


"हर वक़्त डसता है तेरा मौन रहना।
कितना कुछ दबा कर बैठोगे अब रहने दो ना।
हम जिंदा है तेरी बातों का सार सुनकर।
कितना इंतजार करना होगा बस इतना सा बता दो ना।"



6.


"बहुत खलता है तेरा बिना कुछ कहे मेरी जिंदगी से चले जाना।
आदत हो गई है तेरी सहन नहीं होता अब लौट आओ ना।
जानती हूं आप भी नहीं रह पाएंगे तो बेवजह सही नहीं रूठ जाना।
आता नहीं है हमें यूं मनाना कम से कम इतना तो बता जाते कहां तक है हमें साथ जाना।


Wednesday, November 25, 2020

मीराबाई जी

 मीराबाई जी का जीवन चरित्र----

परम भक्त मीराबाई के अनूठे प्रेम और निराली भक्ति की क्या महिमा कही जाए कि जिसका अब तक हिंदुस्तान भर में दृष्टांत किया जाता है। मीरा का जन्म c 1498 को जोधपुर के मेरता (राठौर रतनसिंह जी )की इकलौती बेटी और मेरता(मारवाड़ देश) के राव दूदा जी की पोती थी।इनका जन्म कुड़की नामक गांव में जो उन गांव में से है(जो कि उनके पिता को गुजारे के लिए दूदा जी से मिले थे) 

और उदयपुर मेवाड़ के ससोदिया राजकुल में महाराणा सांगाजी के कुंवर (भोजराज) के साथ ब्याही गई। मीराबाई जी के विवाह होने के 10 वर्ष पश्चात ही उनके पति का देहांत हो गया था। इसके पश्चात मीराबाई जी ने अपने आपको ईश्वर की भक्ति में लगा दिया। वह बैरागी बनकर कृष्ण की भक्ति में लीन हो गई।यह बात मीराबाई जी के ससुराल पक्ष वह मायके पक्ष को मंजूर नहीं थी।वह सब उन्हें ईश्वर भक्ति से दूर रखने की भरपूर कोशिश में लगे रहे।किंतु मीरा जी को ईश्वर की भक्ति कुछ ऐसी रास आई कि वह जन्म जन्मांतर पार उतर गई।

मीराबाई जी के गुरु रविदास (रैदास)-

कहने को मीराबाई जी श्री कृष्ण की भक्त मानी जाती है। किंतु उसे यह मार्गदर्शन करने वाले कोई और नहीं बल्कि गुरु रविदास जी थे। गुरु रविदास जी का वर्णन मीराबाई जी के बहुत से पदों में मिलता है। जब मीराबाई जी का जन्म हुआ उस समय पर समाज में जातिवाद छुआछूत का बहुत प्रभाव था। समाज में चारों ओर छुआछूत का बोलबाला था। और यही कारण रहा है कि मीराबाई जी के गुरु रविदास जी जो एक निम्न कुल से संबंध रखते थे। जबकि मीराबाई थी एक राजकुल परिवार की बेटी और बहु मानी जाती हैं। 

जब मीरा बाई जी के पति का स्वर्गवास हो गया था तब हिंदू परंपराओं के अनुसार मीराबाई जी को गंगा स्नान के लिए काशी ले जाया गया था। वहां पर जाकर मीराबाई जी ने देखा की एक निम्न कुल से संबंध रखने वाले महान पुरुष गुरु रविदास ने मात्र मिट्टी की मूर्तियों को बैठे-बिठाए अपनी ईश्वर भक्ति के चमत्कार से गंगा के इस पार से दूसरे पार तेरा दिया। तब मीराबई जी को उस महान आदमी से मिलने तथा अपना गुरु बनाने का निर्णय लिया। काशी मैं जाकर मीरा जी ने गुरु रविदास को अपना गुरु बनाया तथा गुरु रविदास जी ने मीरा बई जी को ईश्वर की भक्ति करने का मार्गदर्शन दिया। जिसका वर्णन मीराबाई जी ने अपने पदों में कुछ इस प्रकार किया है----

"मीरा मनमानी सूरत सैल आसमानी। 

जब जब सूरत लगे वह घर की, पल-पल नैनन पानी। 

ज्यों हिये पीत तीर सम सालत , कसक कसक कसकानी। 

रात दिवस मोहि नींद ना आवत, भावे अन्ना पानी।  

ऐसी पीर बिरह तन भीतर, जागत रैन बिहानी। 

ऐसा भेद मिले कोई भेदी,देस बिदेस पिछानी। 

तासों पीर कहूं तन केरी, फिर नहिं भरमों खानी।

 खोजत फिल्मों भेद वा घर को,  कोई न करत बखानी। रै

संत मिले मोंहि सतगुरु, दीन्हा सुरत सहदानी। 

मैं मिली जाय पार पिय अपना, तब मोरी पीर बुझानी।

 मीरा खाक खलक सिर डारी, मैं अपना घर जानी।।"


मीराबाई जी की कृष्ण भक्ति--

बचपन से ही मीराबाई को परमार्थ का जाओ और गिरधारी लाल जी का इष्ट था। ऐसा माना जाता है कि जब मीराबई जी बहुत छोटी थी तब उनके पड़ोस में एक लड़की का विवाह हो रहा था यह सब देखकर मीराबाई जी ने अपनी मां से पूछा था कि मेरा पति कौन है।तब उनकी माताजी ने हंसकर गिरधरलाल की मूर्ति को उनका पति बतलाया था।

और एक कथा के अनुसार मीराबई जी पिछले जन्म में श्री कृष्ण की सखियों में थी। जिनकी प्रचंड भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान दिया था कि कलयुग में हम निज रूप से तुम्हारे पति होंगे।

जब मीरा जी विधवा हो गई और साधु का भेष बनाकर ईश्वर की भक्ति में लीन रहने लगी तब उनके देवर महाराणा विक्रमजीत जो(अपने भाई महाराणा रतन सिंह के बाद चित्तौड़ की गद्दी पर बैठे थे) उनके यहां साधुओं की भीड़ का लगा रहना नहीं भाया। उन्होंने दो भरोसेमंद दासिया चंपा और चमेली को मीरा का पहरेदार बनाया। मीर की संगत में रहकर चंपा और चमेली के ऊपर भी ईश्वर की भक्ति का रंग चढ़ गया। मीरा के साथ-साथ चंपा और चमेली भी रैदास की शिष्य बनीं।

अब तंग आकर उन्होंने यह काम अपनी बहन ऊदा बाई जो(मीरा की ननंद को)सौंप दिया। अंत में जब उदा बाई थी मेरा को समझाने में असफल रहे तभी राणा ने एक मंत्री की सलाह लेकर मीरा को विष का प्याला भेजा। ऊदा भाई जी जो इस भेद को जानती थी उन्होंने मीरा को आगाह किया लेकिन मीरा ने उस विष के प्याले को पी लिया। ईश्वर की भक्ति के कारण और ईश्वर पर अपने विश्वास के कारण मीराबाई ने वह विष का प्याला पी लिया और मीराबाई जी का उस विष का कोई प्रभाव न पड़ा। मीरा जी वो हस्ती हुई है जिन्हें बयान करते हुए शब्द भी कम पड़ेंगे।

जन्म मृत्यु-- c 1498 to c 1546 Dwaraka माना जाता है।

Friday, October 23, 2020

अब तक जिम्मेदारी का वजन नहीं उठा पाया है



ये तेरे हाथों की नम्रता बताती है 

तूने कोई कमाइ नहीं की 

हर वक्त बदलते मौसम की

सुनवाई नहीं की

अपनी ही धुन में चला

हमराही की निगरानी नहीं की

ये तेरी आंखों की सफाई बताती है

तूने जुदाई की तनहाई नहीं देखी

आवाज़ बड़ी दरदरी सी सुनाई पड़ती है

लगता है अपनों को सफाई नहीं दी

नाजुक जान पड़ते हैं कदमताल ये तुम्हारे

कभी किसी की बुनियाद के चक्कर नहीं लगाए

और हां तेरी जड़े बड़ी दूर तक फैलीं हैं

कहीं ओर रोपाई नहीं हुई

टुकड़े का महत्व समझ से परे है

लगता है कभी भूख ने दस्तक नहीं दी

कोई आश्चर्य नहीं होता तुमने वजन को किलोग्राम से मापा है 

लगता है अब तक जिम्मेदारीयो़ं का वजन नहीं उठा पाया है।

Thursday, October 8, 2020

साख



की जिस साख पर बैठी हूँ, वो साख पूछती है।
तुम पा तो लोगी ना, मंजिल जो तय की है
मैंने अपनी पूँजी को, तुम पे ही लुटाया है 
सब पहचान सकें तुमकों, वो पहचान बनानी है।

जब भी उठो ऊपर तुम, मेरे मस्तक पे पैर रखना।
वो मुकाम अब दूर नहीं, मन में ये स्थिर रखना।
गिरने जो लगो अगर तुम, मेरा हाथ थामें रखना।
बेमेल सवालों का, हल साथ में रखना।

जिस साख पर बैठी हूँ, वो साख बड़ी प्यारी है।
वो जो मुझको कहती, वो सौ बात पे भारी है।
यूं तो हर पेड़ ने इस बगिया में ,अपनी पहचान बनाली है।
मुझे गोद ही वो भाति है,उसकी हर अदा निराली है।

जिस साख पर मैं बैठी हूँ, वो एक दिन टूट जानी है।
मुमकिन नहीं लगता है भूलना, तेरी याद तो आनी है।
मैंने हर अलफ़ाज़ को तेरे, गीता ही माना है।
उसनें पूरी कर ड़ाली, जो की मैंने मनमानी है।

जिस साख पर बैठी हूँ, मैं उसकी परछाई हूँ।
अगर बन ना सको तुम ताकत,तो बनना क्यों कमजोरी है।
अगर आ ना सको किसी काम, तो ये वर्थ जवानी है।
 तेरे सपने सच करने की, अब हमनें ठानी है।


Bharti 

Saturday, September 12, 2020

जिंदगी में बनें रहने का बहाना तो मिलेगा




आज तिनका-तिनका करके फसल कटी गई
सबको मिलेगा हिस्सा ऐसी मुनियादी की गई
सभी में अन्न फूसें की बटाई कुछ इस तरीके से की गई
हमारे हिस्से में सूरज की धूप और पसीने की बारिश की गई
वो तो खुश थे पर हमें खुश करने की कोशिश की गई
हमें सबकुछ मिल जाए ऐसी आरज़ू तो कभी हमनें भी नहीं की
क्या फायदा उस जिंदगी का जब सब कुछ मिल जाए
कुछ खो जाने का दर्द और कुछ पाने की अभिलाषा ही मर जाए
चोट को देखने के बहाने ही सही वो दर्द का अहसास तो मिलेगा
हमें पागल रहने दो किसी को पढ़ने का अवसर तो मिलेगा
सब कुछ ना सही कुछ तो मिलेगा उसी उम्मीद के साथ
फिर से बोएं वही फसल बीज से पेड़ बनने का नजारा तो मिलेगा
समुंद्र की गहराई ना सही किनारे पर बैठ कर नजारा तो मिलेगा
जींदगी में बनें रहने का बहाना तो मिलेगा




        
       Bharti

Thursday, August 20, 2020

ऐसी विदाई मंजूर नहीं मुझे




चाहे मुझे मेरी विदाई पर कफन ना देना मंजूर है मुझे।
लेकिन माँ का आंशुओं से भीगा आंचल मिले ये मंजूर नहीं मुझे।

 मेरी आखरी विदाई में किसी का कंधा ना मिले मंजूर है मुझे।
पर उस पिता की लड़खड़ाती लाठी साथ चले ये भी मंजूर नहीं मुझे।

मुझे अग्नि मिले या कब्र ना मिले मंजूर हैं मुझे।
पर वहां मेरे भाई की सिस्कियां तन्हा रहे ये भी मंजूर नहीं है मुझे।

मेरी ना बहे अस्थियाँ गंगा में चाहे कोई ना आके रोए मेरी मजार पर सौ बार मंजूर है मुझे।
पर मेरी वो औलाद जो अभी आंखे खोले और जो ना पाए पास में मुझे ये मंजूर नहीं मुझे।

इससे पहले मैं उम्मीद बनूँ किसी की तू मुझे ही नाउम्मीद बना दे मंजूर है मुझे।
ना सुन पाऊँ किसी कि सिस्कियां तू मुझे अपने आप में समाके बैरागी बनाले सौ-सौ बार मंजूर है मुझे।

Bharti


Tuesday, August 18, 2020

औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई




औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
रिश्तों में लिपटकर अपनी पहचान खोज रही
जब तक तेरी गोद में रही तेरे ताज सा मान हो गई
दहलीज पार क्या की वो उसका इमान हो गई

औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
अपनों में बटि बिना छत का मकान हो गई
जब तक म्यान में रही सबकी शान हो गई
म्यान से बाहर क्या आई सबकी आंन खो गई

औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
जिसके मन की करी उसकी होकर रह गई
सब की खातिर एक को छोड़ा बेवफा हो गई
एक की खातिर सबको क्या छोड़ा वो समाज पर बदनुमा दाग हो गई

औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
चुल्हे की रोशनी में शमशान हो गई
उसके मान पर आए तो महाभारत रच गई
बन के बैरागी इस दुनिया से तर गई

औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई
औरत ना हुई दो धारी तलवार हो गई......॥



Saturday, August 8, 2020

जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभव हम और आप - 2


1.
"अ खुदा तू इतना रहम हमपर बरपा
दावतें दसतक हो ना हो कोई गिला नहीं
बस जब भी ये जुबां खुले इसपे तेरा ही नाम हो
और जब भी ये आँखें खुले बस तेरा ही दिदार हो।"

2.
"जानि ये कैसी महफिल सजाई है
यहाँ खाक में लिपटी हुई तन्हाई है
हम प्यार की सौगात लेके आए हैं
यहाँ हर हाथ में खंजर और आँखों में बारूद लिए पाए हैं।"

3.
"की मेरे हर सवाल का जवाब तू है
  फिर तेरे माथे पर ये सिकन क्यों है
  हम तुम्हें देखकर मुसकुराते है
  फिर हमें छूने से तेरे हाथ कांपते क्यों हैं।"

4.
 "जानि कुछ तो लिहाज किया होता
  जब बात पर्दे की थी तो पर्दा किया होता
  हमें किसी और का एक नज़र देखना भी गवारा नहीं
  भरी महफिल में यूं अपना तमाशा ना बनाया होता।"

5.



 " मेरा कोई दोष ना था
  तुम्हें ही होश ना था
  हम तो रोज तेरे दरवाजे पर आया करते थे
  उसे बंद देख वापस लौट जाया करते थे।"

6.
 " की वो किसी की याद में इस कदर खोए हैं
   कोई बताए उन्हें की सुबह हो गई है
   हम तो उन्हें समझा-समझा कर थक गए है
   वो रोशनी चांद की है तेरी शमा तो कब का बुझ गई है।"

7.
  " जानि इतना तो होश बचाकर रखो
    वो सामने आ जाए उसे पहचान सको
    ये तेरी उंगलियां हैं जो अपना कर्ज़ अदा कर रही हैं
    वरना तेरी स्याही तो कब का खत्म हो गई है।"

8.



   ये खुदा की ख़ुदाई है जो हम पर ये रहमत बरसाइ है
   तुम याद थे बस याद थे
   माफ करना वैद जी ने हमारी यादाश्त कमजोर बताइ है
   हम तुम्हें भूल गए बस अब हमें याद नहीं।
 

                        Bharti

Thursday, August 6, 2020

अपना - अपना नजरिया




विश्वासघात कितना आसान है ना यू ही कह देना।
पर उतना ही मुस्किल है किसी का विश्वास पा लेना।

कितना आसान है ना ख्वाब की दुनिया में जीना।
पर उतना ही मुस्किल है असल जिंदगी में उन्हें पूरा करना।

कितना आसान है ना किसी के रंग में रंगना।
पर उतना ही मुस्किल है उसको अपने रंग में रंगना।

कितना आसान है ना रिशतों को तोड़ कर चले जाना।
पर उतना ही मुस्किल है उन्हें उम्र भर ना भूल पाना।

कितना आसान है ना एक पौधे का रोपण करना।
पर उतना ही मुस्किल है उस पौधे को सींच कर पेड़ बनाना।

कितना आसान है ना किसी के अस्तित्व पर सवाल करना।
पर उतना ही मुस्किल है उसके अस्तित्व के लिए सारी दुनिया से लड़ जाना।

कितना आसान है ना किसी की जिंदगी में झांक आना।
पर उतना ही मुस्किल है उसकी रूह में उत्तर कर उसके अंदर झांक पाना।

कितना आसान है ना किनारे पर बैठ कर लहरों को देखना।
पर उतना ही मुस्किल है उनमे उठे जज्बातों के तुफान को देख पाना।

कितना आसान है ना एक माला से मनको को अलग कर देना।
पर उतना ही मुस्किल है चुन-चुन के हर मनके को एक माला में पिरोना।

कितना आसान है ना किसी पर अपना अधिकार जमाना।
पर उतना ही मुस्किल है स्वयं को उसके अधीन करके जिंदगी को जी पाना।

                        Bharti







Tuesday, July 28, 2020

जिंदगी के खट्टे मिठे अनुभव हम और आप .1


1. "हमें अपनी तन्हाई कुछ इस कदर प्यारी है।
      तेरे साथ होने का अहसास ही भीड़ पर भारी है।
      कुछ इस कदर चाहत हमको तुम्हारी है।
      लव्ज़ मौन रहते हैं बस धड़कनों में बातें जारी हैं॥"


2.
"उसे भीड़ पसंद नहीं,
हमनें महफिल जमानी छोड़ दी।
दबा लेती है ये महंगी तेरे हाथों की खुशबू, 
हमनें वो भी लगानी छोड़ दी।
उसका इश्क कुछ इस कदर सर चढ़कर बोला, 
हमने बातें बनानी छोड़ दी।
हम में हमारा कुछ नहीं, 
वो एक ईशारा तो दे हम सांसों को बुलाना छोड़ दे॥"

 3.
"तेरी बातों में कुछ इस कदर खो गए,
हम तेरे हो गए हमें पता तक ना चला।

हम कतरा-कतरा पिंघल गए,
तुमनें हमें कब समेटा हमें पता तक ना चला।

तुम नशे सा छा गए,
हम कब मदहोश हो गए हमें पता तक ना चला

बहुत दूरियां रही हमारे दरमियाँ कब सांसों का फासला मिट गया हमें पता तक ना चला॥"

4.
"की वो किसी की तारीफ में कुछ इस कदर घडते हैं अपने शब्दों को
रोम-रोम खिल उठता है सर झुक जाता है सजदा करने को॥"

Monday, July 27, 2020

हिंदी शायरी

1.
"अ खुदा मैं जब-जब भी उसे याद करूँ
हिचकि जरूर आए उसे ये फरियाद करूँ।"
 2.
"कितना कमा लेती हो जो इतना तनकर चलती है
अजि लॉकडाउन है सरकार हमारी कहाँ चलती है
फेस पे समाइल पैदाइश रहती है
हमने तो बस अपनी जरूरतें कम कर रखी हैं।"
 3.
"बहुत सी दरारें नज़र आ रही हैं।
तेरे दिल के आईने में सपने हज़ार नज़र आ रहे हैं।
तू कहता था मुझे तन्हाई पसंद रही है
तेरे पास आकर देखा जनाब,
तेरा दिल हमसफ़र की तलाश कर रहा है॥"

 4.
"अपने दिल की धड़कन को धडकने पर यूं मजबूर ना कर
ये जीन्दगी तुम्हें मिली है इस पर गुरूर कर
जो लोग कहतें हैं मेरे लिए घरबार छोड़ दे उन सब को साइड कर।
तू जैसा है जो भी है जो लोग तुम्हें चाहें बस उनको प्यार कर॥"


Friday, July 24, 2020

जर्रा-जर्र खिल गया तू सावन के जैसे बरसा है


तुम आए हो चले आना कदमों के निशान मिटा आना
आंगन छोटा है मेरे हुजरे का भीड़ को साथ में ना लाना

तुम्हें शौक है बाजे- गाजे का जरा दबे पाव चले आना
अभी सुलाया है थपथपा के उन अरमानों को ना जगाना

तु परिंदा नज़र आया उस खिलती प्यारी बगिया का
ऊंची उड़ान ना भरना छत गीली है मेरे हुजरे की

पतझड़ रहती है यहाँ पंखों को आहिस्ता खोलना
झड़ जाएगी वो भी जो कोपल फूटी हैं अभी-अभी

कोमल कदम संभाल के सूख के कांटे बिखर गए
समय लगेगा मैं अभी लगी हूँ आंगन मेरा संवारने

सुना है, आता है तुम्हें चेहरा पढ़ना पर्दा ना हटाइये
तुम जैसे हो जो भी हो हम तुम्हें आहट से पहचान गए

ये साजिशों में रचि दौड़ धूप पागल हमें बन देगी
तू आगे-आगे चल मैं तेरे कदमों के निशां पे चल दूंगीं

फिर से महका मेरा आशियां तू इत्र के जैसे बिखरा है
जर्रा-जर्रा खिल गया है तू सावन के जैसे बरसा है

                         Bharti


हिंदी शायरी


1.
"मैं समझ में आ जाऊँ ऐसा किरदार थोड़े हूँ।
तू आए और आकर पढ़ जाए खुली किताब थोड़े हूँ।
तुम्हें हर पल भा जाऊँ ऐसा विचार थोड़े हूँ।
जनाब,
वर्षों लग जाते हैं किसी को समझने में। 
तू आए पल में बुनियाद हिलाकर चला जाए,
इतनि कमजोर मीनार थोड़े हूँ।"

2.
"गजब का हूनर है तेरे तन्हा होने में
जब थक हार कर बैठ जाती हूँ किसी कौने में
गुस्ताखी माफ़ करना
जरा सा झांक लेती हूँ तेरी खिलाड़ी में
तुम तो बहुत कुछ समेटे बैठे हो अपने आंगन में।"


3.
"किसी का हो जाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसको अपना बना लेना।
किसी को पलकों में बसाना आसान है।
बहुत मुस्किल है,
उसकी पलकों में बस जाना।
बहुत आसान है जनाब किसी के लिए मर मिटाना।
बस मुस्किल है,
उसके बिना जीना॥"

4.
"मुझे जागीर में रेगिस्तां दे दिया।
और पूछते हैं,
तेरा गुलिस्तां खिलता क्यों नहीं।
नींद-चैन सब छीन लिया
और शिकायत है,
तू पहले जैसी अब रही नहीं।
वचन में रोशनी मांग ली,
और कहते हैं अंधेरा मुझे पसंद नहीं॥"



Bharti




Monday, July 20, 2020

चलो इस बार स्वंय के लिए जीते हैं



जब विश्वास तोड़ दिया जाता है,
एक आंशु तक ना गिरता आत्मा रो देती है
बस एक ख्याल बाकी रह जाता है 
बाकी सब बिखर जाता है 
सांस थमती नहीं,रूह जम जाती है
बनकर पूतला जिम्मेदारी ढोते रहते हैं
एक बार वो मिले तो सवाल करूँ उसे 
क्यों किया उसने स्थिर पानी में तूफान उठा दिया उसने
खैर वो खुश तो है ना जिंदगी के उस मौड़ पे
हम तो परछाई थे
फिर क्यों चल दिए हमें छोड़के
माना आदि हैं हम उनके कांधे पर सर रख सोने के
पर आदत कहां है उन्हें भी यूं अकेले चलने की 
ये तो समय का चक्र है जो अपना काम करता है
फिर आसपास क्यों मंडराया करता है 
पल में भूल जाएँ सब कुछ ऐसा नहीं होता है
इनसान हैं भगवान ने स्वंय बनाया है 
खुद को मिटा ले इतना कायर थोड़े हैं
पल पल कोशें हम उसे ऐसा जरूरी थोड़े है
कोई तो होगा जो इसे फिर से जोड़ देगा ऐसा आभास होता है
चलो इस बार स्वंय के लिए जीते हैं।
  
      Bharti

Sunday, July 12, 2020

बराबरी की बातें

बराबरी की बातें



एक बार जिंदगी को जिंदगी समझकर देखें
छोड़ो बराबरी की बातें,
आज एक-दूसरे की जिम्मेदारी को समझकर देखें
बात जब बराबरी की आए,
तो खुशियाँ ही क्यों गमों को साझा करके देखें
यूं तो कट रहें हैं जिंदगी के हसिन लम्हें,
चलो आज जिम्मेदारीयां ढोने वाले से बातें बेहिसाब करके देखें

माना आसान नहीं होता किरदार औरत का निभा पाना।
लेकिन कहाँ आसान होता है जज्बात मर्द के समझ आना।
सपनों की ऊंची उड़ान भर वो चाहता है कहीं उड़ जाना।
नहीं आसान रहा होगा उसके लिए अपने सपनों को कोडियों के भाव बेच पाना।

कोई तो वजह रही होगी उसके अनपढ़ रहने में।
जो चेहरा पढ़ ले क्या मुस्किल है भला किताब को पढ़ने में।
बहुत कुछ समेटे बैठा रहता है अपने अंदर में।
जख्म गहरा हो कितना भी सरेआम निलाम करता नहीं किसी महफील में।

एक बार तू अपना उसे कहके तो देख ले।
जमाने भर से लड़ जाएगा तू दिल लगाकर देख ले।
उसे यूं आजमाना और मझधार में छोड़ना बंद कर दे।
बेवफाई का इलज़ाम एक तरफा लगाएँ ये सही नहीं ।
तू अपने तराजू का माप एक बार चैक करवाके देख ले।।

ये दिल बहुत दुखता है उसका उसे मिट्टी का खिलौना समझना बंद कर दे।
वो अपने आप चला  जाएगा तेरी राहों से तू उसे पलटकर देखना बंद कर दे।
आईने समान दिल के टूकड़े हजार करके उसे जख्मी छोड़ देना अब बंद कर दे।
टूटे हुए आईने को अब यूं घिस-घिस कर साफ करना बंद कर दे।

बहुत मजबूत होता है मगर मजबूर होता है।
ये दो पहियों की गाड़ी है साथ चलने में मगरूर होता है।
आकर एक पल पास बैठ जाया कर क्या पता उस विधाता को क्या मंजूर होता है।
यूं तो कटने को कट जाएगी जिंदगी क्या कभी ख्वाहिशों का समुंद्र भी खत्म होता है।

                           Bharti










Wednesday, July 8, 2020

मेरे अलफाज कहते हैं,मेरे जज्बात को समझो



मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है,वो गलती ना हमारी थी।।

मेरे हमदम, मेरे सरताज, मैंने हमराह तुम्हें माना
बहुत मुस्किल है जानेजां ..इस  दिल को समझाना
कभी खेली मैं आंचल में, कभी झूली थी बाहों में
वो दूनिया ही निराली थी, जहां मेरी मनमानी थी।

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी  थी।।

क्या ये हो रहा है अब ,क्यों वो हो रहा था तब
कहीं चटका कोई मनका, कहीं टूटा कोई तारा
ना कोई अब तमन्ना है, ना कोई तब शिकायत थी
वो तेरा प्यार अंधा था, कुछ मेरी खता भी थी

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

जिसे मांना खुदा अपना, वो धरती पर है आ उतरा
जुदा हम तुमसे होके हो.. ,जोगी बन गए यारा
बहुत कुछ सह लिया तुमनें, बहुत कुछ कह लिया उसनें
तुम्हें मैं क्या ये समझादूँ , तुम्हें मैं क्या ये बतलादूँ

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

चले आना- चले आना जमाना छोड़ दे तुमकों
महोब्बत की थी हमने तो, अब उसको निभाना है
चलीं  आऊंगी बंधन तोड़- चोला छोड़ के यारा
ये जीवन अब तुम्हारा है, ये जीवन कल तुम्हारा था

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

बड़ा रंगीन मोसम है, बड़ा दिलकश नजारा है
जमाना बीत गया यारा, आज तुमनें पुकारा है
तू कैसी है, तू खुश तो है , की मेरा हाल पूछा है
तुम खुश तो हो मेरी बाहों में आके ओ मेरी जाना

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

बिना सावन ही साजन के आज ये नैन बरसे हैं
बहोत जोरों से तोड़ा दिल, की धड़कन रो रही अब तक
जमाना कुछ समझता है, ये जीवन की कहानी है
मेरे लिखने पे मत जाना, ये हर दिल की कहानी है

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

किसी ने तोड़ दिया ये दिल, तो कोई जोड़ लेता है
तेरी मुस्कान कहती है, तू कितना पीर सहता है
कहानी वो ना झूठी थी, कहानी ये ना झूठी है
ये तो उस रब की माया है, जो ऐसा खेल रचता है

मेरे अलफाज कहते हैं, मेरे जज्बात को समझो।
ये गलती ना तुम्हारी है, वो गलती ना हमारी थी।।

             Bharti



Wednesday, June 17, 2020

रहमत

जी जनाब

"आप हमें जो ये  बेबात ही नखरे दिखाते हैं ना
इसमें सामिल मर्जी हमाारी है ,वरना
हवा भी हमें छूूने से पहले हमसे इजाजत मांगती है
हम ठहर सा गए हैं, वरना
हमारा सज़दा करने वाले आज भी कतार में हैं।"



                                Bharti


Sunday, May 17, 2020

कभी मुझसे भी तो पूछो क्या है आप

 वो  लम्हेें


इतना ना मुस्कुुुराया किजिए
जख्म दिखने लगेंगे कुुछ तो किजिए
क्या हैं आप कभी मुझसे भी तो पूछिए
आप कभी अलफाजों में भी तो समाया किजिए

कभी मुझसे भी पूछो जनाब लाजवाब हैं आप
मेरी उन जागि-जागि रातों का खवाब हैं आप
आसमां के घने बादलों सेे सटा चांंद हैं आप
प्यासी पड़ी जमीन की रिमझिम सी बरसात हैं आप

तेरी सोहबत ने क्या से क्या कर डाला
बहुत लड़ती थी इस जमाने से तुुने मौन कर डाला
अक्सर बेनाम सेे चेहरे डोल जाया करते थे मेरे मन आंंगन में
क्या था वो क्यों था वो समय निकल गया सोचने में

मैं नहीं मानतीं थी, दिल होता है
तेरी आहट क्या मिली कमबख़्त बेचैन हो उठता है
अब तो सोते जागते तेरी माला सी रटता है
क्या करें तेरी आँँखों में नशा ही ऐसा होता है

आजाद सी झूूम उठती थी बेेेपरवाह उन अनजान गाँव में
तू परछाई बनकर जब से साथ चलने लगा मेरी राहों  में
बहुत से आए गए कहते रहे कांटे बहुत हैं तेरी राहों में
ऐसे तुम थे जो ठहरे रहे मेरी बाहों में

तू मेरा वो खवाब है जिसे मैंने  सोते जागते देखा  है
तुमनें भी तो मेरी दुखती रग को छूआ है
तेरे आगे में हार जाऊँ ऐसा कभी ना हुआ है
तू जीता है इसमें थोडा बहोत खुदा भी तो शामिल हुआ है

लोग कहते हैं मेरे बारे में ये मुस्कराती बहुत है
मेरे माँ बाप इसे देेेेखकर ही तो जिंंदा हैं
ये भी सच है मुुस्कान पे हर गम फिदा है
असल में ये ही तो जिंदगी को जीने की अदा है

जब तू आया था मेरे कांंधे पर हाथ रख फरमाया था
अनमोल है मेरी मुसकान तुने तो मेरे गमों का मोल लगाया था
बहुत मुसकुराती हूं वो लोग कहते थे
तूने कैैसे जान लिया वो मुस्कान झूठी थी

मतवाली, मस्तमौला, जिंदा-दिल कई नाम थे मेरे
तू मिला क्या मिला जो मिला बस छूट गया मेरा
बहुत बहादुर थी डर क्या है इससे अनजान थी
तू मिला अब डर है मुझे खो न जाऊँ इस भीड़ में तुम्हें

                                                  Bharti

Friday, May 15, 2020

ना जाने क्यों हमसाये सा नजर आया


मैैंने कहा ला देेेख लूूँ दिखा ज़रा जख्म तेेरेे
हसकर उसने जवाब दिया हैं हाथ नमकीन तेरेे।
उसकी नज़र कहर सा ढा गई
सदीयों से दबी पीर उसकी सिसकियाँ बोल गई
मैैं तो हलके से उसके मन को टटोलने चलि गई

वो तो दिल की गहराई में उतरते चला गया
दसकों सेे दबे राज दिल के खोलता चला गया
परछाई बनकर उसका पीछा करना चाहा
वो कमबख्त परछाई को  ही तोड़ता चला गया

ना जाने क्यों हमसाये सा नज़र आया
वो तो अपनो से मिले जख्म से जख्मी पाया
सहमा  सा पथ निहारता पथियार की पाया
उस मोड़ पर भी वो विशवास से चूर पाया

मै उसमें मेरे कान्हा की छवि को देेेेखती
ना मुझमें मीरा सी भक्ति, ना राधा सी शक्ति
मैं कलयुग की नारी बस  तुझसे सच्ची भक्ति
बनकर रुकमणी ले जाऊँ पीर के भवर से कहीं दूर तुझको

जब छूकर देखा घाव उसके नासूर सा नज़र आए
बस विशवास पर विशवास था दवा ना साथ लाए
हाँ कुछ-कुछ परिचित थी मैं वो निशां जाने पहचाने नजर आए
याद आया ये तो गिरकर संभलने से पाए

वो आंखों में विशवास लिए हाथ बढ़ाते चला गया
लड़खड़ाये कदम उसके पर आगे बढ़ता चला गया
उसका मेेरी ओर बढ़ता हर कदम मुझे आजमाता चला गया
संघर्षों का आदि वो बतलाता चला गया

उसने कसकर पकड़ा हाथ मेरा कभी ना छोड़ने के लिए
मैंने आत्मसमर्पण किया अब  जीना है तेेरे लिए
बस मुझको मुझसे शर्मसार ना करना ये अरदास लिये
तू पहरेदार बन मेरी  आबरू  का ये विशवास लिए

विशवास की लौ लिए हर बाधा पार कर जाएंगें
उस कर्ता ने चाहा तो कर्म रंग लाएगा सफलता झूम जाएगी
तेरे रंंग में रंगकर नमक और मिठास का भेद भूल जाएगें
अब मंजिल दूर नहीं हर धर्म को अपनाएंगे

                                                    Bharti


Monday, February 3, 2020

The Alchemist ---- Ben Jonson

M.A (English) 1semester

Drama
  The Alchemist  ---Ben Jonson
About Writer--

                       Benjamin Jonson,  for other people with the same name ,see Ben Jonson .
Ben Jonson was an English playwright and poet, whose artistry exerte a lasting impact upon English poetry and stage comedy.
He popularised the comedy of humorous.
He is best know for the satirical play " Every Man In His Humour (1598).
Born - 11 June 1572  Westminster, London  England.
Died -6 August 1637  (aged 65) London England.

17 th century poet.

The Alchemist - 

Introduction- 
                          The  Alchemist 1610
The Alchemist as a satirical comedy.

The Alchemist is a comedy by English playwright Ben Jonson. First performed in 1610  by King's men is a generally considered Jonson's best and most characteristic comedy.

Main Characters-  


 Love bit-The master of the house


Face - Jeremy   servant of Love bit


Subtle -  Jeremy's friend & he discussed himself as a doctor expert in alchemist power. 

Dol- Dol is short for Dorothy .She is prostitute ( Dol comman).


5 clients ----


1. Dapper  - He is a legal Clark and a climber who comes to the commen in order to get a "gambling fly " .He is a extremely greedy.


2 Drugger - An honest, good soul. He is a young tobacconist who has just bought a new shop on the corner of a street. He wants the Doctor ( having met face in a pub ) to advise him on (effectively) the feng shui of the building.At the end of the play he loses everything and is dispatched with a punch from lovewit


Dmply( Dame Pliant) - often called widow in the play.Sha is sister of Kastrill.


Sr Epicure Mamman- epicure mammon name means  person who is devoted to sensory enjoyment and material wealth and he is perhaps the play's biggest con.


Surly- He is the close friend of Mamman . In the end he is attacked by kastrill and loses the girl.


Anamiush - He is anapactist . He is poor greedy for power.


Kastrill - An "Angry boy" he wants to learn the skill of quarrelling formal.


Theme- Dreams, Love, selfishness.

Main point-
  1. The plague
  2. Arrival of the clients
  3. Fraudulent practices 
  4. Realism and satire 
  5. Love bit return.
About topic-in Hindi


लंदन में पलेग फैलाने के कारण वहाँ के सभी धनी लोग कुछ समय के लिए अपने घर को छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे। इस तरह लवबिट भी कुछ समय के  लिए दूसरी जगह चला गया था। तथा अपने घर को अपने नौकर के भरोसे पर छोड़कर  गया था।
लेकिन उसके नौकर फेस ने अपना नाम बदलकर जैरमि रख लिया।और अपने दोस्त तथा एक विधवा के साथ मिलकर लोगों को ठगने का व्यापार चलाया। ये सब मिलकर लोगों को  भविष्यवाणी तथा पारसपत्थर के बारे  में बताते थे
ये सब मैटल्स को गोल्ड में बदलने की बात करते थे।इसके दो दोस्त उसकी मदद  करते हैं। फैस( जैरमि) कलाईंटो को लेकर आने का काम करता है तथा उसका दोस्त सबटल स्वयं को उनका हैड बताता है।वह सभी को उनकी परेशानियों के हल बताता है।
इनके पास पहला कलाईंट डरैपर आता है ।वह एक कलर्क होता है। तथा एक आत्मा मागता है जो उसको जूए में जिता सके । ये लोग उसके पास से पैसे लेकर उसे कुछ हवन वगैरा करने के लिए भेज देतें हैं।
दूसरा कलाईंट Drugger आता है जो एक टोबैकोनिस्ट है । वह अपनी दुकान के लिए यह जानकारी लेने आया था की वास्तु के हिसाब से किस दिसा में उसका मुख हो। ये लोग इससे भी पैसे लेकर वापस भेज देते हैं।
इसके बाद मैमन अपने दोस्त सरलि के साथ आता है। मैमन बहुत ही लालची होता है तथा पारसपत्थर लेने के लिए आता है। ये उसका सामान रख लेते है और डॉल को इसके साथ भेज देते है। सरलि को पारसपत्थर जैसी चीज पर भरोसा नहीं है वह तो इन सभी के झूठ पर से पर्दा हटाने आया था।
Drugger आकर  बताता है की एक जवान विधवा Dmply अपने भाई Kastrill के साथ यहाँ सादी के सिलसिले मेंआती है।Drugger दोनों भाई बहन को उनके पास ले जाता है।
तब सरलि अनामियूस के भेस में आता है तो ये ठग Dmply को इसके साथ भेज देते हैं। तब सरलि उसे अपनी असली पहचान बताता है। तब सब के सामने उनकी असलियत आ जाती है।
इतने में डॉल सबको बताती है घर का मालिक लवबिट लौट आया है। डॉल ,सबटल भाग जाते हैं। जैरमि फिर से फैस बन जाता है। लवबिट की सादी Dmply से हो जाती है।
      


In English


Due to the spread of Peleg in London, all the rich people there left their home for some time and moved to another place. In this way, Lovebit also moved elsewhere for some time. And had left his house on the trust of his servant.
 But his servant Fes changed his name to Jairami, and together with his friend and a widow, ran the business of cheating people. Together, they used to tell people about prophecy and parasites.
 They all talked about converting metals into gold. Two of his friends help him. Fais (Jairmi) works to bring Kalanto and his friend Subtal reveals himself to be their head. He tells everyone the solution to their problems.
 They have the first wrist derapper. They are a colorant. And there is a soul who can make him live in gambling. These people take money from him and send him to do some havan.
 The second wristlet comes from Drugger who is a tobacconist. He came to get information for his shop that according to Vastu, in which case should he face. These people send money back with even more money.
 After this Mamon comes with his friend Sarli. Mammon is very greedy and comes to take parasite. He keeps his belongings and sends the doll with it. Sarli does not believe in such a thing as Parasapathar, he had come to remove the veil from all these lies.
 Drugger arrives and tells that Dmply, a young widow, arrives here with her brother Kastrill in connection with Saadi. Drugger takes both siblings to him.
 When Sarli comes in disguise to Anamius, these thugs send Dmply along with it. Sarli then reveals her true identity. Then their reality comes in front of everyone.
 In this way, Dol tells everyone that the owner of the house has returned to Lovebit. Dolls, subtitles run away. Jairami becomes Fas again. Lovebit is married to Dmply.











Sunday, January 19, 2020

Julius Caeser written by William Shakespeare (In Hindi)

M.A (English)1sem
Drama

 About write - William Shakespeare was an English poet , playwright and actor widely regarded as the gratest writer in the English language.

He ia world's gratest dramatist.

He is often called England's national poet and the "Bard of avon".
His extant works including collaboration.
Born- 26 April  1564
Died -23 April  1616
Resting place- church of the Holy Trinity, Stratford-upon-Avon
Works - 39plays, 154 sonnets and two long narrative poems.

Julius Caesar


Julius Caesar
Published- 1623
Tragic Drama
First performance- 21 September 1599
 Introduction-
1.  Julius Caesar written by William Shakespeare set in Rom in 44 B.C.
2. The central psychological drama of the play focaus on Brutus's struggle between the conflicting demand of honour patriotism and friendship.
3. The tragedy of Julius Caesar first folio.
4 . There has been a lot of controversy man over the problem of hero of Julius Ceasar.
5. Julius Caesar is the first hero and Brutus is the second hero.

Mane characters
Julius Ceasar ,wife calpurnia
His adopted son -Octavius Caesar
Brutus, wife portia
Mark Antony
( conspirators against caesar)-8
Macus Brutus
Cassius
Casca


About topic-



  1. Julius ceasar comes defeating the sons of Pompey the battle.
  2. Conspirators plan to assassinate him
  3. In the fastival of lupercal ,Caesar reject the crown thrice.
  4. Sooth sager beware of  the idea of March.
  5. Engage Brutus inhis conspiracy by scheming actions.
  6. Plan to join Brutus in the cinspitatn team for credibility and safety.
  7. Plan to go to capital.
  8. Caesar is stabbed by the conspirater at the capital 
  9. Mark Anthony's emotional speech.
  10. The crowd goes will attack conspirators
  11. Battle of philippy.
All the conspiracy die.
                                             

In Hindi

यह ड्रामा जब julius Caesar पोाम्प्य के राजा को हरता है और अपने महल में प्रवेश करता है तब उसे सिढिओं पर एक भविष्य वाणी करने वाला मिला। उसने Julius Caesar को बताया की उसे 15 March के दिन संभल कर रहना होगा।
लेकिन julius Caesar ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।
उसकी जीत पर Antony ने यउन्हें crown भेट किया गया , लेकिन Julius Caesar ने इंकार कर दिया ।
दूसरी तरफ cassius & casca ने बाकी के विरोधी के साथ मिलकर Caesar को मारने की योजना बनाई।
Brutus जो Caesar का दोस्त था उसको भी गलत जानकारी देकर की वह एक तानाशाह राजा बनेगा और उसे अपने पक्ष में कर लिया। क्योंकि Brutus हमेशा जनता के हित को आगे रखता था।
15 March को Brutus बहुत था तो उनकी पत्नी Portia ने उनकी चिन्ता का कारण पूछा तो Brutus ने इंकार कर दिया। तब Portia ने अपनी थाई में चाकू मार लिया। तब Brutus ने Caesar की हत्या की योजना के बारे में बताया ।उनकी पत्नी ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रही।
Brutus के जाने के बाद Portia ने खुद को फांसी लगा ली।
दुसरी तरफ Caesar सिनेट जाने लगा तो उनकी पत्नी ने उन्हें वहां जाने से मनाह कर दिया। एक कोनसिपिरेटर ने मरदों का वासता देकर राजि कर लिया।
और सिनेट में जाने के बाद 8 कोनसिपिरेटरो ने मिलकर Julius Caesar को मार डाला। तब Antony वहां आता है और Caesar की डैडबॉडि को उठाकर बाहर जनता के सामने लाता है।और उसकी हत्या के बारे में बताता है चूँकि Caesar ने रोम की जनता के लिए बहुत सारे काम किए थे। जनता कातिलों को मारने के लिए दोडते हैं लेकिन वो बच निकलते हैं।
Antony और Octavius मिलकर सभी हत्यारों को मार गिराते हैं।


In English


 When this drama julius Caesar defeats the king of Pompeya and enters his palace, he finds a prophet on the steps. He told Julius Caesar that he would have to be cautious on 15 March.
 But julius Caesar ignored this.
 Antony was crowned with his victory, but Julius Caesar refused.
 On the other hand cassius & casca together with the rest of the adversary planned to kill Caesar.
 Brutus, who was Caesar's friend, also misinformed him that he would become a dictator king and favored him. Because Brutus always put forward the public interest.
 Brutus was very much on 15 March, when his wife Portia asked for the cause of his concern, Brutus refused. Then Portia stabbed her in Thai. Brutus then explains the plan to assassinate Caesar. His wife tries to stop him but she fails.
 Portia hanged herself after Brutus left.
 Caesar Sinnett started going to the other side, then his wife refused him to go there. A conspirator ruled by confessing the death of the dead.
 And after moving to Sinnett, 8 conspirators jointly killed Julius Caesar. Then Antony arrives and picks up Caesar's deadbodies and brings them out to the public, and tells of his assassination since Caesar did a lot of work for the people of Rome. People fight to kill the slayer but they escape.
 Antony and Octavius ​​kill all the assassins together.





                                            Bharti


Saturday, January 18, 2020

तन्हा (मेरा एक रंग में लिपटना)

तन्हा


  
तेरा यूँ एक टक निहारना ,
मेंरा तेरी राह को तकना ।
बड़ा मिट्ठा सा लगता है , दिल का पराया सा होना ।।
तेरा मेरी गलियों से ग़ुजरना ,
उस पर मेरा कलियों सा खिलना।
बड़ा तडपाता है , तेरा तन्हा छोड़ जाना ।।
तेरा इंतजार करवाना ,
मेरा छपाक से आना ।
बड़ा याद आता है , तेेेेरा वो कभी - कभी रूठ जाना ।।
तेरी वो अनकही सी बातें ,
मेरी नासमझी से इशारे।
बड़ा रूलाता है , वो तेरा प्यार से समझाना ।।
तेरा वो साथ निभाने का वादा करना ,
मेरा वो वादे पर वादा करना ।
बड़ा घबराता है मन तेेेरा पल मेें पराया कर जाना ।।
तेरा वो जवानी भरा जज्बातो का मस्त मंजर आना ,
मेरा तेरे सपनों को देख मौन रह जाना ।
बड़ा सताता है , तेरा औझल हो जाना ।।
वो तेरा तिरंगे में लिपटे आना ,
मेरा एक रंग में लिपटना ।
मौन सा रहकर सब कह जाना ।।
तेरा अंश मुझमें रह जाना ,
मेरा हमारी दूनिया को संभालना ।
बड़ा घबराता है  दिल तन्हा सा रह जाता है।।
                      
                              Bharti

Friday, January 17, 2020

Doctor faustus written by Christopher Marlowe

M.A (English) first sem

Drama

In hindi


Doctor Faustus
यह एक बहुत बड़े विदवान कि कहानी है । जिसका नाम डॉ फॉस्टस होता है । इसने बहुत सी किताबें पढ़ी और अपनी नौलिज को बढाया। जब उसे यह महसूस हूआ की अब मुुझे अपने ज्ञान को और भी बढाना चाहिए , तब उसने काला जादू सिखाने का मन बनाया। उसने अपने नौकर वैैैगनर को अपने पास बुलाया और कहा की वह अपने दोस्तों से मिलना चाहता है । वैगनर ने उसके दो दोस्तों को बुलाया - वैल्डस और कोर्नेेलियस । डॉ फॉस्टस ने उनसे काला जादू सिखाने की इच्छा जताई ।तब उसके दोनों दोस्तों नेे उन्हें काला जादू सिखाने केे लिए किताबें दी ।
इस बीच दो एंजेल्स की एंट्री होती है।
गुड एंजेल और बैड एंजल दोनों अपनी राय फॉस्टस को देेेती हैं।
गुड एंजल - काला जादू को छोड़ दो और ईशवर की राह पर चलो ।
बैड एंजल - नहीं तुम काला जादू पढो


डॉक्टर फॉस्टस ने काला जादू का रास्ता अपनाया और बुुुक्स पढता रहा।
वैल्डस और कोर्नेलियस दोनों एक बार फिर से फॉस्टस के पास आते हैं और डैैविल को बुलवानें कि बात करते हैं। कुछ समय पस्चात् दोनों वहां से चले जाते हैं।
डॉ फॉस्टस अपने काला जादू की मदद से लूसिफर के भूत मिफिस्टोफीलिस को बुलाता है,और उसके मालिक वैगनर से  मिलने की बात करता है। डॉ फॉस्टस उसके सामने एक पर्पोजल रखता है की वह उसका नौकर बन जाए । मिफिस्टो यह सब वैगनर को बताता है तब वैगनर उसे फॉस्टस के पास एक डील करने के लिए भेेजा।

इस पर्पोजल में-----24 वर्ष तक फॉस्टस जो चाहे वो कर सकता है मिफिस्टोफीलिस उनको गुलाम के रुप में मिलेगा  और बदले में 24 वर्षों बाद अपनी आत्मा वैगनर (डैैैैविल)को देनी होगी ।वह  इस बीच कभी भी ईश्वर को याद तथा पूूूजा नहीं कर सकता अगर  वह ऐसा करेेगा तो 24 वर्षो से पहले ही उसे अपनी जिंदगी सेेेे हाथ धौना पड़ेगा
फॉस्टस यह डील मंजूर करता है और उस अगरीमन्ट  के उपर अपने खून से हस्ताक्षर करता है।
24 वर्षों तक जादू करता है। अपने जादू से लोगों को परेशान करता है। मिफिस्टो उसे सारी दूनिया की सैर कराता है।
वह अपने जादू की मदद से किसी के सीर पर सींग उगा देेेता है ।
घोड़े के ऊपर आदमी को बैठा कर उसे पानीके ऊपर चलवाता है और नीचे से घोड़े को गायब कर देता है।
बिना मौसम के फल पेश करता है।

धीरे-धीरे समय बीतता चला गया फॉस्टस दूनिया घूमते-घूमते थक गया अब वह मिफिस्टो से शादी कराने को कहता है। किंतु मिफिस्टो उसे इंंकार कर देता है । क्योंकि शादी एक पवित्र सेरेमनी है ।
फिर वह सोचता है कहीं वह गलत तो नहीं कर रहा है । क्या उसे ईश्वर से माफी मांग लेेेनी चाहिए।
तभी मिफिस्टो उसे चेतावनी देता है अगर उसनें ईश्वर को याद किया तो वह उसकी शोल को ले जाएगा ।


अब उसका टाईम पूरा होने को है तब वह अपनी  काला जादू की किताबों को जला देता है। ताकि कोई और ईंसान अपनी जिंदगी बरबाद न कर सके।
अब उसका टाईम पूरा हो जाता है डैविल आता है डॉ फॉस्टस की आत्मा को ले जाता है।
इस प्रकार यह एक दूखांत है।


                                                  Bharti