वो लम्हेें
इतना ना मुस्कुुुराया किजिए
जख्म दिखने लगेंगे कुुछ तो किजिए
क्या हैं आप कभी मुझसे भी तो पूछिए
आप कभी अलफाजों में भी तो समाया किजिए
कभी मुझसे भी पूछो जनाब लाजवाब हैं आप
मेरी उन जागि-जागि रातों का खवाब हैं आप
आसमां के घने बादलों सेे सटा चांंद हैं आप
प्यासी पड़ी जमीन की रिमझिम सी बरसात हैं आप
तेरी सोहबत ने क्या से क्या कर डाला
बहुत लड़ती थी इस जमाने से तुुने मौन कर डाला
अक्सर बेनाम सेे चेहरे डोल जाया करते थे मेरे मन आंंगन में
क्या था वो क्यों था वो समय निकल गया सोचने में
मैं नहीं मानतीं थी, दिल होता है
तेरी आहट क्या मिली कमबख़्त बेचैन हो उठता है
अब तो सोते जागते तेरी माला सी रटता है
क्या करें तेरी आँँखों में नशा ही ऐसा होता है
आजाद सी झूूम उठती थी बेेेपरवाह उन अनजान गाँव में
तू परछाई बनकर जब से साथ चलने लगा मेरी राहों में
बहुत से आए गए कहते रहे कांटे बहुत हैं तेरी राहों में
ऐसे तुम थे जो ठहरे रहे मेरी बाहों में
तू मेरा वो खवाब है जिसे मैंने सोते जागते देखा है
तुमनें भी तो मेरी दुखती रग को छूआ है
तेरे आगे में हार जाऊँ ऐसा कभी ना हुआ है
तू जीता है इसमें थोडा बहोत खुदा भी तो शामिल हुआ है
लोग कहते हैं मेरे बारे में ये मुस्कराती बहुत है
मेरे माँ बाप इसे देेेेखकर ही तो जिंंदा हैं
ये भी सच है मुुस्कान पे हर गम फिदा है
असल में ये ही तो जिंदगी को जीने की अदा है
जब तू आया था मेरे कांंधे पर हाथ रख फरमाया था
अनमोल है मेरी मुसकान तुने तो मेरे गमों का मोल लगाया था
बहुत मुसकुराती हूं वो लोग कहते थे
तूने कैैसे जान लिया वो मुस्कान झूठी थी
मतवाली, मस्तमौला, जिंदा-दिल कई नाम थे मेरे
तू मिला क्या मिला जो मिला बस छूट गया मेरा
बहुत बहादुर थी डर क्या है इससे अनजान थी
तू मिला अब डर है मुझे खो न जाऊँ इस भीड़ में तुम्हें
Bharti
इतना ना मुस्कुुुराया किजिए
जख्म दिखने लगेंगे कुुछ तो किजिए
क्या हैं आप कभी मुझसे भी तो पूछिए
आप कभी अलफाजों में भी तो समाया किजिए
कभी मुझसे भी पूछो जनाब लाजवाब हैं आप
मेरी उन जागि-जागि रातों का खवाब हैं आप
आसमां के घने बादलों सेे सटा चांंद हैं आप
प्यासी पड़ी जमीन की रिमझिम सी बरसात हैं आप
तेरी सोहबत ने क्या से क्या कर डाला
बहुत लड़ती थी इस जमाने से तुुने मौन कर डाला
अक्सर बेनाम सेे चेहरे डोल जाया करते थे मेरे मन आंंगन में
क्या था वो क्यों था वो समय निकल गया सोचने में
मैं नहीं मानतीं थी, दिल होता है
तेरी आहट क्या मिली कमबख़्त बेचैन हो उठता है
अब तो सोते जागते तेरी माला सी रटता है
क्या करें तेरी आँँखों में नशा ही ऐसा होता है
आजाद सी झूूम उठती थी बेेेपरवाह उन अनजान गाँव में
तू परछाई बनकर जब से साथ चलने लगा मेरी राहों में
बहुत से आए गए कहते रहे कांटे बहुत हैं तेरी राहों में
ऐसे तुम थे जो ठहरे रहे मेरी बाहों में
तू मेरा वो खवाब है जिसे मैंने सोते जागते देखा है
तुमनें भी तो मेरी दुखती रग को छूआ है
तेरे आगे में हार जाऊँ ऐसा कभी ना हुआ है
तू जीता है इसमें थोडा बहोत खुदा भी तो शामिल हुआ है
लोग कहते हैं मेरे बारे में ये मुस्कराती बहुत है
मेरे माँ बाप इसे देेेेखकर ही तो जिंंदा हैं
ये भी सच है मुुस्कान पे हर गम फिदा है
असल में ये ही तो जिंदगी को जीने की अदा है
जब तू आया था मेरे कांंधे पर हाथ रख फरमाया था
अनमोल है मेरी मुसकान तुने तो मेरे गमों का मोल लगाया था
बहुत मुसकुराती हूं वो लोग कहते थे
तूने कैैसे जान लिया वो मुस्कान झूठी थी
मतवाली, मस्तमौला, जिंदा-दिल कई नाम थे मेरे
तू मिला क्या मिला जो मिला बस छूट गया मेरा
बहुत बहादुर थी डर क्या है इससे अनजान थी
तू मिला अब डर है मुझे खो न जाऊँ इस भीड़ में तुम्हें
Bharti

good work & nice lines
ReplyDeleteThank you sr
DeleteI have had the opportunity to learn from all of you and hope to get even further☺
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