1 .
"ये जिंदगी है बाबूजी यहां वक्त भी मिलता है अपने हिसाब से।
क्या पता ये वक़्त कब लपेट ले हमें तो आओ समेट ले जो मिलता है करीब से।
अपनी जरूरतें पूरी कर लें बस मिलता है वक्त नसीब से।
अब कौन हिसाब रखे नाराजगियों का तो पास रखो जो मिलता है तहज़ीब से।"
2.
"यूं तो खेल-खेल में बहुत से किस्से जोड़ें हैं।
बेमतलब के रिश्तों को भी हक से जोड़ें हैं।
क्या जाता है कहने में अरमान हमने दिल से जोड़ें हैं।
कोई टूट गया तो क्या हुआ ख्वाबो को पंख लगा आसमान में छोड़े है।"
3.
"अपना अपना का राग अलापा करते हो
वक़्त की दरकार में सरकार बदला करते हो
जब समय मिले तो क्यों न खुद में झांका करते हो
तोड़ कर जज़्बात अपने दोष हम पर क्यों लगाया करते हो।"
4.
" वो अक्सर पूछा करते हैं
अब तक आया नहीं कोई रंग पहचान में तेरे।
अब कौन उन्हें बताएं कि जिंदगी ने इतने रंग दिखाएं हैं मेरे।
हर रंग में मिले उस रंग को जो रंगता है उसे भी हम पहचानते।
अब किसी एक से शिकवा करना अच्छा नहीं हमें तो हर-एक रंग पहचानते।"
5.
"हर वक़्त डसता है तेरा मौन रहना।
कितना कुछ दबा कर बैठोगे अब रहने दो ना।
हम जिंदा है तेरी बातों का सार सुनकर।
कितना इंतजार करना होगा बस इतना सा बता दो ना।"
6.
"बहुत खलता है तेरा बिना कुछ कहे मेरी जिंदगी से चले जाना।
आदत हो गई है तेरी सहन नहीं होता अब लौट आओ ना।
जानती हूं आप भी नहीं रह पाएंगे तो बेवजह सही नहीं रूठ जाना।
आता नहीं है हमें यूं मनाना कम से कम इतना तो बता जाते कहां तक है हमें साथ जाना।




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