विश्वासघात कितना आसान है ना यू ही कह देना।
पर उतना ही मुस्किल है किसी का विश्वास पा लेना।
कितना आसान है ना ख्वाब की दुनिया में जीना।
पर उतना ही मुस्किल है असल जिंदगी में उन्हें पूरा करना।
कितना आसान है ना किसी के रंग में रंगना।
पर उतना ही मुस्किल है उसको अपने रंग में रंगना।
कितना आसान है ना रिशतों को तोड़ कर चले जाना।
पर उतना ही मुस्किल है उन्हें उम्र भर ना भूल पाना।
कितना आसान है ना एक पौधे का रोपण करना।
पर उतना ही मुस्किल है उस पौधे को सींच कर पेड़ बनाना।
कितना आसान है ना किसी के अस्तित्व पर सवाल करना।
पर उतना ही मुस्किल है उसके अस्तित्व के लिए सारी दुनिया से लड़ जाना।
कितना आसान है ना किसी की जिंदगी में झांक आना।
पर उतना ही मुस्किल है उसकी रूह में उत्तर कर उसके अंदर झांक पाना।
कितना आसान है ना किनारे पर बैठ कर लहरों को देखना।
पर उतना ही मुस्किल है उनमे उठे जज्बातों के तुफान को देख पाना।
कितना आसान है ना एक माला से मनको को अलग कर देना।
पर उतना ही मुस्किल है चुन-चुन के हर मनके को एक माला में पिरोना।
कितना आसान है ना किसी पर अपना अधिकार जमाना।
पर उतना ही मुस्किल है स्वयं को उसके अधीन करके जिंदगी को जी पाना।
Bharti
कितना आसान है ना किसी के अस्तित्व पर सवाल करना।
पर उतना ही मुस्किल है उसके अस्तित्व के लिए सारी दुनिया से लड़ जाना।
कितना आसान है ना किसी की जिंदगी में झांक आना।
पर उतना ही मुस्किल है उसकी रूह में उत्तर कर उसके अंदर झांक पाना।
कितना आसान है ना किनारे पर बैठ कर लहरों को देखना।
पर उतना ही मुस्किल है उनमे उठे जज्बातों के तुफान को देख पाना।
कितना आसान है ना एक माला से मनको को अलग कर देना।
पर उतना ही मुस्किल है चुन-चुन के हर मनके को एक माला में पिरोना।
कितना आसान है ना किसी पर अपना अधिकार जमाना।
पर उतना ही मुस्किल है स्वयं को उसके अधीन करके जिंदगी को जी पाना।
Bharti
No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box