वो कहते है ना जब ईश्वर है तो हमें चिंता करने की जरूरत क्या।
और यदि ईश्वर नहीं है, तो हमारे चिंता करने से होगा क्या।
"बस मुझे ये मिल जाए मेरे मौला।
बदले में चाहे और कुछ भी ले-लेना।"
हे ! मेरे मौला , ये कैसा? पागलपन करते हैं।
रिश्तों में ही नहीं ये तो, तुमसे भी शौदा करते हैं।
हिम्मत तो देखो तेरे- मानव की।
जो सांसों के लिए तुझसे आश लगाए है।
वो आज तुम्हें खुश करने के लिए आया है।
तेरी खिलती कलियां तोड़ कर वो हार बनाकर लाया है
तुने क्या करने के लिए भेजा है।
ये कहां उलझ कर रह गए हैं।
तुने रक्षक बनाकर भेजा जिसको।
वो ही भक्षक बन बैठा है।
तू तो बिना बोले सुनता सबकि फिर ये क्यों पाखंड रचाते हैं।
भूखे को तड़पता छोड़कर ये तुम्हें छप्पन भोग चढ़ाते हैं।
तेरे बनाएं मानव को बेआबरू करके तुम्हारे चादर चढ़ाते हैं।
किसी के घर का दीपक बुझाकर, ये तेरे दर पर मोम जलाते हैं।

0 Comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box