एक सोच
नहीं जानते कितनी सच्चाई है, या यूं कहें कि ये मेरा वहम है। अगर यह मेरा वहम है तो ही सही है।
हमारा समाज पुरुष प्रधान है, कहीं ना कहीं यह सच है। लेकिन मेहनत के नाम पर महिला आगे है।काम चाहें जो भी हो महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। लेकिन जब अधिकार की बात आती है तो महिलाओं को कतार में खड़ा कर दिया जाता है। खैर छोड़िए इस टोपिक को , यह एक ऐसी जंग है जो सदियों पहले शुरू हुई थी लेकिन अंत न जाने कब होगा।
आज का मेरा बस एक छोटा सा विचार है जो मैं आप सभी के साथ बांटना चाहती हूं।
("देखो मेरे लिए पहले मेरा परिवार है उसके बाद तुम")
अक्सर ये शब्द सुनने को मिलते हैं। और यह शब्द मुझे तब भी अच्छे नहीं लगते है जब तक कोई शख्स किसी दूसरे शख्स को कहता है। आखिर इन शब्दों का क्या मतलब है। ये शब्द एक कमजोर इन्सान की पहचान है। क्योंकि उसमें किसी भी रिश्ते को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं होती। ये शब्द आज के समय में बोयफ्रन्ड - गर्लफ्रेंड को और पति - पत्नी को अक्सर बोलते हैं।
मतलब मुझे तो समझ नहीं आता वो ये सब कि "मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम" कहकर क्या साबित करना चाहते हैं। यही की हम कमजोर हैै। हममें हिम्मत नहीं है खुद को अपने विचारों को अपने परिवार और अपने समाज के सामने रखने की। अगर हमें आपके लिए अपनों से लड़ना पड़ेगा तो हम नहीं लड़ पाएंगे।
क्या एक मर्द सच में कमजोर होता है ----
सायद हां एक औरत के नजरिए से एक मर्द बहुत ताकतवर होता है। जब एक औरत की जिंदगी में कोई पुरुष आता है तो वह यही समझती है कि वह पुरुष उसकी हिम्मत बनेगा, वह उसके सपनों को साकार करने में मदद चाहें ना करें लेकिन वह अगर गिरने लगी तो उसे सहारा जरुर देगा।
लेकिन असल जिंदगी में कुछ और ही होता है। वह पुरुष जिसे वह ताकतवर समझती है वह उसे और भी कमजोर बना देता है। जबकि एक औरत अकेले सारी दुनिया से उस पुरुष के लिए लड़ जाती है।
औरत केवल एक औरत नहीं होती उसके बहुत सारे रुप होते हैं।
जब वह एक बेटी होती है तो वह अपने पिता का मान रखने के लिए किसी ऐसे शख्स के साथ अपनी पूरी जिंदगी बीताने को तैयार हो जाती है जिसे वह जानती तक नहीं। पिता के घर में उसे कभी ना कभी यह सुनने को मिलता है ।
"हमारे लिए हमारे परिवार की मान पहले है तुम उसके बाद।"
किसी शख्स से वह जाने अंजाने में प्यार करने लगती है जो उसे बहुत से सपने दिखाता है, लेकिन जब साथ चलने की बात आती है तो उसे सुनने को मिलता है देखो
"मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"
जब वह शादी करके ससुराल जाती हैं, तो वह अपना सब कुछ अपने पति को मानती है उस परिवार की खुशहाली के लिए अपनी खुशी भूल जाती है। वह उसे कभी ना कभी अपने पति से सुनने को मिलता है,देखो
"मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"
इसके बाद वह मां बनती है तो सोचती है। कि मेरी औलाद जिसे मैंने पैदा किया है।जिसकी परवरिश मैंने की है। उससे स्वार्थ मुझे वो सब सुनने को ना मिले। लेकिन अपनी औलाद से भी उसको सुनने को मिलता है। मां -
"मेरे लिए मेरा लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"
सच में औरत बहुत ताकतवर होती है वह सबको अपना मानती है,लेकिन उसकी सारी उम्र गुजर जाती है। असल में उसका ना तो कोई अपना होता है और ना ही उसका अपना कोई घर होता है।
उसको कोई अपना ना होते हुए भी वह अपनी जिंदगी सबको अपना कहकर गुजार देती है।
सच में बहुत ताकतवर होती है औरत
क्या ऐसा नहीं हो सकता-------......
कि कोई ऐसा शख्स हो जो उसे यह कह सके कि " मेरे लिए मेरा परिवार पहले है, लेकिन तुम उस परिवार से अलग नहीं हो"
जब आपको पता है, कि मैं अपने परिवार को वह सब नहीं समझा पाऊंगा की कोई और शख्स भी है। जिसे मैं अपने परिवार में लेकर आना चाहता हूं और बाकी सदस्यों की तरह ही उसे भी परिवार का सदस्य होने का हक मिलना चाहिए। तो फिर आपको यह कोई अधिकार नहीं है कि आप किसी की भावनाओं का मजाक बनाएं।उसे पहले खुद पर विश्वास करना सिखाएं, फिर प्यार करना सिखाएं, जब वह आपके ऊपर विश्वास करें। आपको अपनी दुनिया मानने लगे तब आपका जवाब हो "देखो मेरे लिए मेरा परिवार पहले है उसके बाद तुम।"
इससे अच्छा है आप इन सबसे दूर ही रहो किसी को सहारा देकर छिन लेना -- किसी को अपाहिज करने के बराबर होता है।
"मैं मेरे लिए मेरे परिवार का मान सम्मान बहुत जरूरी है, लेकिन तुम भी तो मेरा मान हो।"
"मां मेरी बीवी बच्चे मेरे लिए जरूरी है, लेकिन उस परिवार की नींव तो तुम ही हो ना।"
मैं खुद के लिए और खुद के सपनों के लिए जीना चाहता हूं, लेकिन तुम्हें भी सपने देखने का पूरा हक है। मैं तुम्हें खुश सायद नहीं रख पाऊं लेकिन कोशिश करूंगा कि तुम्हारी तकलीफ़ को और न बढ़ाऊं।

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