- दुनिया को बदलते-बदलते मै कितना बदल गई
- पहचानने से मुझको आईना मुरक गया
- अरे क्या थी वो मजबूरी जो मुझे मजबूर कर गई
- हमारी मजबूरी पर ये दुनिया मस्ती कर गई
- मेरी इस दुनिया से होड़ लग गई
- मुझे धकाकर ये दुनिया आगे निकल गई
- हम संसार के इन नजारो में इस कद्र डूब गए
- डुबोने से मुझको दरिया मुकर गया
- संसार का स्वाद चखते-चखते हम अपना स्वाद भूल गए
- जमाने की चाल में चाल मिलाते-मिलाते हम अपनी चाल भूूल गए
- जिन्दगी में अनेको आए और चले गए
- किसी को हमने समेट लिया तो कोई हमे समेटते चले गए
- फर्माइशे पूरी की सबकी मैने
- सबने मुझे ही खिलौना बना दिया
- कहते है नासमझ हूँ मैं
- फिर भी स्लाह देने के काबिल बना दिया
- दुनिया को बदलते-बदलते में इतना बदल गई
- दूसरो से मिले सहारे को छीना,
- अपने पैरो पर खड़ा होना सीखा दिया
Bharti

0 Comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box