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Tuesday, January 26, 2021

जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभव हम और आप-5

 1. 



कुछ तो सोच-समझकर तुमने हमें अपनाया होगा

हमने भी तुम्हें यूं ही तो दिल में ना बसाया होगा

कैसे निकाल कर फेंक दूं तुम्हें कांटे की तरह

उस कांटे की वजह से खून तो हमनें भी बहाया होगा।


2.



जानी यूं बिना मतलब के किसी कि जिंदगी में आया नहीं करते

जब बिछ गए हो राहों में सपने तो अरमानों को जगाया नहीं करते

यूं मान कर खूदा खुद को किसी के जमीर पर उंगली उठाया नहीं करते

अपना समझकर ही कोई तकलीफ बयां करता है उसे कमजोर समझकर मजाक बनाया नहीं करते।


3.



मुझसे एक वादा करो

कि मुझसे तुम कोई वादा ना करो

आदत है मुझे अकेले रहने की

मेरी खिड़की से तुम झांका ना करो

हमें अपने हालात से लड़ना आता है

सहारा देकर यूं हमें अपना आदि ना करो

हर वक़्त मैं ही क्यों समझोता करूं

कभी कोई फैसला हमारे हक़ में भी लिया करो। 


4.



मैं जिंदा हूं यह खबर वह खबरों में पता करते हैं

मैं जरूरी हूं उसकी हर जरूरत पर यह बात हर वक़्त गिनवाया करते हैं

उसे मुझपर भरोसा ना करने की कोई वजह नजर नहीं आ रही फिर भी।

अब कहीं पहचान में ना आएं तो अपना लिबाज़ बदल कर आया करते हैं।


5.



उसके लहजे से बेइंतहा शराफ़त झलकती है

किसी ने तोड़ दिया विश्वास उसकी गली आज भी महकती है

कोई आएगा लौट कर यह पलटकर देखने की अदा कहती है

बहुत तुफान भरा है उसके अंदर यह चीख-चीख कर उसकी खामोशी कहती है।


Sunday, January 17, 2021

मुझे हर पल का हिसाब चाहिए

 


भरोसा करना बहुत मुश्किल है अब तुम पर मुझे वक़्त चाहिए

 विश्वास को यूं कांच सा तोड़ना नहीं चाहिए

मेरा मजाक बना दिया कुछ तो असर तुम पर भी होना चाहिए

आज मेरी कलम लड़खड़ा गई रूह तो तुम्हारी भी कांपनी चाहिए।


आज मुझे मेरी जिंदगी का तुमसे हिसाब चाहिए

जिसमें लिखा था इंतज़ार मुझे मेरे हिस्से के वो पल चाहिए

बहुत सी काली रातें बैठ कर गुजारी हैं अब सवेरा चाहिए

आंखों से अश्रु तो मैंने ही बहाएं है उनका भी बंटवारा चाहिए


कामयाबी को तुमने पाया है लेकिन रिश्तों का ज़हान मुझे चाहिए

तुने उड़ान भरी आसमान अपने नाम किया मुझे ये जहां चाहिए

पानी सा बहाया वक़्त सारा मुझे हर पल का हिसाब चाहिए

जब उठी मुझ पर उंगली तुम्हारी तो बाकी तुम पर उठनी चाहिए


अब आओ अगर तुम लौटकर तो साथ में कुछ लिहाज होना चाहिए

क्या खो दिया तुमने आंखों में नमी ना हो बेशक लेकिन मुखौटा ना चाहिए

ये जिंदगी है सरकार हम जी लेंगे अकेले अब किसी की आदत नहीं चाहिए

हमें जिंदा रहना है तो आप भी सलामत रहे क्योंकि हमें इसमें भी बराबरी चाहिए


मैं और मेरी मां



मैं और मेरी माँ एक अनोखी दुनिया सजा रहे।
हसीं मजाक के ठहाके बस यूंहीं लगा रहे।
एक पल की जिंदगी एक पल की मस्ती यूंहीं बहा रहे।
कल हो ना हो बस आज में ही जिए जा रहे।

माना माँ तो माँ होती है
उसके आगे किसकी चलती है
मैंने कहा माँ से,
माँ इस बार हम सोक जरा सा महंगा पाल ले।
क्यों ना घर में एक कुत्ता पाल ले।

माँ ने चुटकी लेते हुए कहा
बच्चा अपने मन में ये बहम पाल ले
की हम घर में कुत्ता पाल ले
बेटा पहले तू अपने आप को तो पाल ले

माँ वो घर की रखवाली सुबह शाम करेगा
जब कोई बाहर से आएगा तो हमें इनफोर्म करेगा
तू डर मत और आवारा कुत्तों की गली में एंट्री बैन करेगा
पडोसियों में तेरे रूतबे को और ऊपर करेगा

और आप भी तो सड़क के पार रोज उसे खिलाकर आती हो
जब वो गिर जाए गड्ढे में बार-बार उसे निकालकर आती हो
मंदिर से लाया परसाद सबसे पहले उसे ही तो खिलाती हो
घर में पकाई पहली रोटी सबसे पहले उसे ही तो खिलाती हो

माँ तो माँ होती है माँ का दिल पसीज गया
हम भी घर में एक कुत्ता पालेंगे ये ऐलान किया गया
घरवालों के द्वारा अपनी फर्माइश का खाका तैयार किया गया
पिटबुल, लैबरा, जर्मन न जाने क्या-क्या नाम  सुझाया गया

अगली सुबह कुछ इस तरह से करवट बदल गई 
मां के द्वारा सड़क पार के कुत्ते को घर में शरण दी गई
सभी में बराबर से जिम्मेदारीया बांटी गई
घर में खुशियों के खजाना की जैसे नदी बह गई।।



Saturday, January 16, 2021

हे शारदे बस मुझको तू यूं तार दे


हे शारदे बस मुझको तू यूं तार दे.....।
बस मुझको तू यूं तार दे.....।

1.
हे शारदे तू मान दे सम्मान दे 
इस माया मोह के जाल से, मुझको तू यूं तार दे 
आऊ ना फिर मैं लौट के , मुझे चरणों में स्थान दें
मुझमें नहीं अब मैं बसी , अब मैं नहीं मुझमें बसी

2.
कोड़ी के बाजार से, रिश्तों के व्यापार से
टूटते हर श्वास से, उस बिखरी-बिखरी आश से
विरह की हूंकार से, अश्रु की हर धार से
बेखौफ नैनो के बांण से, मुझको बस तू तार दे

3.
कुछ टूटा है, कुछ छूटा है
कुछ पा लिया , कुछ खो दिया
तुने क्या दिया , मैंने क्या लिया
बेबाक सा बेखौफ सा मैंने सारा जीवन जी लिया।

4.
हर घट में तू , हर तट पे
हर सवास में, मेरे विश्वास में
हर दिल के दीयानत सा, जिसे पूजे सब भगवान सा
मन में उठती चाह सा, टूटते अभिमान से

बस मुझको तू यूं तार दे...।
बस मुझको तू यूं तार दे...।



जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों हम और आप 4

 "गजब का हूनर है तेरी बातों में।

मेरे जज़्बात पिंगल जातें हैं तेरे साथ होने में।"


2.


"क्या करोगे उस अभिमान का जो एक पल की खुशी ना दे सके

और वो दर्द ही क्या जिसे पलकों तले दबा ना सके।"

3.


" अ खुदा तू मेरी याददाश्त को इतना कमजोर बना दे।

कोई अपना अगर चला जाए जिंदगी से तो यादों का घोंसला मिटा दे।"

4.


"अपनों के लिए अपने सपने यूं ही नहीं छोड़े जाते।

ये कामयाबी के पन्ने हैं यूं ही नहीं पलटे जाते।"


5.

"जिम्मेदारी के आगे आत्मसम्मान की चिता यूं ही नहीं जलाई जाती।

जब पेट में भूख कि आग हो तब महलों की कल्पना नहीं की जाती।"


6.


" ये मुस्कराहट हमें विरासत में नहीं मिलती।

ये जंगल है जनाब यहां खुद की परछाई तक साथ नहीं चलती।"


7.


" यहां ठोकर खाकर गिरना और गिरकर उठना आसान नहीं है

खुद कि गलती ना होने पर भी गलत खुद को मान लेना आसान नहीं है।"

8.