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Saturday, January 16, 2021

हे शारदे बस मुझको तू यूं तार दे


हे शारदे बस मुझको तू यूं तार दे.....।
बस मुझको तू यूं तार दे.....।

1.
हे शारदे तू मान दे सम्मान दे 
इस माया मोह के जाल से, मुझको तू यूं तार दे 
आऊ ना फिर मैं लौट के , मुझे चरणों में स्थान दें
मुझमें नहीं अब मैं बसी , अब मैं नहीं मुझमें बसी

2.
कोड़ी के बाजार से, रिश्तों के व्यापार से
टूटते हर श्वास से, उस बिखरी-बिखरी आश से
विरह की हूंकार से, अश्रु की हर धार से
बेखौफ नैनो के बांण से, मुझको बस तू तार दे

3.
कुछ टूटा है, कुछ छूटा है
कुछ पा लिया , कुछ खो दिया
तुने क्या दिया , मैंने क्या लिया
बेबाक सा बेखौफ सा मैंने सारा जीवन जी लिया।

4.
हर घट में तू , हर तट पे
हर सवास में, मेरे विश्वास में
हर दिल के दीयानत सा, जिसे पूजे सब भगवान सा
मन में उठती चाह सा, टूटते अभिमान से

बस मुझको तू यूं तार दे...।
बस मुझको तू यूं तार दे...।



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