भरोसा करना बहुत मुश्किल है अब तुम पर मुझे वक़्त चाहिए
विश्वास को यूं कांच सा तोड़ना नहीं चाहिए
मेरा मजाक बना दिया कुछ तो असर तुम पर भी होना चाहिए
आज मेरी कलम लड़खड़ा गई रूह तो तुम्हारी भी कांपनी चाहिए।
आज मुझे मेरी जिंदगी का तुमसे हिसाब चाहिए
जिसमें लिखा था इंतज़ार मुझे मेरे हिस्से के वो पल चाहिए
बहुत सी काली रातें बैठ कर गुजारी हैं अब सवेरा चाहिए
आंखों से अश्रु तो मैंने ही बहाएं है उनका भी बंटवारा चाहिए
कामयाबी को तुमने पाया है लेकिन रिश्तों का ज़हान मुझे चाहिए
तुने उड़ान भरी आसमान अपने नाम किया मुझे ये जहां चाहिए
पानी सा बहाया वक़्त सारा मुझे हर पल का हिसाब चाहिए
जब उठी मुझ पर उंगली तुम्हारी तो बाकी तुम पर उठनी चाहिए
अब आओ अगर तुम लौटकर तो साथ में कुछ लिहाज होना चाहिए
क्या खो दिया तुमने आंखों में नमी ना हो बेशक लेकिन मुखौटा ना चाहिए
ये जिंदगी है सरकार हम जी लेंगे अकेले अब किसी की आदत नहीं चाहिए
हमें जिंदा रहना है तो आप भी सलामत रहे क्योंकि हमें इसमें भी बराबरी चाहिए

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