चाहे मुझे मेरी विदाई पर कफन ना देना मंजूर है मुझे।
लेकिन माँ का आंशुओं से भीगा आंचल मिले ये मंजूर नहीं मुझे।
मेरी आखरी विदाई में किसी का कंधा ना मिले मंजूर है मुझे।
पर उस पिता की लड़खड़ाती लाठी साथ चले ये भी मंजूर नहीं मुझे।
मुझे अग्नि मिले या कब्र ना मिले मंजूर हैं मुझे।
पर वहां मेरे भाई की सिस्कियां तन्हा रहे ये भी मंजूर नहीं है मुझे।
मेरी ना बहे अस्थियाँ गंगा में चाहे कोई ना आके रोए मेरी मजार पर सौ बार मंजूर है मुझे।
पर मेरी वो औलाद जो अभी आंखे खोले और जो ना पाए पास में मुझे ये मंजूर नहीं मुझे।
इससे पहले मैं उम्मीद बनूँ किसी की तू मुझे ही नाउम्मीद बना दे मंजूर है मुझे।
ना सुन पाऊँ किसी कि सिस्कियां तू मुझे अपने आप में समाके बैरागी बनाले सौ-सौ बार मंजूर है मुझे।
Bharti

