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Saturday, May 1, 2021

एक पल में सब खत्म होता नजर आ रहा है

 



फिर से वही दौर आ रहा है

आपने सुना नहीं वही शोर आ रहा है

सब वाकिफ हैं उस पहर से

हां कोरोना के कहर से

सुबह में कमाया शाम  को खा लिया

अब ना सुबह कमाने दिया तब तो बस जिंदगी को तुने जी लिया

अंत होगा इसका या हमारा कुछ नहीं कह सकते

बस सह रहे हैं जब तक सह सकते हैं

किसी पर भरोसा करें

या स्वयं को सुरक्षित रखें

जब उम्मीद की नजर से कोई देखता है

तो नजर बिना जुर्म किए झुकती है

अभी उसे पैदा हुए वक्त ही कितना हुआ था

और ये काका अब तक तो ठीक था

उसके घर में किसी को तो मदद के लिए जाना ही जाना चाहिए

उस मां ने अपने बच्चे और पति को खो दिया उसे भी तो सहारा चाहिए

एक बीमार को गुनहगार समझा जा रहा है

बिना किसी गवाह के कारागार में डाला जा रहा है

शाम को सुरज ढलेगा या जिंदगी जानते नहीं

सुबह में सुरज कि किरण होगी या नहीं जानते नहीं

एक पल में सब खत्म होता नजर आ रहा है

आंखों के सामने मौत का तांडव नजर आ रहा है

एक इंसान को सांसों के लिए लड़ते देखा है

अपनों को ही अपनों से दूर रहते देखा है

बिना किसी बहस के सन्नाटे में शोर होते देखा है

कई बार डर सा लगता है बहुत से सपने हैं बाकी इस सफर में

कहीं अकेले ना रह जाए इस जिंदगी के सफर में

अब तो एक विश्वास है उस रब पर

वो ही बनकर मेहर बरसेंगे हम पर

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