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Thursday, April 29, 2021

एक तरफा प्यार




एक तरफा प्यार क्या है?

बड़ा नायाब सा अहसास होता है एक तरफा प्यार


जिसकी हर कोई दुहाई दे वो होता है प्यार

और जो रूह तक को सुनाई दे वो होता है एक तरफा प्यार


जब हरकदम पर साथी का साथ मिल वो होता है प्यार

और जो मीलों तक की दूरी अकेले तय कर जाए वो होता है एक तरफा प्यार


जिसे मिलाने में पूरी कायनात लग जाए वो होता है प्यार

और जो कभी मुकम्मल ना हो वो होता है एक तरफा प्यार


जो जुदाई के नाम से तड़प उठे वो होता है प्यार

और जो मिलन की एक आस में पूरी जिंदगी गुजार दे वो होता है एक तरफा प्यार


एक पर्वत की ऊंचाई सा पर हासिल होता है प्यार

और जो सड़क के दो किनारों से साथ चलते रहे पर कभी मिल ना सके वो होता है एक तरफा प्यार


" जनाब जहाँ उनकी राहों के कांटे हो या फिर अपनी आंखों के आंशु खुद ही साफ करने पड़े वो एकतरफ़ा प्यार होता है।"

 





Friday, April 16, 2021

Dream world

 


अक्सर पूछती रहती हैं मुझसे कमाई मेरी

मैं उनको हंस कर दिखा देती हूं खाली तिजोरी मेरी

हौसला करके उसने पूछ ही ली मुझसे उड़ान मेरी

अभी बाकी है सपनों की उड़ान मेरी

सपनों से जाग जाओ अरे खाली तिजोरी है तेरी

इतना क्यों सोचती है पहचान मेरी

जब सिर पर ईश्वर का हाथ और उसमें रोटी है मेरी 

विदाई में कारवा साथ चलेगा ,

तू देखना अभी तो बस यही कमाई है मेरी

और हां अभी जरूरतें बनना शुरू हुई है

उनको पूरा करने की ख्वाहिश है मेरी

कुछ भी नामुमकिन नहीं है इस दुनिया में - मां कहती है मेरी

बड़े जोरों का शोर सुनाई दे रहा है

स्वागत में देख बादलों की भीड दिखाई दे रही है

अभी तो भीड़ को जानना शुरू किया है 

उनके दिलों पर राज करने की ख्वाहिश बाकी है मेरी

अब तक तो बस सुना था नेकी कर दरिया में डाल

उस दरिया को नेकी से भर देना बाकी है मेरा

अभी शरीर से सांसे दूर होंगी नहीं मेरी

क्योंकि सपनों की दुनिया बसाना बाकी है मेरा


Tuesday, April 13, 2021

किसी की तलाश

 


कितनी अजीब बात है ना..--

इंसान इस दुनिया में अकेला आता है

और जब से वह अपना होश संभालता है

एक ऐसे साथी की तलाश में निकल खड़ा होता है

जो उसको समझे, उसके सुख - दुख में उसका साथ दे, जब सारी दुनिया में उसका साथ देने वाला कोई ना हो तब वह उसके लिए हमेशा खड़ा रहे।

लेकिन हम यह क्यों भूल जाते हैं कि भगवान ने हमें इस दुनिया में भेजने से पहले कुछ तो सोचा होगा। 

ईश्वर हर इंसान को संपूर्ण बनाकर ही इस धरती पर भेजता है।

देखा जाए तो हमारा सबसे बड़ा साथी हमारे आंसू होते हैं। यहां मन उदास हुआ कि वह प्रकट हो गए। और वो दुख में ही नहीं बल्कि खुशी में भी अपना साथ नहीं छोड़ते।

यह क्यों सोच कर परेशान हो कि - हमारे लिए कोई हो या हम किसी के लिए हो। इंसान का संपूर्ण शरीर उसके लिए सब कुछ  है। जिस प्रकार मां अपने बच्चे को पैदा करने के बाद उसे नहीं भूलती।
तो आपने यह कैसे सोच लिया कि हम अकेले हैं। ईश्वर है ना हमारे साथ, तो बस आप हमेशा खुश रहें और अपना कर्म करते रहें। और चिंता करने का काम उस परमात्मा पर छोड़ दें। अगर ईश्वर है तो हमें कुछ चिंता करने की आवश्यकता ही नहीं है। और जहां ईश्वर नहीं तो चिंता करने से होगा क्या। और जहां आपने चिंता या अविश्वास ही कर लिया तो आपको ना तो ईश्वर पर और ना ही अपने आप पर विश्वास है।

कहते हैं ना " जहां मैं हूं वहां मैं नहीं और जहां मैं नहीं वहां मैं हूं।"

Friday, April 9, 2021

बेनाम सा रिश्ता अपना वजूद खोज रहा है


तुम को पन्नों में उतार पाना कहां मुमकिन है,


कुछ भी तो नहीं था 
मेरे और तुुुम्हारे दरमियान
अनजान सी गलियां , बेनाम सा रिश्ता
कुछ मौन हम रहे तुम भी तो खामोश थे

रेल की पटरी से हम साथ चलते रहे
कैसा रिश्ता था ये हम इसमें भी संंतुष्ट रहे
बेमतलब की बातों से कहीं दूर रहे
हम अपने सपनों की दूनिया सजा रहे

साथ चलते हुए झांंक आया करते थे एक-दूसरे में हम
अब तो जरूरी सा लगने लगे एक-दूसरे को हम
जब लडखडाते कदम कसके बाह पकड़ लेेेतेे एक दूसरे की हम
साथ चलते रहे वक्त जैसा भी आया बाट लेते हम

तू अपने सपनों को तलाशने में व्यस्त रहा
तलाश हमारी भी तो जारी रही
बस वक्त के पन्नों को पलट रहे
पन्ने के हर शब्द में जिक्र एक- दूसरे का करते रहे 

अपने और सपने बस सब कुछ इसी में उलझ कर रह गया
एक बार समय आकर फिर वहीं रुक गया
बेनाम सा रिश्ता अपना वजूद खोज रहा
फिर भी देख इंतजार इन आंखों को तेरा ही रहा।

इतने खुबसूरत शब्द तो हमारे पास भी नहीं हैं

                Bharti

समझ या समझौता




कई दिन से वो कलाई घर नहीं आई
मेरे घर की लक्ष्मी बिना तकिया के सोई
दीवारें पूछ लेती हैं चेहरे की ये रौनक तूने कहां गवांई
मन को मार खुद को समेटे बैठी हूं किस-किस को दूं गवाही।

2
वो दाग मिटाने में लगा है जो बाहर देश से आया है
जब साफ उनको करता है तो दाग हाथ लग आता है
दीवार सफेद हैं मेरे मकान की वो दाग कहीं ना लग जाएं
इसिलिये मेरे घर की लक्ष्मी बिना तकिये के सोती है।

पड़ोसी पूछ लेतें हैं तेरा घर बड़ा चुप्प-चुप्प सा रहता है
जो बर्तन शोर करते थे वो आजकल मौन रहते हैं
दिन भर महफ़िल सजती थी बड़ा सन्नाटा रहता है
वो भी बड़े शान से कहते हैं हम तेरे पड़ोस में रहते हैं

4
कभी घर आए तो आंगन पार ना कर पाए ऐसा क्यों होता है
तू अपने ही घर में दुत्कारा सा क्यों रहता है
ये कैसा दाग लगा है जग में जो अबतक ना धुल पाया है
क्या सर्दी क्या गर्मी ये तो बारिश से भी ना धुल पाया है

5
सदियों  की परंपरा को वो चुपचाप से ढोते आइ हैं
पहले वो पर्दे में थी आज सारा जहां पर्दे में नज़र आया है
सदियों से जो कहते थे हम दर्द अछूत का सहते आए हैं
इसने सबको अछूता बना दिया अब भेद समझ पाए हैं

6
जब ये लॉकडाउन था दिल बड़ा बेचैन रहता था
कोई भर पेट सोता था तो दिन रात रोता था
पैसे की होड़ में ये सारा जहां मदमस्त रहता था
पल में लाशों की बारिश देख कहां अब होश रहता है।

                      Bharti