ये तेरे हाथों की नम्रता बताती है
तूने कोई कमाइ नहीं की
हर वक्त बदलते मौसम की
सुनवाई नहीं की
अपनी ही धुन में चला
हमराही की निगरानी नहीं की
ये तेरी आंखों की सफाई बताती है
तूने जुदाई की तनहाई नहीं देखी
आवाज़ बड़ी दरदरी सी सुनाई पड़ती है
लगता है अपनों को सफाई नहीं दी
नाजुक जान पड़ते हैं कदमताल ये तुम्हारे
कभी किसी की बुनियाद के चक्कर नहीं लगाए
और हां तेरी जड़े बड़ी दूर तक फैलीं हैं
कहीं ओर रोपाई नहीं हुई
टुकड़े का महत्व समझ से परे है
लगता है कभी भूख ने दस्तक नहीं दी
कोई आश्चर्य नहीं होता तुमने वजन को किलोग्राम से मापा है
लगता है अब तक जिम्मेदारीयो़ं का वजन नहीं उठा पाया है।