क्यों ? क्या केवल हम ही सही हैं।
हम अक्सर दूसरों से यह उम्मीद करते हैं , की वो हमे समझे ।
क्या यह जरूरी है की हर बार वो ही हमे समझे।
हम भी तो उन्हें समझ सकते हैं। समझना तो दूर हम उन्हें सुनतेे तक नहीं। बस अपनी धुन में लगे रहते है।
अगर हम ये सब छोड़ दे....
और यह कहें की सामने वाला गलत नहीं है बस नजरिया थोड़ा अलग है। अगर हम उसको और उसके काम को उसके नजरिए से देखें तो सब आसान लगेेेगा और प्यारा भी लगेगा।जीवन में मधुरता आएगी।यह भी जरूरी है की हम खुद को गलत न कहें।
मुझे किसी ने कहा सुनो सबकि-करो मन की
हम कोई काम शुरू करने से पहले अगर किसी की राय ले तो यह गलत नही है।सामने वाले को सुनो उसके बाद उसकी सभी बाते फोलो करने की जरूरत नहीं है केवल उन्ही बातो को फोलो करे जो आपको अच्छी लगी।
जब हमें प्रेम के बदले में विरह की वेदना मिले तब..
हम अपने उस दुःख को लेकर बैट्ठे रहते हैं।हम हमारे आस- पास के माहोल से भागना चाहते हैं। हम समझते हैं मेंने भगवान से उन्हें सबसे ज्यादा मीन्न्ते करके माँगा है।
चलो !.....
आज कुुुछ सोचे
अगर हम यह सब एक तरफ रखकर सोचे, हाँ! हमारी प्रार्थना से ज्यादा शक्ति उसकी भक्ति में है जिन्होंने हमे भगवान से माँगा है। हमें किसी की जरूरत है, यह सही है लेकिन हम किसी की जरूरत हैं। यह सुनकर मन आसमान छुने लगता है।
Bharti




Very interesting great work
ReplyDeleteThank you sr
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