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Sunday, March 12, 2023

don't know why





पता नहीं क्यों तेरी बातें मेरे ज़हन से जाती नहीं
रात बीत जाती है पलकों तले नींद आती नहीं

पता नहीं क्यों तेरा जिक्र जुबां से हटता नहीं
और तेरे जिक्र कि हया से पलकें उठती नहीं

पता नहीं क्यों धड़कन की आवाज कानों में सुनाई देती है
एक पल को तेरी खबर ना मिले तो आत्मा रो देती है

पता नहीं क्यों अब तुम्हें दुआ में मांगा करती हूं
कहीं टूट ना जाए भ्रम मेरा बस इसी बात से डरती हूं

पता नहीं क्यों तेरी गैरमौजूदगी में तुमसे बहुत सी बातें होती है
और तुम रूबरू क्या आए खामोश ये रातें होती है 

पता नहीं क्यों मुझे सपना अब तेरा ही अच्छा लगता है
मेरा सपना ही तुम हो तो मुझे वो सपना सच्चा लगता है

पता नहीं क्यों खुद को भूल जाने को दिल करता है
पूछे कोई मेरे घर का पता तो तेरी दहलीज बताया करता है।

Friday, March 3, 2023

तू मेरी जिंदगी में कुछ इस तरह से शामिल हुआ है।

 


तू मेरी जिंदगी में कुछ इस तरह से शामिल हुआ है

जैसे शांत बहती नदी को तेज हवा ने छूआ है

तेरी मासूम सी सूरत ने सब कुछ कहा है

तूने अपने जीवन में क्या कुछ सहा है

इतने निशान दिखाई दे रहे हैं

लगता है चोट से बहुत तेरा गहरा नाता रहा है


मैं किसी पर भरोसा करूं यह शायद ही कभी हुआ है

सब आसान सा लगता है जैसे पांव ने ओस को छुआ है

अब छोटी सी जिंदगी है और कितना कुछ अनकहा है

मौन की गांठ बांध ली की एक पल को कारवां सा थमा है

और वो तेरा दिल तोड़कर चले गए तुम्हे भी दर्द तो हुआ है

लगता है जिम्मेदारी के बोझ तले अरमानों की चिता जला रहा है


जो पीछे कहीं छूट गई थी वो हंसी आज फिर से कहीं खिली है

आज लगा है तेज बारिश के बाद बादलों से सूरज की धुप खिली है

दीवार पर लगे आईने ने भी मुस्कुराकर पूछ लिया है

सवेरा होने को है तुमने आंखों को झपकने तक ना दिया है

एक सपना सा लगता है जो खुली आंखों ने देख लिया है

और तुम्हें पाया नहीं है देख खोने का खोफ साथ में जी लिया है


ये जिंदगी है सरकार इसने बहुत कुछ दिया है

पल जो भी हो हमने भी बहुत खूबसूरती से जीया है

और इसमें तू मेरे मुस्कुराने की वजह बन गया है

होंठों तले दबे हर सवाल का जैसे जवाब बन गया है

तुम्हें अपनी हर दुआ में मांगू तू वो मुराद बन गया है

इस सूखी पड़ी जमीन पर रिमझिम सी बरसात बन गया है




Friday, January 20, 2023

क्या मांगू उस रब से


 ना जाने कितने जख्म तुम्हारे दरवाजे से लेकर आए हैं।

झुठी मुस्कुराहट से, खुद का दर्द छुपाए है। 
आंखों से गिरते आंसू में,ना जाने क्यों तुम रहते हो।
और जब जब आंसू गिरता है, वो प्यार तेरा बहता है।
अब और क्या मांगू उस रब से , जब से तुम्हें पाया है।
इश्क तेरा, हमें  इस जहां में पागल कर गया है।
ना जाने एक साथ चलने वाले अपनी राह क्यों बदलते हैं।
राह बदलने पर अक्सर रास्ते भटकते हैं।
वो चाहे मीलों दूर हो या दिल के करीब ।
चाहने को तो पूरी दुनिया तुम्हारी हो, लेकिन होने को तो वो ही ख़ास होता है।
और क्या मांगू किसी से, सिवाय उसके या खामोशि के ।।।........