कितने सवालों के घेरे में हैं।
और क्या जवाब दें।
कुछ सवाल सही नहीं।
तो कुछ के जवाब सही नहीं।
कुछ सवाल के जवाब सुनना चाहते हम नहींं।
तो कुछ जवाब के लिए हम उम्र गुजारने को तैयार।
कुछ सवाल है जो हमने बनाएं है ।
तो कुछ अनजाने में बन गए।
ना जाने क्यों हम चाहते हैं।
हमारे हर सवाल का जवाब हमारे कहे अनुसार हो।
हर जवाब का इंतजार बस सांस के स्वर सा हो।
और हर जवाब में तुम शामिल रहो।
कुछ भी हो मेरे सवाल का जवाब भी तुम ही हो।
ये तिल तिल कटती जिंदगी में कुछ अंश तुम्हारे हो।
लेकिन वो सिर्फ मेरे हो।
और मेरे सवालों के धागे तुमसे ही उलझते हैं।
इसमें मेरा दोष नहीं है।
उन धागों को सुलझाकर मेरी आदत बदली है।
वैसे कितना अच्छा लगता है ना।
कोई तो है लाइफ में जो बिना किसी सवाल के जवाब बनता है।
ये कोई इतिफाक नहीं है।
हां अच्छा लगता है।
खुद पर विश्वास से ज्यादा किसी पर विश्वास करना।
बस उस विश्वास पर कभी सवाल नहीं उठताा।
क्या करें एक वो ही तो जवाब है।
और उस विश्वास का हि विश्वास रहता है।
नहीं जानते अब हम
ऐसा क्यों है।
