जिंदगी में क्या जरूरी है--
अक्सर इसी सवाल की तलाश में हम निकल खड़े होते हैं। और अपने आसपास के माहौल में खुद को उस पर रखते हैं। अक्सर अनसुलझे सवाल मेरे जेहन में घूमते रहते हैं। जिंदगी में क्या जरूरी है--कहने को कितना आसान और कितना छोटा सा सवाल है पर इसकी तलाश में पूरी जिंदगी निकल जाती है क्या जरूरी है जिंदगी में -----
वैसे क्या जरूरी है जो हमें प्यार करते हैं
या जिन्हें हम प्यार करते हैं
मेरे लिए इन दोनों में से किसी एक को चुनना नामुमकिन सा लगता है। क्योंकि हमारी जिंदगी अकेले हमारी नहीं होती जिंदगी में अपना वजूद और अपनों का साथ बहुत मायने रखता है। जो हमें प्यार करते हैं वह हमारी हर छोटी बड़ी ख्वाहिशों का ख्याल रखते हैं। और जिन्हें हम प्यार करते हैं उनकी हर पसंद नापसंद का खयाल हम रखते हैं। जो हमें प्यार करते हैं वह हमें किसी भी तकलीफ में नहीं देख सकते वह हमारे लिए खुद को मिटा बैठते हैं। हम जितनी ऊंचाई पर हैं वह एक सीडी की तरह हमें उस ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करते हैं।
और जिन्हें हम प्यार करते हैं उन्हें ऊंचाई पर पहुंचाने में हम खुद को भूल जाते हैं। हमें कोई अंदेशा नहीं होता भविष्य में हमारे साथ क्या होगा। बस खुद को भुलाकर हम अपनों की खुशी में मस्त रहते हैं।
लेकिन मेरे इस सवाल का जवाब मुझे नहीं मिला है कि जिंदगी में क्या जरूरी है जो हमें प्यार करते हैं या जिन्हें हम प्यार करते हैं?
सच्चा दोस्त---
कहते हैं प्यार में इंसान सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने प्रेमी के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता वह जो कुछ भी कहे वही सही नजर आता है। उसे जिंदगी की सच्चाई नजर नहीं आती ईश्वर ने क्या हमें यह जिंदगी यूं ही दबाने के लिए दी है या कुछ करने के लिए। क्योंकि जो इंसान किसी एक इंसान के लिए खुद को भुला सकता है। असल में वह इंसान अगर चाहे तो जिंदगी में एक अनछुआ मुकाम हासिल कर सकता है।
दोस्त यह महज़ एक शब्द ही नहीं है। यह एक इंसान की दुनिया होता है चाहे वह हमें जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर मिले लेकिन एक सच्चा दोस्त जिंदगी को सवार देता है। सच्चा दोस्त हमें संभालता है चाहे वक्त बुरा हो या अच्छा वह हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता। हम भले ही उससे रोज बातें ना करते हो लेकिन हमारे बात करने के लहजे या यूं कहें हमारे पहले अल्फाज से वह हमारे दिल का हाल समझ लेते हैं। हमें उन्हें अपनी मजबूरी बताने की जरूरत नहीं होती खुद को समझाने की जरूरत नहीं होती वह बिना कहे सब समझ जाते हैं वह हमारे संपूर्ण दुनिया होते हैं। अगर माता-पिता के बाद कोई हमें समझ पाता है तो वह हमारा दोस्त होता है। दोस्त को हमारी कमजोरी और हमारी ताकत अच्छे से पता होती है अगर वह चाहे तो हमें पल में मिटा सकता है और वह चाहे तो हमें चांद पर बैठा सकते हैं। जिंदगी में हम अपने बचपन में अपने मां बाप के सामने बहुत रोते हैं कभी वह रोना असल में होता है कभी अपनी जिद्द मनवाने के लिए अब नाटक करते हैं। लेकिन जब हम अपना होश संभालते हैं और उस वक्त हमारी आंखों में नमी आती है वह सिर्फ एक सच्चे दोस्त के सामने ही अति आती है। हमारी होश संभालने के बाद हम अपने मां बाप के परिवार के सामने रो नहीं पाते लेकिन जिंदगी में अगर सच्चा दोस्त हो तो अपने अंदर की घुटन को मिटाने के लिए दोस्त कंधा बहुत याद आता है। अक्सर देखा है मैंने सच्चा प्यार ना मिलने पर बहुत जल्द ब्रेकअप हो जाते हैं कितनी अजीब बात है ना दोस्ती में कभी ब्रेकअप नहीं आते दोस्ती में बस दोस्ती होती है।
मुझे भी मेरी जिंदगी में एक नहीं दो दोस्त मिले हैं पहली मेरी सच्ची दोस्त मुझे मेरी मां के रूप में मिली है बचपन से लेकर आज तक मुझे अच्छी बुरी हर चीज की समझ दी है।
और दूसरी सच्ची दोस्त मुझे मेरे कॉलेज में मिले हैं जिन्होंने मुझे बहुत कुछ सीखा है और समझाया है। मैं यह नहीं कहते कि वह मेरे अच्छे बुरे में मेरा साथ देते हैं। लेकिन हां जहां भी उन्हें यह लगता है मैं गलत हूं वहां मुझे रोक देते हैं और जो उन्हें सही लगता है वह मुझे बताते हैं। उसकी यही बात मुझसे बाकी सब से अलग बनाती हैं। इसीलिए वह मेरी सच्चे दोस्त हैं।
Thank you Seema
And thank you mummy.
मेरी जिंदगी में आना और उसे इतना प्यारा बनाने के लिए।